Aayyari-3

अय्यारी ने निराश किया। नीरज पांडे ने इसके पहले ए वेडनेस डे, स्पेशल 26, एमएस धोनी, बेबी जैसी फिल्में दी हैं। अय्यारी में एक मनमोहक गाने के अलावा कुछ भी विशेष नहीं है। गलतियों की शुरूआत ही डिस्क्लेमर से होती है, जिसमें अनेक त्रुटियां शुरूआत में ही मूड ऑफ कर देती है। सेना की पृष्ठभूमि को प्रचारित किया गया है, लेकिन यह फिल्म भ्रष्ट नेताओं, हथियारों की खरीद में भ्रष्टाचार, मीडिया के सतही कवरेज आदि पर ही खत्म हो जाती है। कई बार सेना की बेइज्जती भी की गई। सेना के वरिष्ठ अधिकारी द्वारा गोली लाओ कहने पर अर्दली विटामिन डी की गोली का डिब्बा ले आता है। यह बात शायद ही किसी को हजम हो। मजाक में भी यह बात संभव नहीं दिखती। सिद्धार्थ मल्होत्रा एक दृश्य में ब्रिटिश महिला के गेटअप में अलग लगे।

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VODKA-DIARIES-1

वोदका पीना सेहत के लिए हानिकारक है, क्योंकि इसमें अल्कोहल होता है। इसी तरह वोदका डायरीज देखना आपके बटुवे के लिए हानिकारक है। यह फिल्म हॉलीवुड की शटर आईलैंड से प्रेरित बताई जा रही है। कहने को मर्डर मिस्ट्री है, लेकिन इंटरवल के पहले ही दर्शकों को आभास हो जाता है कि कहानी में क्या लोचा हो सकता है? कहानी मनाली (हिमाचल प्रदेश) के एक एसीपी की है। हिमाचल प्रदेश में पुलिस कमिश्नर सिस्टम कहां है भई? अब आप अंदाज लगा लो कि वोदका में कितना नशा होगा।

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mukkebaaz2

अनुराग कश्यप की ‘मुक्काबाज’ को गत वर्ष टोरेंटो फिल्म फेस्टिवल और मुंबई के मामी फिल्म फेस्टिवल में भले ही जमकर वाहवाही मिली हो, लेकिन यह फिल्म आला दर्जे की उबाऊ, पकाऊ और झिलाऊ है। जितने समय की यह फिल्म है, उससे एक तिहाई में पूरी कहानी कही जा सकती थी। यह न खेल फिल्म बन सकी है, न प्रेम फिल्म। ऐसा लगता है कि यह फिल्म समीक्षकों और खुद के लिए बनाई गई है। दर्शकों का ध्यान नहीं रखा गया, जब दर्शकों के लिए फिल्म बनाई ही नहीं, तब खुद ही देखो इस फिल्म को।

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Firangi-3

फिरंगी एक महापकाऊ फिल्म है और 160 मिनिट तक उसे झेल पाना कोई मजाक बात नहीं। हंसाने की कोशिश में यह फिल्म कामयाब नहीं हो पाई। 1921 की कहानी, जिसमें अंग्रेज, राजा, शोषित गांव वाले और गांधीजी के ऐतिहासिक संदर्भ ठुंसे गए है। समझ ही नहीं आता कि यह कॉमेडी फिल्म है कि रामांटिक? ठंडे तेल में जीरे की तरह देशभक्ति का तड़का भी है, जो कहीं से भी देशभक्ति नहीं लगता।

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TIGER-6

फिल्मी गीता का सार - टाइगर जिंदा है। टाइगर अमर है। टाइगर को कोई मार नहीं सकता। टाइगर को अग्नि प्रज्जवलित नहीं कर सकती। टाइगर को पानी गला नहीं सकता। टाइगर को वायु उड़ा नहीं सकती, क्योंकि टाइगर, ‘टाइगर' है। जिस तरह भारत सरकार ने ‘सेव टाइगर' प्रोजेक्ट चलाया है, वैसे ही बॉलीवुड ने भी अभियान चलाया है सेव टाइगर। बॉलीवुड का टाइगर चार पांव का नहीं, दो पांव का है और उसका नाम सलमान खान है ! अगर आप थिएटर में ज्यादा दिमाग लगाने की जहमत नहीं उठाएं तो फिल्म पैसा वसूल करा देती है।

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SULU-1

उम्र के 40वें साल में विद्या बालन ने ‘साड़ी वाली भाभी आरजे’ का रोल ठीक ही किया है। डर्टी पिक्चर और बेगम जान से अलग हटकर इसमें विद्या बालन का रोल ‘लगे रहो मुन्ना भाई’ की आरजे जैसा है। मुन्ना भाई में वह गुड मार्निंग मुंबई कहती थी, इसमें साड़ी वाली सेक्सी भाभी के अंदाज में हैलो कहती है, रात के शो में अजीबो-गरीब टेलीफोन कॉल का जवाब देती है और गाने भी सुनवाती है। साफ-सुथरी कॉमेडी फिल्म है, जिसके निर्माता और निर्देशक सुरेश त्रिवेणी है, जो विज्ञापन फिल्में बनाते हैं। निम्न मध्यमवर्गीय परिवार मुंबई के सुदूर विरार उपनगर में रहता है। आय का एक मात्र स्त्रोत सुलोचना के पति अशोक की 40 हजार रुपए की तनख्वाह है। एक बेटा स्कूल जाता है। 3 बार 12वीं में फेल सुलोचना किसी तरह अपने परिवार की गाड़ी हंसते-खेलते चलाती है। कभी वह निंबू दौड़ जीतती है, कभी अंताक्षरी। बक-बक करने वाली सुलोचना किसी तरह एक एफएम रेडियो में आरजे बन जाती है।

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