TTF 4

द ताशकंद फाइल्स का डायलॉग है - ट्रूथ इज़ ए लग्ज़री। फिल्म यह लग्जरी बर्दाश्त नहीं कर पाई। दूसरे डायलाॅग भी कम दिलचस्प नहीं है। जैसे टीवी के सामने बोलने के लिए नहीं, चुप रहने के लिए करेज की जरूरत होती है। राजनीति में कुछ भी सच नहीं होता, लोग सच नहीं, सच की कहानी सुनना पसंद करते है। एक अन्य जगह गृह मंत्री कहते है कि सच से नहीं, अफवाहों से डरना चाहिए, क्योंकि अफवाहें इस तरह फैलती है कि लोग अफवाहों को ही सच समझने लगते है। फिल्म कहती है कि ग्लोबलाइजेशन केवल कार्पोरेट गुलामी है और कुछ नहीं। लोकतंत्र वोट से नहीं विवेक और विचार से चलता है। ऐसे ही डायलाॅग्स को मिलाकर शास्त्रीजी की मृत्यु के 53 साल बाद एक फिल्म बनाई गई है, जिसका मकसद मोटे तौर पर यही नजर आता है कि लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु हार्ट अटैक से नहीं हुई, उनकी हत्या की गई और उनकी हत्या में कुछ खास लोगों को फायदा हुआ। अब आप अंदाज लगाइए कि किन्हें फायदा हुआ था। फिल्म इस तरह जलेबी की तरह घुमा कर बातें कहती है कि खत्म होते-होते दर्शक को लगता है कि लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु सोवियत संघ की खुफिया एजेंसी केजीबी का षड्यंत्र थी। फिल्म यह भी कहती है कि लाल बहादुर शास्त्री अगर जीवित होते, तो 10-15 साल उन्हें कोई चुनौती नहीं दे सकता था। वे भारत को सुपर पॉवर बनाना चाहते थे और परमाणु कार्यक्रम को आगे ले जाना चाहते थे। वहीं यह फिल्म यह भी बताती है कि विजय लक्ष्मी पंडित लाल बहादुर शास्त्री के विरुद्ध संसद में अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई थीं।

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Fake 2

हाल ही में हुए सर्वे में यह बात सामने आई है कि लोकसभा चुनाव के ठीक पहले फेक न्यूज का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। आबादी का 62 प्रतिशत हिस्सा फेसबुक और वाट्सएप के जरिये फेक न्यूज प्राप्त कर रहा है। इससे फेसबुक का वह दावा गलत साबित होता है, जिसमें कहा गया था कि फेसबुक ने भारत में 10 लाख फर्जी अकाउंट प्रतिदिन डिलीट करने का फैसला किया है। सर्वे के अनुसार फेसबुक और वाट्सएप ऐसे माध्यम है, जो फेक न्यूज का प्रचार करने के प्राथमिक माध्यम कहे जा सकते हैं।

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notebook1

सलमान खान प्रोडक्शन की नोटबुक काश्मीर की पृष्ठभूमि पर बनी एक ऐसी फिल्म है, जो पुराने जमाने की रोमांटिक फिल्मों की याद दिलाती है, लेकिन फिर भी फिल्म में ताजगी और नयापन है। श्रीनगर की डल झील के शिकारे में बनी एक स्कूल के 7 बच्चों और उनकी टीचर के प्रेम की कहानी ज्यादा है। नए टीचर के आने के बाद भी बच्चों का प्रेम बरकरार रहता है। दो टीचर एक नोटबुक के जरिये मिलते है और एक-दूसरे के हो जाते है। बच्चों की मासूमियत और टीचर्स की सादगी के बीच भुनी गई सुंदर प्रेम कहानी कई बार मुस्कुराने पर मजबूर करती है।

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Badla

फिल्म बदला एक मर्डर बेस्ड डाॅक्यु-ड्रामा है। एक वकील और उसकी युवा, सुंदर, पढ़ी-लिखी, पावरफुल और अनैतिक कार्य करने वाली मुवक्किल के बीच। तमाम झोल के बावजूद फिल्म लगभग 2 घंटे दर्शकों को बांधे रखती है और बताती है कि झूठ के पंख कैसे होते है। अंतरर्राष्ट्रीय महिला दिवस के दिन रिलीज हुई इस फिल्म में महिला की नकारात्मक शक्ति दिखाई गई है, जो बताती है कि एक महिला अपने अनैतिक कार्य को छुपाने के लिए किस हद तक नीचे गिर सकती है। अमिताभ बच्चन, तापसी पन्नू, अमृता सिंह और कहानी इस फिल्म की जान है। एक स्पेनिश फिल्म पर आधारित इस फिल्म का पूरा ताना-बाना ब्रिटेन का है, लेकिन पात्र भारतीय है।

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Photograph 1

नवाजुद्दीन सिद्दीकी और दंगल गर्ल सानिया मल्होत्रा की फोटोग्राफ फिल्म नहीं, आपके धीरज की परीक्षा है। फिल्म इतनी मंथर गति से चलती है कि अगर आप नींद में हो तो ही इसे पसंद कर सकते हैं। गेट वे ऑफ इंडिया पर 50 रूपए में पर्यटकों के फोटो खींचने वाला हीरो एक लड़की का फोटो 30 रूपए में खींचने को तैयार हो जाता है। वह फोटो खींचता है और उसे पन्नी में डालने के लिए झुकता है, इतनी देर में लड़की चली जाती है। फोटो हीरो के पास ही रह जाती है। इसलिए कहानी शुरू हो गई फोटोग्राफ। अगर लड़की लंच बॉक्स भूल जाती, तो इसका नाम लंच बॉक्स - 2 हो सकता था।

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Dhamal 3

बेवकूफाना फिल्में देखने का अपना मजा है। टोटल धमाल देखने के लिए जाते समय यही बात मन में थी, लेकिन इतना फिजूल का हंगामा देखने को मिलेगा, यह आशा नहीं थी। नोटबंदी के बाद घोटाले के 50 करोड़ का खजाना लेकर पुलिस कमिश्नर और 10 अन्य किरदारों की कहानी है यह फिल्म। दिलचस्प बात यह है कि इसमें सभी पात्र जोड़ी से आते है। इस तरह 5 टीमें 50 करोड़ के पीछे है और वे मुफ्त के माल के लिए कुछ भी करने को तैयार है। अजय देवगन, माधुरी दीक्षित, ईशा गुप्ता, अनिल कपूर, अरशद वारसी, जॉनी लिवर, रितेश देशमुख, जावेद जाफरी, बोमन ईरानी, संजय मिश्रा, महेश मांजरेकर, पीतोबास त्रिपाठी, सुदेश लहरी, निहारिका रायजादा, स्वाति कपूर, राजपाल यादव, विजय पाटकर, सोनाक्षी सिन्हा आदि कलाकार की भीड़ के अलावा इसमें संजय दत्त के पुराने फुटेज और जैकी श्राॅफ की आवाज भी है। इतने कलाकारों की भीड़ बेसिरपैर की हरकतें और वाट्सएप के पुराने लतीफे प्रचलन में लाने की कोशिश करती है।

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