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इंदु सरकार के बाद बादशाहो इमर्जेंसी के बैकड्रॉप पर आधारित एक्शन-ड्रामा फिल्म है। जो बताती है कि संजय गांधी दुष्चरित्र थे और प्रीवी पर्स खत्म होने के बाद वे राजाओं के निजी खजाने को लूटकर इकट्ठा कर रहे थे। आपत्तिजनक बात यह है कि इसमें सेना को नीच हरकतें करते हुए दिखाया गया है। कथानक के अनुसार इमर्जेंसी में न केवल पुलिस, बल्कि फौज भी संजय गांधी के इशारे पर चापलूसों की तरह काम करती थी। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को नेताओं की जी-हुजूरी करते हुए दिखाया गया है, जो पचता नहीं। मनोरंजन के नाम पर लोग शायद इसे झेल लें। रेस फिल्म की याद दिलाने वाली इस फिल्म में भी धोखा, छल, फरेब, झूठ, मक्कारी, चापलूसी, राजशाही की वफादारी, प्यार-मोहब्बत, नफरत सभी कुछ है। हर तरह का मसाला इस फिल्म में है। कसूरी मैथी से लेकर जावित्री तक और कलौंजी से लेकर पत्थर फूल तक। बोनस में सनी लियोनी भी है।

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अजय देवगन समझ चुके हैं कि उन्हें एक्शन फिल्में ही करनी है, क्योंकि चेहरे पर कोई भाव तो वे ला नहीं पाते। बादशाहो में वे कहते है कि जिंदगी चार दिन की है और आज चौथा दिन है। इसी के साथ वे कहते है कि जिंदगी में दो तरह के लोग होते है, पहले वे जिनके साथ बैठकर पीया जाता है और दूसरे वे जिनके लिए पीना पड़ता है। बार-बार यह संवाद उनके मुंह से निकलता है कि मैं हमेशा कहानी बदल देता हूं। राजस्थानी राजशाही के वफादार बॉडीगार्ड के रूप में वे कहते है कि चोरों के उसूल होते है, पॉलिटिशियन के नहीं। यह भी कहते है कि रजाई, लुगाई और लड़ाई बराबरी की होनी चाहिए।

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गुलशन कुमार की कंपनी की इस फिल्म में वैसा म्युजिक नहीं है, जैसी अपेक्षा की जाती है। संजीव (संजय) का एक वफादार सैन्य अधिकारी राजा के महल से लूटे या जब्त किए गए सोने का खजाना लेकर दिल्ली के लिए रवाना होता है। यह खजाना सेना की एक ऐसी बख्तरबंद गाड़ी में रहता है, जो अपने आप में किसी रेजीमेंट से कम नहीं है। इस अत्याधुनिक फौजी गाड़ी से सोना उड़ाने की कहानी है, इस फिल्म में। बीच में नाच, गाना, एक्शन, ड्रामा, इमोशन, कॉमेडी, रेस सभी कुछ है। कलाकारों की पूरी भीड़ है। अजय देवगन, इलियाना डिक्रूज, इशा गुप्ता, इमरान हाशमी, संजय मिश्रा, विद्युत जामवाल, शरद केलकर आदि है। राजस्थान के नजारे भी अच्छे है।

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महारानी की भूमिका निभाने वाली इलियाना डिक्रूज गायत्री देवी की तरह एक्टिंग करने की कोशिश करती है, जो दो प्रेमियों को एक साथ धोखा देने की कोशिश में है। इमरान हाशमी, इशा गुप्ता और संजय मिश्रा अजय देवगन के साथी है, जो किसी अंग्रेजी फिल्म के कलाकारों की तरह एक्टिंग करते है। फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने बिना किसी कट के यह फिल्म रिलीज होने दी, शायद इसलिए कि यह संजय गांधी (फिल्म में संजीव नाम रखा गया है) को बदनाम करती है। फिल्म में नसबंदी से जुड़े होर्डिंग पोस्टर तथा भीड़ भरी जेलें दिखाई गई है। यह कोई राजनैतिक फिल्म नहीं है, लेकिन मसाले की तरह इसमें इमरजेंसी को दिखाया गया है। मनोरंजक फिल्म है। समीक्षक पसंद नहीं करेंगे, लेकिन सिंगल स्क्रीन थिएटर पर दर्शकों को यह पसंद आएगी।

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