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‘रांची डायरीज’ को बकवास कहना फिल्म के साथ नाइंसाफी होगी, क्योंकि यह फिल्म बकवास नहीं महाबकवास है। पूरी फिल्म में कोई भी ऐसी चीज नहीं है, जिसकी तारीफ की जा सके। कहानी बकवास, पटकथा बकवास, अभिनय बकवास, निर्देशन बकवास, संगीत बकवास, एक्शन बकवास, इमोशन बकवास केवल बकवास... बकवास... बकवास..।

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रांची के लोगों को चाहिए कि फिल्म का नाम रांची डायरीज रखने पर निर्माता-निर्देशक पर मुकदमा दर्ज करें। रांची के लोगों की ऐसी बेइज्जती कभी किसी फिल्म में नहीं हुई होगी। क्या वहां के लोग इतने कमअक्ल होते है? अनुपम खैर इस फिल्म के निर्माता बताएं जाते है, अगर वे निर्माता है, तो उनका और भारतीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड का भगवान ही मालिक है। बंद पड़े एक हजार के नोट को समर्पित इस फिल्म में सतीश कौशिक और जिम्मी शेरगिल भी कुछ नहीं कर पाए। अरिजीत सिंह और पलक मुछाल का नाम बदनाम करने वाली फिल्म है यह। यह एक लो बजट, लो अक्ल फिल्म है, जो लो अक्ल दर्शकों के लिए बनाई गई है। टेपो के द्वारा, टेपो के लिए।

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