8 सिंतबर 1978 को नईदुनिया में प्रकाशित लेख

NISARPUR-21

सरदार सरोवर बांध की डूब में आने वाले 44 हजार परिवारों के करीब एक लाख लोगों के सामने विस्थापन का खतरा मंडरा रहा है। 40 साल से वे इस खतरे की सुगबुगाहट सुन रहे थे, लेकिन अब डूब का समय करीब आता जा रहा है। 31 जुलाई तक निसरपुर भी इतिहास बन जाएगा। जिस तरह हरसूद नर्मदा के बांध की डूब में आया था, उसी तरह निसरपुर का भी नामो-निशान मिट जाने वाला है। निसरपुर के पास ही के 76 गांव भी डूब में आने वाले है।

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Pankh

‘मन के पंख’ अंजना सिंह सेंगर की पहली काव्यकृति है, जिसमें ग़ज़ल, गीत, दोहे, कुंडलियां छंद, ताटंक छंद, घनाक्षरी, सरसी छंद, आल्हा छंद, मुक्तक, मुक्त छंद कविताएं, आधुनिक कविताएं, हाईकू और क्षणिकाएं शामिल है। कवयित्री ने लिखा कि यूं तो मन बड़ा चंचल होता है, लेकिन अगर उसके पंखों को सही दिशा दी जाए, मन को साध लिया जाए, उसे एकाग्र कर लिया जाए, तो बड़े से बड़ा काम सिद्ध हो सकता है। मन के तार जोड़ने से ही भक्त भगवान का हो जाता हैं, वह हरि दर्शन कर लेता हैं और जीवन सार्थक हो जाता हैं।

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Burhanpur-1

बुरहानपुर टूरिज्म प्रमोशन काउंसिल और जिला पुरातत्व संघ, बुरहानपुर द्वारा प्रकाशित कॉफी टेबल बुक कलात्मक और सूचनाप्रद है। ‘ताप्ती, तप और ताकत’ शीर्षक से प्रकाशित यह प्रकाशन कॉफी टेबल की शोभा निश्चित ही बढ़ाएगा। इस किताब में बुरहानपुर के बारे में ऐतिहासिक, दिलचस्प और सुरूचिपूर्ण सामग्री संजोई गई है। शासकीय प्रकाशन है, इसलिए विवादों से बचने के लिए डिस्क्लेमर भी दिया गया है कि यह किताब प्रामाणिक, ऐतिहासिक या नैतिक होने का कोई दावा नहीं करती। यह डिस्क्लेमर अनावश्यक ही लगता है, क्योंकि इसके संपादक मुकेश मिश्रा और सुबोध खंडेलवाल ने विश्वसनीयता का पूरा ध्यान रखा है। कलेक्टर दीपक सिंह के प्रोत्साहन और प्रयास से ही यह प्रकाशन संभव हो पाया है। इतिहासकार डॉ. शरद पगारे, शाजी जमां, भगवतीशरण मिश्रा, हेरम्ब चतुर्वेदी, पंकज घनश्याम शाह, अफसर एहमद, युगजीत नवलपुरी आदि ने इसमें मदद की है। पुस्तक में शामिल खूबसूरत छायाचित्र बुरहानपुर के जाने-माने छायाकारों नयन तापड़िया, रजा खान, अमर चौहान, सपना दलाल, सचिन पंवार के साथ ही इंदौर के तनवीर फारुकी और इंदौर के हनीफ तड़वी के है। पुस्तक हिन्दी और अंग्रेजी में है।

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aalind

‘आलिन्द’ में टोनी शुक्ला की करीब सवा सौ रचनाएं संकलित है। इसी के साथ इसमें गद्यनुमा छोटी-छोटी रचनाएं भी है, जो पाठक के मूड को बदलने की क्षमता रखती है। ये कविताएं मुक्त छंद कविताएं है और इनकी भाषा आसान और आम पाठकों को समझमें आने वाली है। ज्ञान का बघार लगाने की कोशिश नहीं है। वैज्ञानिक शब्दावली में रक्त का संचय करने वाले छोटे से प्रकोष्ठ को आलिन्द कहते है। अर्थात ह्रदय का एक हिस्सा जिसका संबंध रक्त के प्रवाह से है। शरीर के इस हिस्से का मानव के प्राण से सीधा संबंध है। कवि का मानना है कि ये कविताएं आलिन्द की तरह उनके ह्रदय का एक अंश है।

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MODI-TRUMP-3-copy

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमेरिका यात्रा पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने जिस तरह का कवरेज किया है, वह हास्यास्पद है। वैसे भी अमेरिकी मीडिया के लिए भारतीय प्रधानमंत्री उतने महत्वपूर्ण नहीं हैं, जितने भारतीय मीडिया के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति। कूटनीतिक स्तर पर जो बातचीत हुई हो, जरूरी नहीं कि वह मीडिया के सामने आई ही हो। कूटनीति में कई बार जो बातें छुपानी होती है, उन्हें बताया जाता है और जो बातें बतानी होती है, वो बताई नहीं जाती। चटखारे लेने की आदत वाले अमेरिकी मीडिया के सामने क्या विकल्प था? वह यही प्रकाशित और प्रसारित करता रहा कि दोनों नेताओं की समानताएं और असमानताएं क्या-क्या है। दोनों ने कैसे कपड़े पहने, दोनों किस तरह पेश हुए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने व्हाइट हाउस में पांच घंटे क्या किया। अमेरिकी राष्ट्रपति की पत्नी मेलानिया ट्रम्प ने श्री मोदी को व्हाइट हाउस घुमाया, तब वे पीले रंग का जो ड्रेस पहनी थी, उसकी कीमत तीन हजार डॉलर से थोड़ी ही कम थी, वगैरह-वगैरह।

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Phuket-3

थाईलैण्ड के फुकेट में रहने वाले एक निर्दयी बाप ने अपनी 11 महीने की बेटी को एक पुरानी खाली पड़ी बिल्डिंग की छत से फांसी पर लटकाकर मार डाला और उसका फेसबुक पर सीधा प्रसारण भी कर दिया। बाद में उस निर्दयी बाप का शव भी बेटी के शव के पास ही मिला। फेसबुक पर यह सारा घटनाक्रम 24 घंटे तक देखा जाता रहा। बाद में फेसबुक के प्रवक्ता ने एक समाचार एजेंसी को ई-मेल पर खेद प्रकट किया और लिखा कि यह एक भयावह हादसा था। फेसबुक पर इस तरह के कंटेंट के लिए कोई जगह नहीं है। पिछले हफ्ते ही फेसबुक पर अमेरिका के क्लीवलैंड का एक लाइव स्ट्रीमिंग वीडियो जारी हुआ था, जिसमें एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को गोली से निशाना बना रहा था। फेसबुक वाले कहते रह गए कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर हिंसक और वीभत्स पोस्ट तथा लाइव स्ट्रीमिंग को रोकने की तैयारी कर रहे हैं और दुनिया ने फेसबुक पर वह सब देखा, जो देखना नहीं चाहिए था।

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shahid1

शाहिद मिर्ज़ा मोहम्मद बेग चुग़ताई। यही पूरा नाम था उसका। वे हट्टोल थे। यह शब्द उन्हीं का गढ़ा हुआ था। हठी और अड़ियल का सम्मिश्रण। जींस-कुर्ता, तर्जे-तग़ाफ़ुल वाली बेपरवाही की अदा; बातों के दौरान बीच-बीच में मालवी-निमाड़ी शब्दों का उपयोग और ज़रूरत हो तो अंग्रेज़ी का; 'श्लोकोँ' से अलंकृत, ठहाके, भदेस और जुझारूपन।

आज से ठीक दस साल पहले जयपुर से उनके जाने की असहनीय वेदना देनेवाली खबर आई थी। जो व्यक्ति बरसों बरस साये की तरह साथ रहा हो, नईदुनिया, नवभारत टाइम्स और फिर दैनिक भास्कर में सहकर्मी रहा हो, कभी समकक्ष, कभी वरिष्ठ और कभी कनिष्ट, जो व्यक्ति जहाँ कहीं भी रहा हो, हमेशा छाया रहा हो; न केवल मित्र मंडली में, बल्कि जिस भी शहर में रहा हो वहां के सांस्कृतिक परिदृश्य में। साहित्यिक जगत में, कॉफी हाउस में, गोष्ठियों और चाय के अड्डों में। सहकर्मियों से उनका नाता सदा भाई चारे का रहा, ऑफ़िस पॉलिटिक्स से सदा दूर। वे इंदौर के दैनिक भास्कर में प्रभारी थे, तब तत्कालीन राष्ट्रपति वेंकटरामन ओंकारेश्वर मे शंकराचार्य की तपस्थली वाली गुफा के जीर्णोद्धार समारोह के लोकार्पण को आए थे। कीर्ति राणा वहां कवरेज के लिए गए थे और कीर्ति भाई ही थे जो राष्ट्रपति जी से बातचीत कर सके थे। छपने से पहले जब वह रिपोर्ट शाहिद भाई के हाथ आई, तब उन्होंने उसमें जोड़ा -- ' राष्ट्रपति ने कीर्ति राणा से कहा'.

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Dangal-2

virendrasinghश्योपुर (ग्वालियर) में एक दैनिक अखबार के संवाददाता दशरथ सिंह के साथ स्थानीय एडीएम ने जो बर्ताव किया, वह आंचलिक पत्रकारों की समस्याओं को उजागर करता है। दशरथ सिंह श्योपुर में जन समस्याओं को अपने अखबार में उजागर करते रहे हैं। इन जन समस्याओं के उजागर होने से स्थानीय अधिकारियों के लिए वे एक चुनौती बन गए। स्थानीय अधिकारियों को उस वक्त बहुत अच्छा लगता है, जब पत्रकार उनके द्वारा किए गए कार्यों को बढ़ा-चढ़ाकर अपने अखबार में स्थान देते रहते हैं, लेकिन जैसे ही पत्रकार उनकी नाकामियों के बारे में लिखते हैं, स्थानीय अधिकारी बदले की भावना पर उतर आते है। ये अधिकारी इतने निरंकुश हो चुके है कि वे अपने आगे कानून को भी कुछ नहीं समझते है और मानते है कि आजकल के बादशाह वहीं है।

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Republic-News-2

न्यूज चैनल रिपब्लिक इन दिनों धूम मचा रहा है। हर रोज नए-नए खुलासे! कभी लालू यादव निशाने पर, कभी केजरीवाल और कभी शशि थरूर। शुरू होने के पहले ही हफ्ते में रिपब्लिक की धूम मची हुई है और कहा जाने लगा है कि रिपब्लिक चैनल का डिस्ट्रीब्यूशन अगर सही रहा, तो अंग्रेजी चैनलों में यह चैनल नंबर वन हो जाएगा। यह भी कहा जाने लगा है कि रिपब्लिक अंग्रेजी का जी न्यूज बन गया है, मतलब जिस तरह जी न्यूज बीजेपी और नरेन्द्र मोदी के खिलाफ खुलासे नहीं करता, उसी तरह रिपब्लिक भी केवल विरोधी दलों की पोल खोलता है।

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prakash-hindustani-with-ramesh-chandra-agarwal

श्री रमेशचन्द्र अग्रवाल बेहद व्यावसायिक बुद्धि के धनी व्यक्ति तो थे ही, लेकिन इसके साथ ही वे बेहद सहज और सरल व्यक्तित्व के धनी भी थे। उनसे मिलने पर जिस सहजता से वे बातें करते थे, उससे यह कभी एहसास नहीं होता था कि वे फोर्ब्स की सूची में भारत के 100 सबसे धनी और शक्तिशाली लोगों में से एक है। एक प्रसिद्ध भारतीय पत्रिका ने उन्हें भारत के 50 सबसे ताकतवर लोगों में शामिल किया था। इसके बाद भी वे अपने समाचार पत्र समूह के लोगों से बेहद सादगी से मिलते थे। सैकड़ों कर्मचारियों को वे उनके नाम से जानते थे और उनके निजी सुख-दुख में भी शामिल होते थे। अग्रवाल महासभा के प्रमुख आधार स्तम्भ होने के नाते उन्होंने अपने समाज के लोगों के लिए भी बहुत से कल्याण के कार्य किए। इन कल्याण के कार्यों में समाज की लड़कियों को आगे ले जाने का काम प्रमुख है।

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