baba-ram

ट्विटर ने गुरमीत राम रहीम का अकाउंट रोक दिया है। अब इस अकाउंट में कोई गतिविधि संभव नहीं है। डेरा प्रमुख के इस ट्विटर अकाउंट पर 30 लाख 57 हजार से अधिक फॉलोअर्स थे। ट्विटर ने गुरमीत की कथित बेटी हनीप्रित इन्सान का अकाउंट भी रोक लिया है। इन दोनों ट्विटर अकाउंट का उपयोग गुरमीत राम रहीम के प्रचार के लिए होता रहा है। फेसबुक पर बाबा गुरमीत से जुड़े करीब 22 अकाउंट को बंद करने के लिए भी पुलिस कोशिश कर रही है।

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राष्ट्रीय मीडिया कॉन्क्लेव की रिपोर्ट

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संस्था विकास संवाद का ग्यारहवां वार्षिक आयोजन ओरछा में 18 से 20 अगस्त 2017 तक आयोजित हुआ। विषय रहा - ‘मीडिया, बच्चे और असहिष्णुता’। आयोजन के आधार पत्र में लिखा गया है - ‘‘आज कल मीडिया का जिक्र भी राग दरबारी के उस बहुउद्घ्रत प्रसंग की तरह हो गया है, जिसमें शिक्षा व्यवस्था की जगह अगर मीडिया को रख दें, तो उसे सड़क की कुटिया मानकर हर कोई लात जमाता चलता है। लोकतंत्र की झंडाबरदार राजनीतिक जमातों और नौकरशाही से लेकर कोई भी सड़क चलता इंसान किसी भी छोटी-मोटी बात पर मीडिया को भी गरियाता रहता है... मीडिया खुद के ‘बिक जाने,’ ‘तोड़-मरोड़कर पेश करने’ से लगाकर ‘सत्ता में सहयोगी’ तक की गालियों से नवाजा भी जाता है।’’

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8 सिंतबर 1978 को नईदुनिया में प्रकाशित लेख

NISARPUR-21

सरदार सरोवर बांध की डूब में आने वाले 44 हजार परिवारों के करीब एक लाख लोगों के सामने विस्थापन का खतरा मंडरा रहा है। 40 साल से वे इस खतरे की सुगबुगाहट सुन रहे थे, लेकिन अब डूब का समय करीब आता जा रहा है। 31 जुलाई तक निसरपुर भी इतिहास बन जाएगा। जिस तरह हरसूद नर्मदा के बांध की डूब में आया था, उसी तरह निसरपुर का भी नामो-निशान मिट जाने वाला है। निसरपुर के पास ही के 76 गांव भी डूब में आने वाले है।

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 orchaph2

कहा जाता है कि सत्य केवल सत्य होता है। न आगे, न पीछे। न आधा, न पूर्ण। सत्य को रचा नहीं जाता, वह खुद ब खुद हो जाता है, लेकिन अब आभासी और इंटरनेट की दुनिया में सत्य तेजी से रचा जा रहा है। मीडिया को हम सत्य और वस्तुगत जीवन मूल्यों का पहरेदार समझते है, लेकिन अब यह बात खुद ब खुद साबित होती जा रही है कि इंटरनेट और आभासी दुनिया में रचे जा सकने वाले सत्य का बोलबाला है।

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Pankh

‘मन के पंख’ अंजना सिंह सेंगर की पहली काव्यकृति है, जिसमें ग़ज़ल, गीत, दोहे, कुंडलियां छंद, ताटंक छंद, घनाक्षरी, सरसी छंद, आल्हा छंद, मुक्तक, मुक्त छंद कविताएं, आधुनिक कविताएं, हाईकू और क्षणिकाएं शामिल है। कवयित्री ने लिखा कि यूं तो मन बड़ा चंचल होता है, लेकिन अगर उसके पंखों को सही दिशा दी जाए, मन को साध लिया जाए, उसे एकाग्र कर लिया जाए, तो बड़े से बड़ा काम सिद्ध हो सकता है। मन के तार जोड़ने से ही भक्त भगवान का हो जाता हैं, वह हरि दर्शन कर लेता हैं और जीवन सार्थक हो जाता हैं।

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RAVAN

रावण की छवि जनमानस में किसी खलनायक से कम नहीं। रावण नामक के बजाय एक विशेषण की तरह याद किया जाता है। हर विजयादशमी को रावण के प्रतीक पुतले का दहन किया जाता है और भगवान राम की महिमा का वर्णन होता है। पत्रकार शैलेन्द्र तिवारी ने रावण के जीवन के उन पहलुओं को जानने और समझने की कोशिश की है, जो उनकी छवि के विपरीत थे। कहते है कि मध्यप्रदेश के मंदसौर में रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका था, शायद इसीलिए वहां रावण का मंदिर है और रावण की पूजा होती है। कहा जाता है कि रावण था ही इतना बलशाली और बुद्धिमान कि वह सृष्टि की संरचना अपनी मर्जी से करने में सक्षम था।

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‘आलिन्द’ में टोनी शुक्ला की करीब सवा सौ रचनाएं संकलित है। इसी के साथ इसमें गद्यनुमा छोटी-छोटी रचनाएं भी है, जो पाठक के मूड को बदलने की क्षमता रखती है। ये कविताएं मुक्त छंद कविताएं है और इनकी भाषा आसान और आम पाठकों को समझमें आने वाली है। ज्ञान का बघार लगाने की कोशिश नहीं है। वैज्ञानिक शब्दावली में रक्त का संचय करने वाले छोटे से प्रकोष्ठ को आलिन्द कहते है। अर्थात ह्रदय का एक हिस्सा जिसका संबंध रक्त के प्रवाह से है। शरीर के इस हिस्से का मानव के प्राण से सीधा संबंध है। कवि का मानना है कि ये कविताएं आलिन्द की तरह उनके ह्रदय का एक अंश है।

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  • इतनी जल्दी तो मैगी भी नहीं बनती, जितनी जल्दी सरकार बनी है।
  • नीतीश को कब पता चला कि लालू यादव भ्रष्ट हैं। 
  • बिहार में बहार है, भ्रष्टाचार है, हत्याचार है, दरार है, तकरार है, नए गठबंधन का आविष्कार है, पर नीतीशे कुमार है।
  • इस्तीफा देने के पहले नीतीश कुमार ने दूसरी कंपनी की ऑफर लेटर पा लिया था।

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सोशल मीडिया के अनुसार अब अंतरराष्ट्रीय बेवफा का खिताब सोनम गुप्ता से छीनकर नीतीश कुमार को दे दिया गया है। सोनम गुप्ता तो बेचारी यूं ही बदनाम है। पता नहीं, कौन सी सोनम गुप्ता बेवफा थी, थी भी या नहीं, लेकिन यह सच है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे और हैं। इसी तरह राजनीति करते रहे तो शायद आगे भी बने रहेंगे।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमेरिका यात्रा पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने जिस तरह का कवरेज किया है, वह हास्यास्पद है। वैसे भी अमेरिकी मीडिया के लिए भारतीय प्रधानमंत्री उतने महत्वपूर्ण नहीं हैं, जितने भारतीय मीडिया के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति। कूटनीतिक स्तर पर जो बातचीत हुई हो, जरूरी नहीं कि वह मीडिया के सामने आई ही हो। कूटनीति में कई बार जो बातें छुपानी होती है, उन्हें बताया जाता है और जो बातें बतानी होती है, वो बताई नहीं जाती। चटखारे लेने की आदत वाले अमेरिकी मीडिया के सामने क्या विकल्प था? वह यही प्रकाशित और प्रसारित करता रहा कि दोनों नेताओं की समानताएं और असमानताएं क्या-क्या है। दोनों ने कैसे कपड़े पहने, दोनों किस तरह पेश हुए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने व्हाइट हाउस में पांच घंटे क्या किया। अमेरिकी राष्ट्रपति की पत्नी मेलानिया ट्रम्प ने श्री मोदी को व्हाइट हाउस घुमाया, तब वे पीले रंग का जो ड्रेस पहनी थी, उसकी कीमत तीन हजार डॉलर से थोड़ी ही कम थी, वगैरह-वगैरह।

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हमारे नए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अब ट्विटर पर भी नजर आने लगे हैं। दो दिनों में उनके 10 लाख नए फॉलोअर्स बने। राष्ट्रपति कोविंद को फॉलो करने वालों की संख्या करीब 32 लाख है। वे ट्विटर पर केवल एक शख्स के अकाउंट को फॉलो कर रहे हैं और वे हैं श्री प्रणब मुखर्जी। वास्तव में राष्ट्रपति कोविंद का ट्विटर अकाउंट भारत के राष्ट्रपति का ट्विटर अकाउंट है, जो 2014 में श्री प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति रहते शुरू किया गया था। दो दिन पहले तक उनके ट्विटर फॉलोअर्स की संख्या ३१ लाख थी। इस लिहाज से राष्ट्रपति कोविंद का ट्विटर अकाउंट भी वहीं है, जो पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का था। यह ट्विटर अकाउंट भारत के राष्ट्रपति का अधिकृत ट्विटर हैंडल है। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का ट्विटर अकाउंट प्रेसीडेंट मुखर्जी के नाम पर था (पीओआई१३) यानि भारत के १३वें राष्ट्रपति। राष्ट्रपति कोविंद का ट्विटर अकाउंट का नाम प्रेसीडेंट ऑफ इंडिया है और आईडी हैं राष्ट्रपतिबीएचवीएन। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नाम पर अनाधिकृत ट्विटर अकाउंट की बाढ़ आई हुई है।

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शाहिद मिर्ज़ा मोहम्मद बेग चुग़ताई। यही पूरा नाम था उसका। वे हट्टोल थे। यह शब्द उन्हीं का गढ़ा हुआ था। हठी और अड़ियल का सम्मिश्रण। जींस-कुर्ता, तर्जे-तग़ाफ़ुल वाली बेपरवाही की अदा; बातों के दौरान बीच-बीच में मालवी-निमाड़ी शब्दों का उपयोग और ज़रूरत हो तो अंग्रेज़ी का; 'श्लोकोँ' से अलंकृत, ठहाके, भदेस और जुझारूपन।

आज से ठीक दस साल पहले जयपुर से उनके जाने की असहनीय वेदना देनेवाली खबर आई थी। जो व्यक्ति बरसों बरस साये की तरह साथ रहा हो, नईदुनिया, नवभारत टाइम्स और फिर दैनिक भास्कर में सहकर्मी रहा हो, कभी समकक्ष, कभी वरिष्ठ और कभी कनिष्ट, जो व्यक्ति जहाँ कहीं भी रहा हो, हमेशा छाया रहा हो; न केवल मित्र मंडली में, बल्कि जिस भी शहर में रहा हो वहां के सांस्कृतिक परिदृश्य में। साहित्यिक जगत में, कॉफी हाउस में, गोष्ठियों और चाय के अड्डों में। सहकर्मियों से उनका नाता सदा भाई चारे का रहा, ऑफ़िस पॉलिटिक्स से सदा दूर। वे इंदौर के दैनिक भास्कर में प्रभारी थे, तब तत्कालीन राष्ट्रपति वेंकटरामन ओंकारेश्वर मे शंकराचार्य की तपस्थली वाली गुफा के जीर्णोद्धार समारोह के लोकार्पण को आए थे। कीर्ति राणा वहां कवरेज के लिए गए थे और कीर्ति भाई ही थे जो राष्ट्रपति जी से बातचीत कर सके थे। छपने से पहले जब वह रिपोर्ट शाहिद भाई के हाथ आई, तब उन्होंने उसमें जोड़ा -- ' राष्ट्रपति ने कीर्ति राणा से कहा'.

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