Deepak

पत्रकार और लेखक दीपक तिवारी 26 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं। आकाशवाणी, समाचार एजेंसी, अखबार आदि के बाद वे अंग्रेजी समाचार साप्ताहिक द विक में 20 साल से मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के राज्य संवाददाता हैं। मध्यप्रदेश की राजनीति पर उनकी अच्छी खासी पकड़ है। पिछले दिनों बहचर्चित किताब ‘राजनीतिनामा मध्यप्रदेश (2003 से 2018) भाजपा युग’ का लोकार्पण हुआ। इसके पहले वे ‘राजनीतिनामा मध्यप्रदेश (1956 से 2003) कांग्रेस युग’ लिख चुके हैं। इस तरह उन्होंने 1956 में मध्यप्रदेश बनने के बाद की राजनीति को कांग्रेस युग और भाजपा युग में लिपिबद्ध किया है।

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(आपका स्वागत है, पर आप क्यों बार -बार पधारते हैं? पूरा प्रशासन ठप हो जाता है। इस  गरीब और बीमारू राज्य पर दया करो प्रभु!)

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माननीय,
नित्य प्रातः स्मरणीय, 
महामहिम महोदय,
आप इस देश के सर्वोच्च पद पर आसीन हैं, तीनों सेनाएं आप के अधीन हैं, पूरा देश आपके नेतृत्व का कायल है, आप हमारे लिए पूजनीय हैं। माननीय,
एक छोटी सी कहानी सुनाना चाहता हूं। एक दद्दाजी थे। उन्हें लगा कि अब उनके जीवन के सक्रिय 5/6 साल बचे हैं।

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FILM 4

फिल्मफेयर अवार्ड का नाम पहले फिल्मफेयर अवार्ड नहीं था। 1954 में जब इसकी शुरुआत हुई थी, तब इसका नाम क्लेअर मेंडोसा अवार्ड फंक्शन था। क्लेअर मेंडोसा टाइम्स ऑफ इंडिया के फिल्म समीक्षक थे और उसी साल 1954 में उनकी मृत्यु हुई थी।

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DELHI-HC

दिल्ली हाईकोर्ट ने 12 मीडिया घरानों पर 10-10 लाख रूपए का जुर्माना अदा करने के लिए कहा। हाईकोर्ट का मानना है कि इन मीडिया घरानों ने कठुआ में 8 साल की बच्ची के साथ जबरदस्ती और हत्या की खबर में पीड़िता का नाम उजागर किया, जो मीडिया के सिद्धांतों के खिलाफ है। इस तरह के मामलों में पीड़िता की पहचान छुपाए रखने संबंधी कानूनों की अवहेलना के कारण यह आदेश दिया गया।

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Aadhar-Card

शुरूआत में आधार से जो अपेक्षाएं थी, वे पूरी नहीं हो पा रही हैं। इसका कारण यह है कि हर किसी को आधार पर आपत्ति है। आपत्ति का मुख्य कारण है, आधार से गोपनीयता भंग होने का खतरा। जिन लोगों को आधार से लाभ होना चाहिए, उनका बहाना बनाकर आधार का उपयोग सीमित करने की कवायदें की जा रही है। भारतीय न्याय प्रक्रिया तो है ही, इस तरह की रूकावटों के लिए प्रख्यात। भारत की एक तिहाई आबादी सोशल मीडिया पर हैं। जहां उनकी पूरी जन्मपत्री सार्वजनिक है। फेसबुक से जुड़ते ही 82 ऐप पीछे लग जाते है। लोकेशन से लेकर गर्लफ्रेंड की फोटो तक का हिसाब फेसबुक के सर्वर पर दर्ज रहता है, लेकिन भारत के लोगों को तकलीफ है आधार से। आधार से गोपनीयता भंग हो जाएगी साहब। आधार कार्ड में क्या दर्ज है? और जब आप भारत में पैदा हुए, भारत सरकार की तमाम सुविधाओं का फायदा उठा रहे हो, तो सरकार को आपके बारे में जानने का अधिकार भी होना चाहिए या नहीं? बाद में आप शिकायत करते है कि सरकार को यह काम करना चाहिए, वह काम करना चाहिए आदि-आदि।

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Nihal-1

वरिष्ठ पत्रकार एस. निहाल सिंह उन लोगों में से थे, जिन्होंने 1975 में इमरजेंसी लगाए जाने का घोर विरोध किया था। वे 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद पाकिस्तान जाने वाले किसी भी भारतीय अखबार के पहले पत्रकार थे। सुरेन्द्र निहाल सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस और खलीज टाइम्स के संपादक तथा स्टेट्समैन के प्रधान संपादक के रूप में काम किया। इंडियन पोस्ट अखबार की बुनियाद ही उन्होंने रखी। वे ब्रिटेन, रूस, यूएसए, इंडोनेशिया आदि कई देशों में विशेष संवाददाता के तौर पर काम कर चुके थे।

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BOOK

ब्रजेश कानूनगो ने व्यंग्य के साथ कविताएं और लघु कहानियां भी लिखी हैं। बाल गीतों और बाल कथाओं के लेखन में भी उनका हस्तक्षेप है। वैसे तो यह उनकी नौवीं किताब है, लेकिन व्यंग्य संग्रह तीसरा ही है। पुस्तक की भूमिका में ब्रजेश कानूनगो ने लिखा है कि जिन बातों को व्यंग्यकार मूल्यहीनता और विसंगति मानता है, दरअसल अब नई संस्कृति और नए मूल्य के कारण ये विसंगतियां अजब रूप लेने लगी है। ब्रजेश कानूनगो ने यह बात स्वीकार की है कि उनके व्यंग्य लेखन के मूल में अखबारों में प्रकाशित होने वाले लोकप्रिय स्तंभों की भूमिका रही है। उनके व्यंग्य अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित भी होते रहे है। वे मानते है कि अगर मेरे लिखे से किसी का मन बहल जाए। आंसु की कुछ बूंदे झलक पड़े, दिल में कोई छोटी सी टीस उठ जाए या कोई ठहाका लगा दें, तो उनका लिखना सार्थक है। साहित्य के ५६ पकवानों में इसीलिए उन्होंने मेथी की भाजी भी परोस दी है। इस तरह यह किताब मेथी पर करेला हो गई है।

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राजेंद्र माथुर के बारे में गुंजन सिन्हा

१९८६ में स्व. राजेंद्र माथुर ने नवभारत टाइम्स, पटना, के लिए युवाओं की एक टीम चुनी और उससे कहा कि “हिंदी पत्रकारिता की मशाल हम यहाँ तक ले आये हैं. अब ये मशाल हम आपको सौंपना चाहते हैं, लेकिन हमे ज्यादा ख़ुशी होगी अगर आप इसे हमसे छीन सकें.”

हम नहीं छीन सके. हम क्या कोई नहीं छीन सका. उन्हें दिवंगत हुए २७ बरस बीत गए और उनके जाने के चार बरसों के भीतर नवभारत टाइम्स पटना बंद कर दिया गया. उन्होंने हमें जो स्नेह भरी चुनौती दी थी, वो ३२ साल बाद भी अनुत्तरित है.

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BOOK1

हिन्दी के जाने-माने व्यंग्यकार जवाहर चौधरी ने दलित जीवन की त्रासदी भरी घटनाओं को लेकर गमन की रचना की है। यह दलित आत्मकथा लेखन की तरह लिखा गया एक लघु उपन्यास है, जो केवल 98 पृष्ठों में भी कई ऐसी घटनाएं छोड़ जाता है, जो समाचार पत्रों और टेलीविजन न्यूज चैनलों की खबरों की तरह एक-एक करके आंखों के सामने से गुजरने लगती है। दलित त्रासदी के अलावा यह किताब धर्म की गलत व्याख्या को भी साहस के साथ उजागर करती है। आजादी के इतने साल बाद भी इस तरह की वारदातें अब भी होती है और साबित करती है कि हम अभी भी पूर्णत: सभ्य समाज नहीं बन पाए है।

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rg1

रविवार की सुबह करीब 11 बजे कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने ट्विटर अकाउंट @RahulGandhi से एक ट्वीट करके खलबली मचा दी। एक फ़्रांसिसी हैकर के ट्वीट पर आधारित समाचार उद्घृत करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए लिखा

-- "हेलो, मेरा नाम नरेंद्र मोदी है, मैं भारत का प्रधानमंत्री हूं। जब आप मेरे आधिकारिक ऍप को साइनअप करते हैं, तब मैं आपका सारा डाटा अमेरिकी कंपनियों के अपने दोस्तों को दे देता हूं."

राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि जो भी नागरिक नमो ऍप का इस्तेमाल करता है, उसकी तमाम जानकारियां उस ऍप को इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति की अनुमति के बिना अमेरिकी कंपनी से साझा की जा रही है।

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BOOK3

तुम्हारे जाने के बाद कृष्णकांत निलोसे का पांचवां काव्य संग्रह है। वे हिन्दी के अलावा अंग्रेजी में भी लिखते रहे हैं और उनकी रचनाएं देशभर के पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही है, लेकिन इस संग्रह की कविताएं ऐसी प्रेम कविताएं है, जो उन्होंने अपनी प्रेयसी और पत्नी इंदु के लिए लिखी है।

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