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इंदौर में 22 और 23 अक्टूबर को संपन्न ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट कई कारणों से फ्लॉप रही। पेड मीडिया में भले ही स्पांसर्ड फीचर के जरिये यह माहौल बनाने की कोशिश की जा रही हो कि इन्वेस्टर्स समिट सफल रही, लेकिन ऐसा है नहीं। अब तक इंदौर में हुई इन्वेस्टर्स समिट में 2016 की समिट सबसे ज्यादा असफल रही। न तो इसमें देश के शीर्ष नेता आए और न ही उद्योग जगत में गर्मजोशी देखी गई। इसके मुख्य 10 कारण ये हैं :

कारण 1 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का समिट में न आना चर्चा का विषय रहा। इसके कारण चाहे जो रहे हो, पार्टी का सोशल मीडिया विंग इस तरह का माहौल नहीं बना पाया।

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कारण 2 : इंदौर की सांसद श्रीमती सुमित्रा महाजन की अनुपस्थिति को लेकर भी सोशल मीडिया में बहुत सारी टिप्पणियां की गई। इसके पहले हुई समिट में श्रीमती महाजन की उपस्थिति महत्वपूर्ण थी।

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कारण 3 : इंदौर में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में इंदौर के कई प्रमुख पार्टी नेता गैरहाजिर थे। पार्टी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय पहले हुई समिट में बेहद सक्रिय थे। भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भी वे मुख्य संयोजक थे। उनके साथ ही विधायक और अन्य नेता भी इस समिट में अनुपस्थित थे। इस सबका संदेश यह गया कि बीजेपी में भीतरी खींचतान अपने चरम पर है और समिट में उसकी झलक दिखाई दी।

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कारण 4 : इंदौर में इतने बड़े आयोजन पर केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, नगर निगम, इंदौर विकास प्राधिकरण, जिला पंचायत और पार्टी फोरम ने भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक सहयोग दिया था। समिट का कुल खर्च 50 करोड़ रुपए के आसपास बताया जाता है। इतने बड़े आयोजन में लगभग पूरी की पूरी जिम्मेदारी नौकरशाहों के हवाले थी। यहां तक कि सोशल मीडिया पर लोगों ने इस इन्वेस्टर्स समिट को ‘ग्लोबल करप्शन समिट’ तक लिखा है।

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कारण 5 : 23 बरसों से बंद पड़ी हुकुमचंद मिल के मजदूरों से मुलाकात में मुख्यमंत्री ने जो बातें कही उसका भी संदेश अच्छा नहीं गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपने (मजदूरों ने)जल्दबाजी की और इस कारण सरकार कोई काम नहीं कर पा रही है। वरना मजदूरों का भला निश्चित था। मिल के नेताओं का कहना है कि क्या मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान यह चाहते है कि हम कयामत के आने तक उनकी बातों के भरोसे रहे। इंदौर के श्रमिक क्षेत्र में तो मुख्यमंत्री के बयान की विपरीत प्रतिक्रिया आई ही, मानव अधिकार और श्रम संगठनों से जुड़े नेताओं ने भी इस पर तीखी टिप्पणी की।

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कारण 6 : स्मार्ट सिटी को लेकर जो भी कोशिशें इंदौर में हो रही है, उसका विरोध अंदर ही अंदर लोगों के मन में है। लोगों का कहना है कि हम तो 80 और 100 साल से पूर्णत: वैध मकान में रह रहे थे, लेकिन हमें बिना किसी मुआवजे के विस्थापित किया गया और दूसरी तरफ बाहरी लोगों को बुला-बुलाकर जमीनें दी जा रही है। पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में ही ऐसी कई इकाइयां थी, जो टैक्स बेनिफिट की अवधि खत्म होते ही प्लॉट बेचकर चली गई (जैसे निरमा)। आम लोगों के मन में यह विरोध बार-बार देखने में आ रहा है कि यह सरकार आम लोगों की चिंता नहीं करती, बल्कि उद्योगपतियों और पूंजीपतियों की चिंता करती है।

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कारण 7 : ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में मुख्यमंत्री का यह कहने पर कि 2019 में होने वाली समिट भी मेरे ही नेतृत्व में होगी, हास्यास्पद लगी। आमतौर पर जब भी कोई नेता ऐसा बयान देता है, तो उसका अर्थ उल्टा ही समझा जाता है। भाजपा के भीतरी धड़ों में भी इस पर बहुत प्रतिक्रिया व्यक्त की जा रही है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह इस बात के लिए पूरी तरह से आश्वस्त है कि उनका भ्रष्टाचार 2019 तक जारी रहेगा। यानि 2019 तक डी कंपनी और माल बटोरेगी। खनन माफिया और भूमाफियाओं की चांदी रहेगी और व्यापमं तथा मेडिकल घोटालों जैसे घोटाले चलते रहेंगे।

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कारण 8 : मध्यप्रदेश सरकार ने इस पूरे आयोजन में ब्यूरोक्रेट्स के अलावा न तो बीजेपी के नेताओं की बात मानी और न ही कांग्रेस के। आरएसएस का धड़ा भी इस आयोजन को लेकर नाराज है, क्योंकि जिस तरह के भ्रष्टाचार के किस्से इस आयोजन से निकलकर आए, उससे बीजेपी की छवि तो धूमिल हुई ही है। मध्यप्रदेश के लोगों के टैक्स की कमाई का भी दुरूपयोग हुआ है। पता चला है कि बीजेपी के केवल 17 नेताओं को आमंत्रित किया गया था और विपक्ष के किसी नेता को इसमें सम्मान नहीं मिला।

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कारण 9 : कुछ ही टीवी चैनलों और अखबारों को इस आयोजन के लिए विज्ञापन दिए गए थे। हाल यह था कि जितनी मीडिया बाइंग की गई थी (जितना स्पेस खरीदा गया था) उतने विज्ञापन भी सरकार की तरफ से तैयार नहीं किए जा सके थे। इसलिए अखबार वालों से कहा गया कि वे जो भी खबरें इस आयोजन को लेकर छापेंगे, उन सारी खबरों के स्पेस को विज्ञापन की तरह ट्रीट किया जाएगा और भुगतान भी उसी तरह किया गया। इस विज्ञापन के सौदे में कुछ अधिकारियों की चांदी रही और कुछ ही मीडिया समूह को भी अच्छी कमाई का मौका मिला।

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कारण 10 : स्थानीय लोगों में इस आयोजन को लेकर कोई विशेष उत्साह नहीं था। बाबा रामदेव ने मंच से जैसी बातें कही, उसका भी लोगों ने मजाक बनाया। बाबा रामदेव के पतंजलि समूह को इस आयोजन के पहले 43 एकड़ जमीन घटे दरों पर देने की घोषणा हुई। बाबा रामदेव ने मंच से कहा था कि इतनी जगह में तो हम कबड्डी खेलते है। उनकी अपेक्षा सैकड़ों एकड़ जमीन हथियाने की थी। अभी भी उनके प्रयास है कि मध्यप्रदेश में उनके समूह को और भी जमीन दी जाए, लेकिन वह जमीन इंदौर में नहीं दी जा रही है, इसलिए वे खफा है। अनिल अंबानी भी इंदौर समिट में पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में जमीन लेने के इरादे से आए थे। उन्होंने भी किसी बड़े निवेश की कोई घोषणा नहीं की। हिन्दुजा बंधुओं ने भी अपने पुराने कारोबार को ही विस्तार देने की बातें कही, नए किसी उद्योग को लगाने की बात नहीं की। एक आर्थिक पत्रकार के अनुसार इस सम्मेलन में भी आने वाले आधे से अधिक उद्योगपति विभिन्न आर्थिक अनियमितताओं में फंसे हैं। अनिल अंबानी पहले बार-बार कभी तीस हजार करोड़, तो कभी चालीस हजार करोड़ निवेश की बातें करते रहे, लेकिन निवेश कुछ किया नहीं। पिछले आयोजनों में विजय माल्या और सुब्रतोरॉय सहारा जैसे लोग वीवीआईपी की तरह आए थे और सरकार की मेजबानी में पार्टी करके चले गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि उद्योगपतियों को पार्टी देने से यहां कोई उद्योग खुल जाएंगे, ऐसा सोचना बेईमानी है। उद्योगपति तो यह देखता है कि उसे अपना धंधा कहां बढ़ाने में फायदा है और अगर उसे फायदा हुआ, तो वह खुद ही जगह और लोगों को ढूंढता-ढूंढता आ जाता है, इसके लिए ऐसे आयोजन करके करोड़ों रुपए बर्बाद करना कोई अर्थ नहीं रखता।

 

23 Oct. 2016

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