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कासगंज मामले में ट्विटर पर की जा रही टिप्पणियों की समीक्षा और शिकायतों के बाद ट्विटर ने हिन्दुत्व समर्थक पूर्व पत्रकार जागृति शुक्ला का ट्विटर अकाउंट सस्पेंड कर दिया। जिस ट्वीट के कारण ट्विटर ने यह कार्रवाई की, उसमें जागृति ने किसी धर्म का नाम नहीं लिखा था, लेकिन ऐसा माना गया कि यह ट्वीट मुस्लिम समाज के लोगों को निशाने पर रखकर किया गया था। जागृति शाह के ट्वीट पर अनेक लोगों को आपत्ति है, इसके पहले भी लोगों ने जागृति के ट्वीट पर आपत्तियां जताई थी।

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जागृति ने अपने ट्वीट में बिना किसी धर्म का नाम लिए लिखा था कि ‘‘हमें भी अपनी रक्षा के लिए घातक हथियारों को संग्रह करना चाहिए। वे लोग हमें ट्रेन में मारते हैं, प्लेन में मारते हैं, होटलों में बंधक बना लेते हैं, हमें कश्मीर छोड़ने पर बाध्य करते हैं और यहां तक कि गणतंत्र दिवस पर तिरंगा लहराने पर भी हमारी हत्या कर देते हैं। सच्चाई यह है कि डर में हम जी रहे हैं, वे नहीं। यह सब और नहीं, अपने साथ घातक हथियार रखिए, इसके पहले कि वे हमें मार दें, बेहतर है हम उन्हें मार दें।’’

जागृति शुक्ला ने यह ट्वीट सोमवार को हैशटैग मंडेमोटिवेशन लगाकर ट्वीट किया था। बाद में जब लोगों ने आपत्ति ली, तब जागृति ने सफाई दी कि उसने मुस्लिम धर्म के लोगों के लिए नहीं, बल्कि आतंकवादियों के लिए यह सब बातें लिखी थी। उसकी इस सफाई पर मीडिया और सोशल मीडिया के लोग और भड़क गए। उन्होंने कहा कि जागृति का अकाउंट हमेशा के लिए रद्द कर देना चाहिए।

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जागृति शुक्ला के ट्वीट के खिलाफ लोगों ने प्रधानमंत्री, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री, उत्तरप्रदेश पुलिस, केन्द्रीय गृह मंत्री आदि सभी को शिकायतें भेजी। शिकायत में कहा गया कि जागृति शुक्ला हिंसा भड़काने के लिए प्रत्यक्ष रूप से अपील कर रही है। किसी भी सभ्य समाज में यह नहीं होना चाहिए। ट्विटर ने पहले तो जागृति शुक्ला का अकाउंट सस्पेंड करने से मना कर दिया, लेकिन बाद में सोमवार की रात यह अकाउंट सस्पेंड कर दिया गया। बाद में जब जागृति शुक्ला अपने कुछ संदेश डिलीट करने पर राजी हुई, तब जागृति का ट्विटर अकाउंट फिर जारी कर दिया गया।

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ट्विटर के अनेक यूजर्स की शिकायत है कि जागृति शुक्ला ने उत्तरप्रदेश के कासगंज में हुए हिन्दुत्व समर्थकों पर हमले के बाद उत्तेजना फैलाने के उद्देश्य से किया था। भले ही उसने किसी धर्म विशेष का नाम नहीं लिया हो, लेकिन उद्देश्य साफ था कि वह किसके खिलाफ लिखा गया है। कासगंज में हुए दंगे के बाद सोशल मीडिया और मीडिया में अफवाहों का बाजार गर्म है। जिन लोगों पर कासगंज मामले में अफवाहें फैलाने का आरोप लगा है, उनमें आज तक के न्यूज एंकर रोहित सरदाना और श्वेता सिंह भी शामिल है। एक टीवी एंकर अभिसार शर्मा ने तो इस तरह की अफवाहों के खिलाफ फेसबुक लाइव का भी सहारा लिया और आज तक के एंकर्स के खिलाफ खुलकर बातें कही।

ट्विटर की कार्रवाई का शायद अब कुछ असर पड़े और जागृति शुक्ला और अन्य लोग ऐसे उकसाने वाले ट्वीट करना शायद बंद कर दें।

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