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BOOK3

तुम्हारे जाने के बाद कृष्णकांत निलोसे का पांचवां काव्य संग्रह है। वे हिन्दी के अलावा अंग्रेजी में भी लिखते रहे हैं और उनकी रचनाएं देशभर के पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही है, लेकिन इस संग्रह की कविताएं ऐसी प्रेम कविताएं है, जो उन्होंने अपनी प्रेयसी और पत्नी इंदु के लिए लिखी है।

कृष्णकांत निलोसे ने भूमिका में ही लिखा है कि इन कविताओं का उद्भव दु:ख की नाभी से हुआ है, ये कविताएं दु:ख की जड़ से उपजी कविताएं है, जो विषाद की गोद में पोषित हुई है। किसी व्यक्ति का होना अतीत हो सकता है। किन्तु उसके साथ बिताया हुआ पल कभी न भूलने वाली स्मृति बन जाता है। निलोसे जी ने लिखा है कि ये कविताएं मेरी आत्मा के अधरों पर रखी वो बांसुरी है, जो मुझे जीवन की गर्त से उबार, सरगम के अलौकिक सुरों के माध्यम से, आनंद की उस भाव स्थिति में ले जाती है, जहां मृत्यु का पीड़ा-भाव, प्रेम के शाश्वत संसार की रचना करता है। जाहिर है निलोसे जी को गहरी पीड़ा और विषाद से बाहर निकालने में इन कविताओं का योगदान रहा है, जिसे उन्होंने अपने पाठकों के साथ साझा किया।

कवि ने अपनी पत्नी के होने और चले जाने की पीड़ा, प्रश्न और भाषाहीन हो जाने की सीमा को छुआ है, जिस कारण ये कविताएं विशिष्ट बन गई है। संग्रह की शुरूआत ‘समुद्र ही रही अंतत:’ शीर्षक कविता से होता है और दूसरी ही कविता है ‘उसके जाने के बाद’। कविता की कुछ पंक्तियां इस तरह है -

‘सब कुछ खो जाने के बाद,
आखिर, बचा रह जाता है
मुठ्ठी में बंद सुर्ख गुलाब
जो अभिसार के वक्त
जूड़े में टांका था’

संग्रह की तीसरी कविता में उन्होंने अपने जीवन की ऊब का जिक्र किया है और फिर सौंदर्य बोध से होती हुई उनकी कविताएं लगातार आगे बढ़ते जाती है, जिनमें विरह की वेदना और अनुभवों का बोध है। निलोसे जी ने लिखा है कि हम तुम देह बनाकर मिले ही कब थे। बड़ी गुण बातें इस संग्रह में लिखी है। वे आशान्वित भी है और वह आएगी जरूर लिखते हुए इंतजार भी बयां करते है। बीच-बीच में खामोशी में झरते वियोग, अपने जन्मदिन की स्मृतियां, भुलक्कड़ स्वभाव, आत्मा के रूदन और मौन स्पर्श की चर्चा तो है ही। अनंत से संवाद भी है।

ये सभी 61 कविताएं असाधारण किस्म की है और उन्हें पढ़ने और समझने के लिए एक खास तरह के मूड की जरूरत होती है। संवेदना के स्तर पर ये कविताएं बहुत खरी है। ये जानना सुखद है कि 1931 में जन्मे निलोसे साहब सक्रिय हैं। कविताएं लिख रहे है और जिंदगी के अर्थ नए तरीके से समझ रहे है और समझा भी रहे है।

पुस्तक : तुम्हारे जाने के बाद (काव्य संग्रह)
लेखक : कृष्णकांत निलोसे
रेखांकन : रवीन्द्र पगारे
प्रकाशक : शिवना पेपरबैक्स, सीहोर
मूल्य : 150 रुपए

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