Bookmark and Share

Nihal-1

वरिष्ठ पत्रकार एस. निहाल सिंह उन लोगों में से थे, जिन्होंने 1975 में इमरजेंसी लगाए जाने का घोर विरोध किया था। वे 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद पाकिस्तान जाने वाले किसी भी भारतीय अखबार के पहले पत्रकार थे। सुरेन्द्र निहाल सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस और खलीज टाइम्स के संपादक तथा स्टेट्समैन के प्रधान संपादक के रूप में काम किया। इंडियन पोस्ट अखबार की बुनियाद ही उन्होंने रखी। वे ब्रिटेन, रूस, यूएसए, इंडोनेशिया आदि कई देशों में विशेष संवाददाता के तौर पर काम कर चुके थे।

वे विदेश मामलों के विशेषज्ञ माने जाते थे। उन्होंने भारत के अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और कई विदेशी मामलों में भी अनेक लेख लिखे थे। उनकी कई किताबें चर्चित रही। जिनमें ‘द रॉकी रोड टु इंडियन डेमोक्रेसी : नेहरू टू नरसिंहा राव’, ‘द योगी एंड द बियर : स्टोरी ऑफ इंडो सोवियत रिलेशन्स’ और ‘द गैंग एंड द 900 मिलियन : ए चाइना डायरी’ चर्चित रही है। उन्होंने पत्रकारिता के पेशे की भी समीक्षा की। पत्रकारिता पर उनकी एक बहुचर्चित किताब रही है - ‘इंक इन माय विन्स’। वे पत्रकारिता के नैतिक मूल्यों के समर्थक थे।

एस. निहाल सिंह के कई राजनेताओं से निजी संबंध थे। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी उनके लेखन को पसंद करती थी। 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद जब वे पत्रकार के रूप में पाकिस्तान गए, तब वहां जाने के पहले उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी से मिलना उचित समझा। एस. निहाल सिंह ने पाया कि श्रीमती इंदिरा गांधी पाकिस्तान के संबंधों को लेकर बहुत सकारात्मक नहीं है। 1975 में जब इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी की घोषणा की, तब उन्होंने खुलकर मोर्चा लिया और लगातार इमरजेंसी के खिलाफ लिखते रहे। उनके विरोध को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित किया गया। यूएसए में एक कार्यक्रम में उन्हें इंटरनेशनल एडिटर ऑफ द ईयर का सम्मान दिया गया।

जब इमरजेंसी लगाई गई थी, तब वे अंग्रेजी दैनिक द स्टेट्समैन के संपादक थे। उन्होंने इमरजेंसी किस तरह थोपी गई है, इस बारे में तथ्य परख लेख इस अंदाज में लिखा था कि वह सेंसरशिप की नजर में नहीं आया। जब वह अखबार पाठकों के सामने पहुंचा और सेंसर करने वाले अधिकारियों का ध्यान उस पर गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

Nihal-2

एस. निहाल सिंह के बारे में कहा जाता है कि वे जितने बड़े और धीर-गंभीर संपादक थे, उतने ही सादगी पसंद भी थे। अहंकार से दूर रहने वाले। विगत कई वर्षों से वे सांप्रदायिकता के फैलाव और मीडिया पर अंकुश लगाने की कोशिशों का मुखर विरोध कर रहे थे।

अनेक देशों में संवाददाता के रूप में कार्य करते हुए वे खबरों के साथ अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की पूरी समीक्षा लिख देते थे। उनके नाम से छपी खबर में कई उन तथ्यों को भी उजागर किया जाता था, जो आमतौर पर नजर नहीं आते। सिंगापुर में रहते हुए उन्होंने स्टेट्समैन के लिए कई वर्ष तक कार्य किया और उनकी रिपोर्टिंग पूरे दक्षिण पूर्व एशिया की स्थिति का खुलकर वर्णन करती थी।

एस. निहाल सिंह प्रेस इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के डायरेक्टर भी रह चुके हैं। न्यूयॉर्क के कार्नेगी अंतर्राष्ट्रीय शांति संस्थान में भी वे सीनियर एसोसिएट के रूप में कार्य कर चुके थे। प्रेस क्लब इंडिया के अध्यक्ष रह चुके एस. निहाल सिंह अपनी पीढ़ी के उन चुनिंदा पत्रकारों में थे, जो यह कहते थे कि उनकी नसों में खून नहीं, स्याही दौड़ती है। दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में उनका नियमित आना-जाना था और यह उनका अड्डा माना जाता था। 30 अप्रैल को ही वे अपनी ८९वीं वर्षगांठ मनाने वाले थे।

Search

मेरा ब्लॉग

blogerright

मेरी किताबें

  Cover

 buy-now-button-2

buy-now-button-1

 

मेरी पुरानी वेबसाईट

मेरा पता

Prakash Hindustani

FH-159, Scheme No. 54

Vijay Nagar, Indore 452 010 (M.P.) India

Mobile : + 91 9893051400

E:mail : prakashhindustani@gmail.com