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मीडिया के प्रति समर्पण का पहला दौर उससे ज्ञान हासिल कर खुद को पत्रकार बनाना है तो दूसरा दौर अनुभवों के खजाने से इसे परिष्कृत करना। हालांकि अब ऐसे पत्रकारों की संख्या कम हो रही है। पेशे में आई जबरदस्त प्रतिस्पर्धा ने ‘सफल पत्रकार’ की परिभाषा प्रभावित की है, इस मुकाम को हासिल करने के रास्ते बदल दिए हैं, लेकिन संकट के इन संकेतों के बीच उम्मीद रोशन करते हैं प्रकाश हिंदुस्तानी।

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न्यू जर्सी के रटगर्स विश्वविद्यालय में तीन से पांच अप्रैल 2015 तक द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन में भारत, अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, फिजी आदि देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। उद्देश्य है भारतीय समाज के साथ जुड़कर हिन्दी के अभियान को नई तेजी और दिशा प्रदान की जाए। प्रवासी भारतीय समुदाय द्वारा हिन्दी को आगे बढ़ाने के लिए यह आयोजन हो रहा है। गत वर्ष यह आयोजन न्यू यार्क विश्वविद्यालय में किया गया था।

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इन्दौर। वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश हिन्दुस्तानी 3 से 5 अप्रैल 2015 को न्यू जर्सी में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन में वक्ता के रूप में आमंत्रित किए गए है। वे हिन्दी इंटरनेट की भाषा विषय पर व्याख्यान और उपस्थित श्रोताओं के सवालों के जवाब देंगे। इस अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन का आयोजन न्यूू जर्सी की रटगर्स यूनिवर्सिटी में होगा। इस सम्मेलन में रटगर्स यूनिवर्सिटी, भारतीय दूतावास और हिन्दी संगम नामक संस्था मिलकर कर रही है। इस सम्मेलन में भारत के न्यूयॉर्वâ स्थित काउंसलेट जनरल विशेष तौर पर उपस्थित रहेंगे। सम्मेलन में उच्च शिक्षा में हिन्दी के महत्व, कारोबार में हिन्दी का उपयोग, अमेरिका में हिन्दी को बढ़ावा देने के प्रयास और अमेरिका में हिन्दी शिक्षकों के विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। इस सम्मेलन में विश्वभर में पैâले हिन्दी के विशेषज्ञ अलग-अलग विषयों पर चर्चा करने वाले है। प्रकाश हिन्दुस्तानी ने हिन्दी को इंटरनेट पर प्रचारित-प्रसारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और उनके ब्लॉग को कई राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके है।

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चेतन भगत के ख्याल पर हिन्दी प्रेमियों के विचार


लेखक चेतन भगत का मानना है कि हिन्दी को आगे बढ़ाना है तो देवनागरी के स्थान पर रोमन को अपना लिया जाना चाहिए। हमने हिन्दी प्रेमियों से बात की और जानना चाहा कि वे क्या मानते हैं क्या यह भाषा की हत्या की साजिश है? हिन्दी भाषा में अंगरेजी शब्दों का समावेश तो मान्य हो चुका है मगर लिपि को ही नकार देना क्या भाषा को समूल नष्ट करने की चेष्टा नहीं है? क्या आपको भी लगता है कि हिन्दी अब रोमन में लिखना आंरभ कर देना चाहिए। प्रस्तुत है तीसरा भाग -

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