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webdunia30oct2017

जेल तो जेल ही होती है। चाहे कहीं की भी हो। वहां के नियम-कायदे भी लगभग समान ही होते हैं। क्या भारत की और क्या विदेश की? आमतौर पर जेलों में जैमर लगे होते है, जिस कारण कैदी तो क्या जेल का स्टॉफ भी मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं कर सकता, लेकिन कैदी कोई न कोई रास्ता खोज ही लेते हैं। रायपुर की सेन्ट्रल जेल में दो साल पहले कैदियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी मांगे रखी थी। कैदियों ने अपना फेसबुक पेज भी बनाकर अपलोड कर दिया था और ट्विटर पर भी सक्रिय थे। इसके लिए अपहरण और फिरौती के मामले में जेल में बंद नितिन चोपड़ा को जिम्मेदार ठहराया गया था। बाद में जेल अधिकारियों ने सेन्ट्रल जेल में जांच की और सोशल मीडिया से कैदियों को दूर कर दिया। जेल में कैदी को कनेक्टिविटी की सुविधा नहीं होती। इसलिए रायपुर जेल का मामला बहुत ज्यादा चर्चा में आया था। छत्तीसगढ़ जेल प्रबंधन ने आगे क्या किया, यह बात कभी खुलकर सामने नहीं आई, लेकिन अब एडिनबर्ग की जेल में मोबाइल कनेक्टिविटी का ऐसा ही मामला सामने आया है। जेल अधिकारियों ने पूरी जेल छान मारी, एक-एक कैदी की जांच की और हर कैदी के सामान की स्केनिंग की, लेकिन फिर भी पुलिस को मोबाइल नहीं मिल पाया।

सोशल मीडिया प्लेटफार्म स्नेपचैट पर अपना एक फोटो अपलोड करते हुए एक कैदी माइकल रॉबर्ट्स ने लिखा कि जेल में जीवन बहुत आसान और सुविधाजनक है। जेल के अधिकारियों ने मुझे एकाकी सेल में बंद कर रखा है और मुझे लोगों से मिलने-जुलने नहीं दे रहे, लेकिन फिर भी मैं मोबाइल अपने साथ रखता हूं और यह रहा उसका सबूत। माइकल ने सबूत के तौर पर अपना एक न्यूड फोटो और जांच कर रहे अधिकारियों की तस्वीरें शेयर की। माइकल 23 साल का है और 9 मार्च 2017 को उसे गिरफ्तार किया गया था, क्योंकि वह एक रेस्टोरेंट में शराब पीकर गुंडागर्दी कर रहा था और चाकू लेकर एक व्यक्ति पर हमला करने की तैयारी कर रहा था। रॉबर्ट्स ने अपने साथ कुछ और कैदियों के फोटो भी शेयर किए। उनमें 16 साल से जेल काट रहा जॉन रेड भी शामिल है, जिसने 40 साल के एक व्यक्ति की हत्या कर दी थी। रॉबर्ट्स को साढ़े तीन साल की जेल हुई है। जेल में उसने दूसरे अपराधियों के साथ शेयर की गई तस्वीरों में लिखा है कि ये मेरे दूसरे साथी हैं।

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स्नेपचैट पर अपडेट के बाद जेल अधिकारी सक्रिय हुए और उन्होंने जांच की तो पाया कि जेल के कैदियों के पास 4 मोबाइल थे, जिनमें दो आईफोन, एक सैमसंग और एक अल्काटेल का फोन था। जांच के दौरान एक आईफोन को छुपा लिया गया। मोबाइल फोन छुपाने के मामले में एक ऐसे कैदी ने जिम्मेदारी ली है, जो लंबे समय तक जेल में रहने वाला है। असलियत यह पता चली कि अगले महीने ही जेल से छूटने वाला एक कैदी इन मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहा था। जांच के बाद उसने फिर फोटो शेयर किया और दुनिया को यह बात बताई कि जेल में कैदियों के साथ क्या हो रहा है?

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स्कॉटिश जेल सेवा के अधिकारी इस मामले में लगातार जांच कर रहे है कि आखिर ऐसा कैसे हुआ? जेल अधिकारियों को पता चला कि कैदियों के पास मोबाइल फोन और कनेक्टिविटी की सुविधा चोरी-छुपे होती है और वे उसका उपयोग आमतौर पर न्यूड फोटो शेयर करने के लिए करते है। जेल के कैदियों को मोबाइल फोन रखने की अनुमति नहीं है और अगर वे जेल के भीतर ऐसा फोन रखते है, तो वे गैरकानूनी है और ऐसे में उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

सबसे पहली बार जेल अधिकारियों को इस बात का पता तब चला, जब उन्होंने कैदियों के न्यूड और सेमी न्यूड फोटो सोशल मीडिया पर देखें। मामले की जांच करने पर जेल से मोबाइल बरामद भी किए गए, लेकिन तब भी कैदी मोबाइल छुपाने में कामयाब रहे। जांच के दौरान यह मोबाइल बाहर ले जाए गए थे और बाद में वापस अंदर लाए गए, इससे साबित है कि जेलों में होने वाले गौरखधंधे सारी दुनिया में लगभग एक जैसे ही है। स्कॉटलैंड की सोगाथान जेल अपनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के लिए पहचानी जाती है, लेकिन उस जेल में भी कैदियों ने सेंध लगा ही दी।

30 oct 2017

रायपुर जेल में सोशल मीडिया की गांधीगीरी

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