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जब से यह खबर सुर्खियों में आई है कि फेसबुक के डाटा का उपयोग कुछ कंपनियां शोध के लिए कर रही है और वे राजनैतिक विज्ञापनों में उसे काम में लेती है, तब से फेसबुक पर आपत्तियां आने लगी है। अनेक लोग फेसबुक से अपना अकाउंट डिलीट कर रहे है। यह बात भी सामने आई है कि फेसबुक का अकाउंट डिलीट करने पर लोगों को कुछ परेशानियां भी आ रही है। इसका कारण यह है कि कई लोग अपने फेसबुक अकाउंट के माध्यम से ही दूसरे कई अकाउंट लॉग-इन और लॉग-आउट करते हैं।

 

अब सवाल यह है कि फेसबुक का विकल्प क्या है? फेसबुक का विकल्प फेसबुक के ही दूसरे प्रोडक्ट्स है। अब मेसेंजर को ही लीजिए। यह फेसबुक का ही प्रोडक्ट है। फेसबुक डिलीट करने का मतलब यह नहीं कि आपने मेसेंजर डिलीट कर दिया है। मेसेंजर का उपयोग कई लोग एसएमएस की तरह करते है। मेसेंजर के एफएक्यू के अनुसार अगर आप अपना पेâसबुक डी-एक्टीवेट करने के बाद भी वे मेंसेजर का उपयोग तो कर ही सकते है।

ट्विटर को भी कई लोग फेसबुक की ही तरह उपयोगी सोशल मीडिया साइट मानते है। ट्विटर के साथ खास बात यह है कि यह माइक्रोब्लॉगिंग साइट है और यहां आप 280 कैरेक्टर और 4 फोटो से अधिक एक साथ शेयर नहीं कर सकते। फेसबुक से अलग ट्विटर की एक खूबी यह है कि यहां आप कितने भी लोगों को फॉलो कर सकते है और कितने भी लोग आपको फॉलो कर सकते है। कुछ ट्विटर अकाउंट वालों के फॉलोअर्स तो करोड़ों में है। ट्विटर को फेसबुक की तुलना में ज्यादा परिपक्व माना जाता है। यह बात और है कि ट्विटर पर भी लगभग वैसे ही आरोप लग चुके है, जैसे फेसबुक पर लगे है, लेकिन डोनाल्ड ट्रम्प ने राष्ट्रपति बनने के बाद तो व्हॉइट हाउस के मीडिया प्रवक्ता की जगह ट्विटर को ही दायित्व सौंप दिया लगता है। कई लोग ट्रम्प को ट्विटर इन चीफ भी कहते है।

पाथ (Path)

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फेसबुक और इंस्टाग्राम का मिला-जुला रूप है पाथ। कई लोग मानते है कि फेसबुक से तलाक लेने वाले अब पाथ के साथ जुड़ सकते है। यह एक ऐप आधारित प्लेटफार्म है, जो अधिकांश मोबाइल पर तो काम करता है, लेकिन डेस्कटॉप पर काम नहीं करता। ग्रुप बनाकर संदेश देने वालों के लिए यह आदर्श माना जाता है, क्योंकि यह आपके फोटो और पोस्ट के अलावा शॉपिंग, किताबें, सिनेमा, म्युजिक, टीवी शो आदि के बारे में भी बाते शेयर करना पसंद करता है।

राफ्ट्र (Rafra)

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जो लोग अपने विचार शेयर करना चाहते है, उनके लिए यह एक अच्छा विकल्प है। जिस तरह फेसबुक की शुरूआत कॉलेज के विद्यार्थियों को आपस में कनेक्ट करने के लिए हुई थी, वैसे ही इसकी शुरूआत हुई। इसकी सेवाएं मोबाइल और डेस्कटॉप दोनों पर है। इसके साथ ही ये आईओएस विंडोज पर भी उपलब्ध है। इस वेबसाइट की खूबी यह है कि यह अपने यूजर से न्यूनतम जानकारी पूछती है और उस पर भी दावा करती है कि यह केवल इंटरनल कंपनी उद्देश्य से की जा रही है। ऐसी कोई जानकारी नहीं पूछी जाती, जिससे की व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक होती है।

वेरो (Vero)

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सोशल मीडिया की यह दिलचस्प साइट है, लेकिन यह मुफ्त उपलब्ध नहीं है। यह विज्ञापन के बजाय अपने यूजर्स से चंदा लेकर काम करती है। इस कंपनी की दावा है कि यह डाटा माइनिंग नहीं करती और अलगोरिथम का उपयोग भी नहीं करती। इसका मतलब यह हुआ कि जब आप यहां कुछ भी सर्च करते है, तो वह अपने आप सेव नहीं किया जाता और भविष्य में उससे जुड़ी जानकारी नहीं दी जाती। कंपनी का यह भी दावा है कि वह केवल वहीं जानकारी लेती है, जो कानूनी रूप से लेना जरूरी है। इसने सबसे पहले अपने प्रचार के लिए 10 लाख यूजर को मुफ्त में सदस्यता दी। यह सदस्यता आजीवन थी। 10 लाख के बाद उसने फीस लेना शुरू कर दिया।

डिग (Digg)

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सोशल मीडिया की यह एक ऐसी वेबसाइट है, जिसमें अनेक विषय से जुड़े लेख आदि पढ़े जा सकते है। आई-फोन और आई-पैड के यूजर यहां से समाचार प्राप्त कर सकते है। फेसबुक के न्यूज फीड की तुलना में यह ज्यादा गंभीर विकल्प है।

सिग्नल (Signal)

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यह एक ऐसा मैसेजिंग ऐप है, जो मुफ्त है और सुरक्षा की चिंता करते हुए संदेशों का आदान-प्रदान करता है। यहां आप एनिमेटेड स्टीकर नहीं भेज सकते, लेकिन अपनी बात सामने वाले तक आसानी से पहुंचा सकते है। जो लोग साफ-सुथरे संदेश देना चाहते है, उनके लिए यह एक अच्छा विकल्प है। यह डेस्कटॉप पर भी उपलब्ध है। यहां से आप आडियो और वीडियो कॉल भी कर सकते है। यहां विज्ञापन भी आपको परेशान नहीं करते।

फेसबुक अपने अकाउंट को डी-एक्टीवेट करने वालों को हतोत्साहित करने के लिए तरह-तरह के प्रयास भी कर रहा है। जब कोई व्यक्ति अपना अकाउंट डी-एक्टीवेट करने जाता है, तब उसे बताया जाता है कि वह फेसबुक छोड़ने के बाद कौन-कौन सी चीजों से मरहूम रह जाएगा। उसे न्यूज फीड नहीं मिलेगी, फेसबुक अकाउंट से वह कई खातों में जुड़ नहीं पाएगा, जरूरत के विज्ञापन भी उसे नहीं मिल पाएंगे आदि।

फेसबुक अपना अकाउंट डी-एक्टीवेट करने वालों को यह सुविधा भी देता है कि वे अकाउंट डी-एक्टीवेट करते वक्त फेसबुक अकाउंट में दिए गए इवेंट को एक्सपोर्ट कर सके। आप अपने ई-मेल पर वह जानकारी सेव करके रख सकते है। फेसबुक पर लॉगइन करने के बाद बायीं तरफ इवेंट्स लिखा नजर आता है। वहां जाकर आप आपको क्या करना है, वह फेसबुक खुद ही बता देता है।

कई डेटिंग ऐप ऐसे है, जो फेसबुक से सीधे जुड़े हुए है। अगर आप फेसबुक अकाउंट डिलीट करते है, तब भी टिंडर पर जाकर अकाउंट तो खोल ही सकते है। टिंडर भी इसी तरह की सुविधाएं देता है। अगर आप फेसबुक अकाउंट पूरी तरह डी-एक्टीवेट नहीं करना चाहे, तब भी आपके पास यह विकल्प है ही कि आप अपनी प्राइवेसी को कड़ा कर दें।

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