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बीते सप्ताह सोशल मीडिया पर दो महाराज छाये रहे। इन्दौर में रहने वाले भय्यू महाराज ने गत मंगलवार को खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। उसके एक दिन पहले शनि भगवान से लोगों को कृपा दिलवाने वाले दाती मदन महाराज से शनि रूठ गए और उनके खिलाफ एक महिला ने एफआईआर दर्ज करवा दी। एफआईआर की धाराएं इतनी गंभीर थी कि दाती महाराज को भागे-भागे फिरना पड़ा। भय्यू महाराज की आत्महत्या भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय रही और लोगों ने उनके बारे में तरह-तरह की बातें शेयर की। कई लोगों ने भय्यू महाराज की आत्महत्या को धर्म की हानि बताया, तो कई ने लिखा कि भय्यू महाराज संत नहीं एक सामान्य पुरूष थे, जो अपनी पत्नी और बेटी के दबाव को सह नहीं सके।

सोशल मीडिया पर भय्यू महाराज की तस्वीरें, वीडियो, कार्टून्स और उनका सुसाइड नोट छाया रहा। लोगों ने लिखा कि साधु-संतों के पास ज्ञान की किताबें होनी चाहिए, लेकिन वे सांसारिक जगत में आकंठ डूब गए है। इसलिए आम लोगों को होने वाली परेशानी भी साधु-संतों को हो रही है। जिन साधुओं के पास धार्मिक ग्रंथ होने चाहिए, वे रिवाल्वर, रोलेक्स घड़ियां और महंगी एसयूवी का संग्रहण कर रहे हैं। माया मोह से जिन्हें दूर होना चाहिए, वे खुद माया मोह की गिरफ्त में हैं।

भय्यू महाराज की आत्महत्या को लेकर जहां लोगों में विस्मय का भाव था, वहीं अनेक लोगों ने इस बात पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी भी की कि जो बाबा आम लोगों को तनाव से मुक्त रहने और सही दिशा में जीवन जीने का संदेश देते थे, वे खुद कितने अशांत और असंतुलित थे। कांग्रेस ने इस मौके को शिवराज सिंह पर हमले के रूप में लिया। भय्यू महाराज को राज्यमंत्री का दर्जा दिया जाना और भय्यू महाराज द्वारा प्रस्ताव ठुकराना भी चर्चा का विषय रहा। लोगों ने ऐसे आध्यात्म पर लानतें भेजी, जिसके गुरू भी आत्महत्या कर लेते हैं।

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भय्यू महाराज का सुसाइड नोट सोशल मीडिया की सुर्खियां बना रहा। दो या तीन सुसाइड नोट की बात भी सामने आई। दूसरी तरफ ऐसे कई नेता थे, जिन्होंने भय्यू महाराज के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और उन्हें महान आध्यात्मिक गुरू और राष्ट्रीय संत करार दिया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने सबसे पहले भय्यू महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की।

ट्विटर के अलावा फेसबुक पर भी भय्यू महाराज को लेकर लगातार टीका-टिप्पणियां होती रही। भय्यू महाराज की समाजसेवा, उनकी पहली शादी, पहली पत्नी की मृत्यु, दूसरी शादी और अन्य गतिविधियों पर लोगों ने खुलकर टिप्पणियां लिखी। भय्यू महाराज की अंत्येष्ठी और उठावने में कई नेता भी आए, लेकिन जैसी उम्मीद थी और जिन लोगों की आने की संभावना थी, ऐसे बड़े नेता कन्नी काट गए।

मृत्यु के पहले भय्यू महाराज की ओर से एक घंटे में तीन ट्वीट किए गए थे। ये ट्वीट मासिक शिवरात्रि को लेकर थे। यह बात भी उजागर हुई कि भय्यू महाराज का ट्विटर अकाउंट कोई और संभालता था।

दाती मदन महाराज का किस्सा कुछ अलग है। उनके खिलाफ एक महिला ने एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें दाती महाराज द्वारा व्याभिचार करने का आरोप लगाया गया। लोगों ने इस बात पर गहरी आपत्ति की कि ऐसे लोग किस तरह साधु-संत का दर्जा पा जाते है। लोगों ने लिखा कि भय्यूजी महाराज भटके हुए लोगों को राह दिखाते थे, पर खुद राह भटक गए और दाती महाराज लोगों को शनि के प्रकोप से मुक्त कराते थे पर शनि देव ने उन्हीं पर वक्र दृष्टि डाल दी। लोगों ने दाती महाराज को वारदाती महाराज करार दिया।

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