
टेनिस की तो शुरुआत ही 'लव' से होती है. सोमदेव देववर्मन को भी टेनिस से पुरानी मोहब्बत है. वे वेलेंटाइन्स डे के एक दिन पहले (13 फरवरी 1985 को) जन्मे. वे एक दीवाने की तरह खेलते हैं. एक चैम्पियन की तरह 145 मील प्रति घंटे की रफ़्तार से हिट करते हैं. इसी के कारण वे एशियाई खेलों के इतिहास में जगह बना सके. एशियाई खेलों में कोई भी भारतीय पुरुष खिलाड़ी टेनिस सिंगल्स फाइनल तक नहीं पहुंचा था. वे वहां पहुंचे और स्वर्ण पदक भी जीता. वे डबल्स में सनम सिंह के साथ स्वर्ण जीत चुके थे. वे एक कांस्य पदक भी दिला चुके थे. इसके पहले कॉमनवेल्थ में भी वे स्वर्ण जीत चुके थे.
ग्वानझू के एशियाई खेलों में मेंस सिंगल्स टेनिस में भारत को पहला गोल्ड मैडल दिलानेवाले सोमदेव देववर्मन ने ट्विट्टर पर लिखा था--''वास्तव में मैं नहीं जानता कि कैसे प्रतिक्रिता दूं, मुझे भारतीय होने पर नाज़ है.'' कुछ घंटों बाद उन्होंने फिर ट्विट किया --'' अभी भी लगता है कि यह हुआ ही नहीं!!!''
अब जनवरी में होनेवाली एटीपी एयरसेल चेन्नई ओपन टेनिस टूर्नामेंट में सोमदेव को सीधी एंट्री मिल गयी है. ऐसी एंट्री 1999 में लिएंडर पेस को मिली थी. अब अगली जनवरी में ही आस्ट्रेलियन ओपन भी है और मार्च में डेविस कप. सोमदेव इन तमाम मैचों में अपनी प्रतिभा दिखायेंगे. सोमदेव देववर्मन ने लिएंडर पेस, महेश भूपति और रोहण बोपन्ना की कमी कहलाने नहीं दी. बेहतरीन सर्विस, लाजवाब डिफेंसिव बेसलाइन खेल और शानदार ग्राउंड शोट्स के कारण वे टेनिस के शहजादे बन गए हैं. पहले लोग देववर्मन के नाम से केवल सचिन और राहुल देववर्मन को ही जानते थे, अब सोमदेव को भी इसी नाम से जानते हैं.
टेनिस की दुनिया में पांच शब्द बहुत बोले जाते हैं--'गुड शोट', 'बेड लक', और 'हेल'. सोमदेव इनमें से शुरू के दो अल्फाजों में ही यकीन करते हैं. ग्वानझू में उन्होंने उजबेकिस्तान के डेनिस उस्तोमिन को 6 -1 , 6 -2 से हराया था. मैच के वक़्त उस्तोमिन की विश्व रेंकिंग 40 थी और सोमदेव उनसे 66 रेंक नीचे 106 पर थे; लेकिन सोमदेव ने शानदार जीत हासिल की.
सोमदेव बचपन से ही टेनिस खेल रहे हैं, लेकिन 17 साल की अवस्था में, 2002 से वे टेनिस के बारे में गंभीर हुए. 2004 में उन्होंने ऍफ़-टू चैम्पियनशिप जीती. तब उनकी रेंकिंग हुई थी 666 पर. भारत से खेलते हुए वे अमेरिका पढ़ाई करने चले गए और खेल भी जारी रखा. 2007 और 2008 में वे एनसीएए के सिंगल्स टाइटल्स के विजेता बने. उन्हें विश्व का सबसे सफलतम कालेज स्तर का टेनिस खिलाड़ी माना गया. वे अपनी रेंकिंग में 94 नम्बर तक पहुँच चुके हैं. कामयाबी का श्रेय वे अपने कोच जैक वोलिकी को देते हैं.
गुवाहाटी में जन्मे सोमदेव को संगीत का शौक है. जाज़ उन्हें पसंद है और देव मैथ्यू का बैंड भी. दो भाई और एक बहन में वे सबसे छोटे है. ट्विट्टर पर उनके हजारों प्रशंसक हैं, लेकिन वे खुद महेश भूपति, रिया पिल्लै, बराक ओबामा और अपनी बड़ी बहन पालोमी को फालो करते हैं. अब अगले कुछ साल सोमदेव के ही हैं. अब दुनिया देखेगी कि टेनिस में यह खिलाड़ी क्या क्या गुल खिलाता है.
-प्रकाश हिन्दुस्तानी
28 नवम्बर 2010