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10-april-2011

क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतने का जितना श्रेय खिलाड़ियों को है, उतना ही 'पत्थरों को मील का पत्थर' बनानेवाले कोच गैरी कर्स्टन को भी है तभी तो वर्ल्ड कप जीतने के बाद खिलाड़ियों ने सचिन को तो कंधे पर उठाया ही था गैरी कर्स्टन को भी यह इज्ज़त बख्शी थी.

क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतने का जितना श्रेय खिलाड़ियों को है, उतना ही 'पत्थरों को मील का पत्थर' बनानेवाले कोच गैरी कर्स्टन को भी है तभी तो वर्ल्ड कप जीतने के बाद खिलाड़ियों ने सचिन को तो कंधे पर उठाया ही था गैरी कर्स्टन को भी यह इज्ज़त बख्शी थी.

गैरी कर्स्टन अब अपने वतन दक्षिण अफ्रीका चले गए हैं और वहां अपनी बीवी-बच्चों के साथ वक़्त बिता रहे हैं. वर्ल्ड कप जिताने के बाद अब उनके पास एक से बढ़कर एक ऑफर्स आ रहे हैं, इनमें उनके अपने देश की टीम का कोच बनाने से लेकर सिडनी सिक्सर्स और सिडनी थंडर्स के नाम प्रमुख हैं. वर्ल्ड कप जिताने के लिए कोच ने केवल मैदान में ही मेहनत नहीं की, बल्कि ड्रेसिंग रूम और होटलों के कमरों तक को क्रिकेट का रण बना दिया. कोच के रूप में गैरी कर्स्टन ने खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को जगाया और खिलाड़ियों को 'थॉटफुल मैनर्स' में ड्रेसिंग रूम के विवादों से भी बचाया. उन्होंने सचिन को रोल मॉडल के रूप में आगे बढ़ाया और धोनी को श्रेष्ठतम कैप्टन के रूप में. गौतम गंभीर उन्हें चमत्कारिक प्रयोगों के लिए क्रेडिट देते हैं और भज्जी बल्लेबाजी में सुधार के लिए. पठान और रैना उन्हें अपने परिवार का वरिष्ठ मानते हैं. नेहरा और श्रीसंत अपने खेल में सुधार के लिए उनके प्रति आभार मान रहे हैं.

गैरी कर्स्टन ने टीम इण्डिया को सही समय पर अलविदा कहा है. कोई पर्वतारोही एवरेस्ट पर फतह कर ले तो उसके पास फतह करने को बचता ही क्या है? गैरी ने भारतीय टीम की जीत की डिजाइन बड़ी शिद्दत से बनाई और उस पर अमल कराया. वर्ल्ड कप के पहले उन्होंने सौ से ज्यादा पेज का एक ब्ल्यू प्रिंट तैयार किया था, जिसके मुताबिक़ खिलाड़ियों के ड्रेसिंग रूम में बॉक्सर मोहम्मद अली और साइकिलिस्ट आर्मस्ट्रॉंग की तस्वीरें लगाईं गयीं थी. खिलाड़ियों को सलाह थी कि वे अपने आप पर नियत्रण रखें और मीडिया से पूरी तरह दूर रहें. होटलों के कमरों से टीवी हटवा दिए जाते थे और अखबार पढ़ने को दिए ही नहीं जाते थे ताकि खेल समीक्षा से बचा जा सके. हर खिलाड़ी के लिए अलग अलग हालात में अलग भूमिका तैयार होती थी, जो दोहराई नहीं जाती. हर मैच की रणनीति अलग. अलग अलग देशों की टीम के अलग नाम थे जैसे बांग्ला देश की टीम डेंजरस फ्लोटर्स के नाम से, दक्षिण अफ्रीका टीम डेंजरस चोकर्स (खरनाक मगर चूकनेवाले), आयरलैंड टीम इजी मीट नाम से पुकारी जाती थी. इन नामों को दोहराने भर से टीम इण्डिया के अवचेतन मन में आ जाता था कि अब उन्हें किस तरह की टीम से मुकाबला करना है.

गैरी कर्स्टन ने अपने करीब तीन साल के कार्यकाल में सबका दिल जीत लिया. विदेशी होने के बावजूद टीम इण्डिया का प्यार पाना बहुत मायने रखता था. टीम के हर सदस्य ने उनकी विदाई के वक़्त कसीदे पढ़े. पूर्व टीम सदस्यों ने भी उन्हें बेमिसाल कोच कहा था. खिलाड़ी उन्हें अपना समझते थे, यह भावना पैदा करने में ही उनकी कामयाबी थी.

गैरी कर्स्टन ने अपने देश दक्षिण अफ्रीका के लिए 101 टेस्ट और 185 वन डे खेले हैं. सलामी बल्लेबाज़ के तौर पर उन्होंने कई यादगार पारियां खेली थीं. वे विश्वसनीय फिल्डर भी रहे. इंग्लैण्ड के खिलाफ एक टेस्ट में उन्होंने साढ़े 14 घंटे खेलते हुए 275 रन बनाए थे. 2004 में रिटायर होने के तीन साल बाद उन्होंने दो मित्रों के साथ केप टाउन में परफार्मेंस ज़ोन नामक कंपनी बनायी थी जो उनके भारत आने के बाद भी कामकाज करती रही. 23 नवम्बर 1967 को जन्मे गैरी कर्स्टन के दो बेटे हैं.

प्रकाश हिन्दुस्तानी

10 april 2011

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