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15-May-2011

आईएएस टॉपर एस. दिव्यदर्शिनी को भरोसा था कि उनका चयन आईएएस के लिए हो जाएगा, लेकिन वे टॉप पर रहेंगी, इसकी कल्पना भी नहीं थी. एस. दिव्यदर्शिनी की इस महत्वपूर्ण सफलता के कुछ सूत्र :

चेन्नई की 24 साल की एस. दिव्यदर्शिनी यूपीएससी की प्रशासकीय नौकरी की परीक्षा में टॉप पर रहीं. इसके पहले भी वे इस परीक्षा में बैठीं थीं, पर नाकामयाब रहीं. मध्यमवर्गीय परिवार की दिव्यदर्शिनी इसके बाद भारतीय स्टेट बैंक में प्रोबेशनरी अधिकारी के लिए चुनी गयीं लेकिन उन्होंने अपनी यूपीएससी परीक्षा की तैयारी भी जारी रखी.

उन्हें भरोसा था कि उनका चयन आईएएस के लिए हो जाएगा, लेकिन वे टॉप पर रहेंगी, इसकी कल्पना भी नहीं थी. 2009 की परीक्षा देते वक्त वे अपनी लॉ की डिग्री के लिए भी पढ़ाई कर रही थीं. इस बार उन्होंने कोई भी मौका नहीं छोड़ा. चेन्नई में आईएएस के लिए उन्होंने कोचिंग क्लास जाना शुरू किया ताकि सही मार्गदर्शन मिल सके. एस. दिव्यदर्शिनी की इस महत्वपूर्ण सफलता के कुछ सूत्र :

कामयाबी का कोई शॉर्टकट नहीं
बड़े लक्ष्य को पाना हो तो कोई शॉर्टकट नहीं चलता. आर्ट्स में डिग्री लेने के बाद लॉ की डिग्री के लिए भी पढ़ाई के दौरान यूपीएससी की भी तैयारी करनेवाली दिव्यदर्शिनी मानती हैं कि जीवन में किसी भी क्षेत्र में कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है. नियमित पढाई हो या प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी, केवल और केवल कड़ी मेहनत कामयाबी पाने की पहली सीढ़ी है. कामयाबी के लिए और भी कई बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है लेकिन कड़ी मेहनत के बिना वे सब बातें बेकार हो जाती हैं. शॉर्टकट के जरिये अगर कामयाब होने का सपना देख रहे हों तो उसे भूल जाइए.

उचित मार्गदर्शन प्राप्त करें
बिना मार्गदर्शन के भी कामयाबी मिल सकती है लेकिन इसमें आपका सफ़र लम्बा और दुश्वार हो सकता है. 2009 में पहली बार यूपीएससी की परीक्षा देने के बाद मुझे यही महसूस हुआ. हर परीक्षा का कोई ना कोई पैटर्न होता है. अगर आप को उसकी जानकारी हो तो वह मदद मिल जाती है. मैंने जब इस परीक्षा की कोचिंग लेना शुरू की तो कई लोगों ने यह भी कहा कि आप तो पहले ही यह परीक्षा दे चुकी हैं, कोचिंग की क्या ज़रुरत? लेकिन आज मैं यह स्वीकार करती हूँ कि अगर मैंने कोचिंग नहीं ली होती तो टॉप में आना तो दूर, शायद सफल ही नहीं हो पाती.

योजनाबद्ध होकर पढ़ाई करें
यदि आपको भी इस या ऐसी ही कोई परीक्षा में बैठना है तो कोचिंग जाना और कड़ी मेहनत करना ही काफी नहीं है. उससे बढ़कर आपको पूरी योजना बनकर पढ़ाई करनी चाहिए. इसके लिए आपको हर एक विषय में अध्ययन की रणनीति बनानी होगी. हर विषय के लिए अलग रणनीति होना चाहिए क्योंकि कुछ विषयों में आपकी ख़ास दिलचस्पी हो सकती है, कुछ में नहीं. लेकिन पढ़ाई तो आपको सभी की करना होगी. बोरियत भरे विषयों में भी दिलचस्पी लें. मेरा अनुभव यही है कि जैसे जैसे हम किसी विषय के बारे में जानने लगते हैं, हमारी दिलचस्पी उसमें बढ़ती जाती है.

हताशा से बचें
मुझे दसवीं में आये नंबरों से बड़ी निराशा हुई थी. मुझे रिजल्ट में विशेष योग्यता की आशा थी, लेकिन मैं 74 प्रतिशत ही ला सकी. निराशा के वक्त मेरे माता पिता ने बहुत प्रेरणा दी. मैंने अगले साल नए सिरे से पढ़ाई शुरू की और बारहवीं की परीक्षा में 86 प्रतिशत नंबर लाकर अपना खोया आत्मविश्वास फिर हासिल कर लिया. मैंने कॉलेज में आते ही प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने का मन बना लिया था. मेरी दिलचस्पी मैनेजमेंट और कम्प्यूटर्स के बजाय कानून में ज्यादा थी. साथ ही यह स्कोअर्रिंग विषय भी है. यदि आप परफेक्ट हैं तो अच्छे नंबर पा सकते हैं. यूपीएससी में पहली नाकामी को मैंने यह सोचकर टाल दिया था कि मैंने कॉलेज में लॉ के साथ यह परीक्षा दी थी.

हर विषय पढ़ें
आपकी दिलचस्पी चाहे जिस में हो, पढ़ाई हर विषय की करते रहे. ध्यान रखिये कि केवल कॉलेज या प्रतियोगी परीक्षा के विषय पढ़ना ही काफी नहीं हैं. यह पढ़ाई आपको इंटरव्यू में तो मदद करेगी ही आपको एक बेहतर, मुकम्मल इंसान बनाने का रास्ता भी खोलेगी. आगे जाकर आप पाएंगे कि हर विषय की पढ़ाई से आपने जो भी सीखा है, वह बहुत ही काम का है और तब आपको खुशी होगी.

टाइम किलिंग मशीनों से सावधान
टीवी और फ़िल्में देखना, ड्राइविंग करना, चेटिंग करना, मोबाइल पर गप्पें लड़ाना किसे अच्छा नहीं लगता, लेकिन ये सभी टाइम किलिंग डिवाइसेस हैं. इनका उपयोग सावधानी से और ज़रुरत के हिसाब से ही करें. ये वक्त तो बर्बाद करती ही हैं, हमें अपने लक्ष्य से भी भटका सकती हैं. अगर आप स्मार्ट हैं तो इनका उपयोग अपने लक्ष्य को पाने में सहयोगी उपकरण के तौर पर कर सकते हैं, लेकिन यह आसान नहीं है. इन सब चीजों के लिए तो ज़िंदगी पड़ी है, वक्त के महत्त्व को समझें.

लक्ष्य के लिए समझौता नहीं
अपने लक्ष्य को पाने के लिए कभी भी समझौते न करें. जो लक्ष्य तय किया है उसे न केवल प्राप्त करें बल्कि पूरी तरह से सही रास्ते पर चलकर ही हासिल करें. यह बात बेहद किताबी लगती है, लेकिन कामयाबी का असली मज़ा तभी है जब कि उसे पाने के लिए आपने कोई समझौता नहीं किया हो. मैंने यूपीएससी में पहली बार नाकाम होने पर बैंक की नौकरी को हाँ कह दी और वहां काम भी शुरू कर दिया लेकिन मुझे लगता रहा कि मैं अपने लक्ष्य से भटक गयी हूँ. बैंक की नौकरी में शायद तनाव काम होंगे लेकिन मेरा लक्ष्य प्रशासकीय नौकरी ही था, और मैं यहीं खुश हूँ.

व्यवस्था को बदलो
मुझे देश में फैले भ्रष्टाचार से नफ़रत है और मैं उसे मिटाना चाहती हूँ. अब हर जगह भ्रष्टाचार की बार करने, गलियां देने और कुंठित होने के बजाय भ्रष्टाचार से लड़ने का सही तरीका मुझे यही लगता है कि मैं ऐसी पोजीशन में पहुँच जाऊं, जहाँ मैं भ्रष्टाचार को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकूं. आईएएस अधिकारी के रूप में मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जंग को महत्वपूर्ण मुकाम तक पहुंचा सकूंगी.

प्रकाश हिन्दुस्तानी

हिन्दुस्तान 15 मई 2011

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