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31-July-2011

रविवासरीय हिन्दुस्तान के एडिट पेज पर मेरा कॉलम

इस साल का मैग्सेसे अवार्ड पानेवालों में डॉ हरीश हांडे भी हैं जो सेल्को इण्डिया नामक कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. पेशे से इंजीनियर डॉ हांडे ने आईआईटी से इंजीनियरिंग की डिग्री ली और फिर यूएस के मसाच्चुसेट विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट पायी. लेकिन दूसरे आईआईटी विद्यार्थियों की तरह उन्होंने विदेश में बस जाने की जगह यहीं रहकर कुछ अलग करने की ठानी. उन्होंने सोचा कि इतनी पढ़ाई का क्या मतलब अगर उसका फायदा हमारे अपने लोगों को नहीं मिले. 1995 में उन्होंने सोलर इलेक्ट्रिक लाइट कंपनी (सेल्को) बनाई. और भारत के ही दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में लोगों के घर जगमगाने में जुट गए.

उनकी कंपनी अभी तक करीब सवा लाख लोगों को सौर ऊर्जा से बिजली उपलब्ध करा रहे हैं. सौर ऊर्जा से ही किसान अपने खेतों की सब्जियां और फलों को सुखाकर डिब्बाबंद कर रहे हैं और अपनी आय बढ़ा रहे हैं. उनकी कंपनी की 25 शाखाएं हैं जिनमें करीब दो सौ कर्मचारी काम कर रहे हैं.उनकी परियोजना से सैकड़ों बच्चों को पढ़ाई के वक्त रोशनी मिल पा रही है और बंगलुरु के पास गुलाब की खेती करनेवाले किसानों को अलसुबह अँधेरे में गुलाब एकत्र करने में सुविधा हो रही है क्योंकि सेल्को ने ऐसे सोलर लैम्प बनाये हैं जिन्हें टोप की तरह पहना जा सकता है. डॉ हरीश हांडे ने अपनी सफलता की नयी इबारत लिखी है, उनकी सफलता के कुछ सूत्र :

कारोबार के नए नियम

डॉ हरीश हांडे ने कई लोगों के इस भ्रम को तोड़ दिया जो मानते थे कि सौर ऊर्जा जैसी टेक्नोलाजी आम लोगों के लिए नहीं होती है. उन्होंने इसे भी गलत साबित कर दिया कि आम लोग ऐसी टेक्नोलाजी को मेंटेन नहीं कर सकते. उनकी योजनाओं से जुड़े आम लोग ही उनके काम की असली पहचान बन गए हैं. शहरों और कस्बों से दूर बसे गाँवों में भी लोग उनकी कंपनी की योजनाओं का लाभ ले रहे हैं. सौर ऊर्जा की रोशनी के लिए लगे हजारों रुपये के पैनल्स के लिए साधारण लोग ना केवल भुगतान कर रहे हैं, बल्कि उसके मेंटेनेंस का भी ख्याल रख रहे हैं. उन्होंने इसे समझा कि छोटे से छोटे उपभोक्ता के लिए तीन बातें बहुत मायने रखती हैं : (1) टेक्नॉलॉजी (2) वित्तीय व्यवस्था और (3) बिक्री के बाद की सेवा.

डिग्री अचार डालने के लिए नहीं

डॉ हरीश हांडे ने दुनिया के नामी शिक्षण संस्थानों से डिग्री हासिल की और इस बात को समझा कि ये कोई आचार डालने के लिए नहीं, लोगों की मदद के लिए है. आईआईटी के दिनों में ही उन्होंने तय कर लिया था कि अब वे जो कुछ भी करेंगे उसमें गाँवों के लोगों को फायदा होना ही चाहिए. उन्हें इस बात का अहसास था कि वे भी विदेश जाकर लाखों की नौकरी पा सकते हैं और विलासितापूर्ण जीवन जी सकते हैं, लेकिन उनके ज़मीर ने कहा कि उन्हें कोई सार्थक काम करना है. साधु बनना उनका लक्ष्य नहीं था लेकिन उचित भाव से सेवा करना लक्ष्य ज़रूर रहा.

सामाजिक उपक्रम से मुनाफा

अब तक यही समझा जाता रहा है कि अगर कोई उपक्रम सामाजिक मकसद से शुरू किया जाता है तो उसमें घाटा ही घाटा होता है. उन्होंने लोगों को सोचने पर विवश कर दिया कि ऐसा हर बार हो यह जरूरी नहीं. अगर सोच समझकर काम किया जाए, लोगों को इसमें शामिल किया जाए और वे ऐसे उपक्रमों से लाभान्वित हों तो सामाजिक उपक्रम में भी सभी के लिए लाभ का सौदा हो सकते हैं. इस लाभ में सभी की भागीदारी होगी. सेल्को की सारी योजनायें ही इस तरह से बनाई गई थी कि उसमें पैसा डूबने की गुंजाइश नहीं रहे.

पवित्र उद्देश्य का महत्व

अगर आप कोई भी काम पवित्र उद्देश्य से कर रहे हैं तो पीछे ना हटें, हतोत्साह से बचें, क्योंकि पवित्र उद्देश्य को लेकर काम शुरू करनेवाले लोगों की मदद करने भी लोग आ ही जाते हैं. हरीश हांडे ने जब सेल्को की स्थापन की थी तब उनके पास कोई पूंजी नहीं थी, लेकिन साल भर बाद ऐसा नहीं था. उनकी मदद के लिए विनरॉक इंटरनेशनल नाम की संस्था सामने आयी और उन्हें कुछ शर्तों के साथ 150,000 डॉलर का क़र्ज़ मुहैय्या करा दिया, जिसे सेल्को ने चार साल में ही लौटा दिया. आज उनकी कंपनी में पूंजी लगाने के लिए वैश्विक कम्पनियाँ सौ करोड़ रुपये तक का निवेश करने को तैयार हैं.

नि:शुल्क में भी शुल्क है

डॉ. हरीश हांडे की कंपनी की कई सुविधाएँ नि:शुल्क लगती है, लेकिन ऐसा नहीं है. वे कोई भी सुविधा नि:शुल्क उपलब्ध नहीं करा रहे, बल्कि शुल्क वसूल कर रहे हैं. वे अपने सौर ऊर्जा के ग्राहकों से केवल 25 प्रतिशत शुल्क एडवांस में लेते हैं. कई ग्राहक इतनी राशि देने में भी सक्षम नहीं हैं, उन्हें सरकारी क्षेत्र और ग्रामीण सहकारी बैंकों से कम ब्याज दर पर कर्ज उपलब्ध कराते हैं. सरकारी योजनाओं में उनके ग्राहकों को जो भी सब्सिडी मिलती है,वह उनके उपभोक्ताओं तक पहुँचती है.

बिक्री बाद की सेवा

किसी भी सामान की बिक्री के बाद की सेवा केवल बहुराष्ट्रीय कंपनियों का ही दायित्व नहीं है,डॉ. हरीश हांडे ने इस बात को समझते थे. उन्होंने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आनेवाली इस समस्या का ध्यान रखा कि किस तरह की परेशानियों का सामना ग्राहकों को करना पड़ता है. उन्होंने बिक्री बाद की सेवा के लिए कंपनी में अलग से टीम बनाई और अपने तमाम ग्राहकों से सीधे संपर्क बनकर उन्हें आश्वस्त किया कि वैकल्पिक ऊर्जा अपनाने में उन्हें किसी भी तरह की कोई दिक्कत नहीं होने दी जाएगी.

टेक्नॉलॉजी की ज़रुरत

सेल्को जो काम कर रही है, वही काम देश भर में अनेक संस्थाएं कर रही हैं, लेकिन वे आम जानता का भला नहीं कर रही क्योंकि उनमें से ज़्यादातर भ्रस्टाचार करने के लिए ही बनाई गयी है. सेल्को ने हमेशा इस बात का खयाल रखा कि सौर ऊर्जा केवल बत्ती जलने के लिए नहीं, और भी कई कामों के लिए उपयोग में लाई जा सकती है. उनकी कंपनी सौर ऊर्जा से खाना पकाने, घर को ठंडा रखने, सब्जियों और फलों को सुखाकर स्टोर करने, दो लाख लीटर तक पानी को गरम करने जैसे कामों के लिए ग्राहकों की ज़रुरत के अनुसार उपकरण बनाती और वित्तीय प्रबंधन का कार्य कर रही है

असली कामयाबी का इंतज़ार

डॉ हरीश हांडे को मिले सम्मानों की फेहरिस्त काफी लम्बी है. उन्हें प्रिंस चार्ल्स से लेकर ओबामा तक सम्मानित कर चुके हैं. उन्हें भारत के उन पचास लोगों में गिना गया है जो एक नए भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण रोल निभा रहे हैं, वे अपने कार्य को विकेन्द्रित और ग्राहकोन्मुख बनाने के काम में जुटे हैं. उनका कहना है कि अभी हमें केवल कर्णाटक और गुजरात में ही काम करने का मौका मिला है, हम यह कार्य पूरे देश में फैलाना चहेते हैं. जब हर गाँव में हमारी सेवा पहुँच जाएगी, तभी हम अपने आप को कामयाब पाएंगे.

प्रकाश हिन्दुस्तानी

हिन्दुस्तान 31 july 2011

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