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रविवासरीय हिन्दुस्तान के एडिट पेज 2 अक्तूबर 2011 को प्रकाशित मेरा कॉलम

गांधी जी और गांधीवाद कितना महत्वपूर्ण और शाश्वत है, इसका अंदाज़ इसी बात से लगाया जा सकता है कि गांधीवादी नेल्सन मंडेला आज भी दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित और विश्वसनीय सेलेब्रिटी हैं. दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बननेवाले, नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित नेल्सन मंडेला 93 साल के होने पर भी सार्वजानिक जीवन में सक्रिय हैं.

उनकी मृत्यु की अफवाहों के बीच वे दक्षिण अफ्रीका के बीमार होते कपड़ा उद्योग की दशा सुधारने के लिए अप्पेरल की नयी रेंज ला रहे हैं, वे अपने परपोते के साथ खेलते भी हैं, वे ट्विटर पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं और बार बार यह बात साबित कराते हैं कि गाँधी का रास्ता कितना सहज, जन हितैषी और सर्वोदय का है. दुनिया में शायद ही कोई होगा जो उनकी कार्यक्षमता का लोहा नहीं मानता हो. आखिर वे कौन से सूत्र हैं, जिन्हें अपनाने के बाद उनकी इतनी दुरूह राहें भी उन्हें मंजिल तक ले गयी. नेल्सन मंडेला की सफलता के कुछ सूत्र :

एक नहीं, अनेक मंजिलें

''किसी भी पहाड़ की चोटी पर पहुंचें तो आपको पता चलेगा कि वहां और भी पर्वत शिखर हैं.'' आप केवल एक शिखर को छूकर भी संतुष्ट हो सकते हैं या फिर से किसी और नए शिखर पर पहुँचने का संकल्प कर सकते हैं. अगर आप एक पर चढ़कर ही संतुष्ट हो जाएँ तो इसमें उन शिखरों का क्या दोष? हो सकता है कि नए शिखर पर नयी बातें देखने को मिलें, नयी संतुष्टि का अहसास हो. दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद ख़त्म हुआ यह एक ही मंजिल थी, तरक्की करना, सामाजिक विभेद मिटाना दूसरी मंजिलें हैं. पर्वतों पर चढाने का यह क्रम सदा चलता रहना चाहिए.

दुश्मनों से दोस्ती कारण सीखें

''अगर आप अपने दुश्मनों के साथ शांति चाहते हैं तो उनसे दोस्ती करना सीखें. दोस्ती के बाद वह आपका सहभागी होगा.'' आपका मन बार बार यही कहेगा कि आप सही हैं और आपका दुश्मन गलत है. याद रखिये कि किसी के भी बारे में कोई भी राय बदलना आसान नहीं होता, लेकिन यह कोई असंभव भी नहीं होता. इससे जूझने का मन्त्र यही है आप अपने विचारों और भावनाओं को बहुत ज्यादा गंभीरता से लेना बंद कर दें. सोचें कि आपका दुश्मन भी किसी मुद्दे पर सही हो सकता है. इसी से बातचीत का रास्ता खुलता है. इसके बाद आपका काम आसान हो जाता है.

गिर जाओ तो जल्द संभलो

''गिरना हार नहीं है, हार तब है जब कोई गिरकर उठे ही नहीं''. जब भी आप पर्वतारोहन करते हैं तब बार बार लगता है कि आप अब गिरे, तब गिरे और खेल ख़त्म! सभी जानते हैं कि यह खेल तब तक चलता है जब तक कि कोई भी गिरकर उठे ही नहीं. गिरने लगो तो तत्काल संभाल जाओ; कैसे भी हालात हो, गिरे हुए ही मत पड़े रहे. जब भी कोई पहाड़ पर चढाने का मन बनाता है, तब यह थोड़े ही तय होता है कि उसने शिखर को छू लिया. याद रखो, दूर से तो पहाड़ बड़ा नज़र आता है और चढ़ाई भी बड़ी नज़र आती है, लेकिन छोटे छोटे कदमों से ही हम धीरे धीरे बड़ी दूरी तय कर लेते हैं. इसीलिये गिरने से न डरो, इस डर से सफ़र करने में कोई भलाई नहीं है.

मंजिल पर नज़र हो

''अगर पानी को उबालना हो तो लगातार आंच जलाये रखनी पड़ती है.'' ऐसा होता है क्या कि पानी गुनगुना हो और आप आच बंद कर दें, फिर भी पानी उबलने लगे. कभी कभी सुस्ताते हुए रूककर पीछे देखना अच्छा लगता है, लेकिन यह खतरनाक है, क्योंकि इसी से गति मंद पड़ जाती है. बार बार मुड़कर देखने की आदत और रुकना ठीक नहीं. थोड़ी सी कामयाबी पर क्या रुकना, जब लक्ष्य दूर हो.आप जितना भी वक्त रुकने में लगायेंगे, मंजिल उतनी ही देर से पायेंगे. बेहतर है कि पड़ाव पर रुक कर वक्त गंवाने के, मंजिल पर जाकर ही रुकें. इसी बात को शायर बशीर बद्र ने यों कहा है -- जब से चला हूँ मैं, मेरी मंजिल पे नज़र है, आँखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा.

सचमुच बहादुर बनो

''बहादुरी भय की गैर मौजूदगी नहीं, भय पर विजय का नाम है.'' एक छोटा बच्चा जो सांप के ज़हर से अनजान हो, हाथों से सांप को पकड़ सकता है, लेकिन वह बहादुर नहीं कहा जा सकता. बहादुर वह है जो इस भय से दूर है कि सांप ज़हरीला हो सकता है और फिर भी सांप को पकड़ ले, जिसे सांप से भय न लगता हो. जब सांप पकड़ने का मौका आता है तब आपके साथी इसलिए भी डरते हैं कि कहीं उन्हें आपकी मदद न करनी पड़ जाए. वे आपकी मदद नहीं करना चाहते, इसलिए आपको डराते हैं. बहादुरी दिखाने के लिए हमेशा तैयार रहो,लेकिन अपनी सुरक्षा और संरक्षा को ध्यान में रखकर. और हाँ, हमेशा जिज्ञासु बने रहो, ताकि नयी नयी बातें पता चलती रहेँ.

धीरज कभी भी मत खोओ

''सम्पूर्ण होने से पहले हर काम असंभव लगता है.'' जब काम ख़त्म हो जाता है, तब पता चलता है कि हमने वह कर डाला, जिसे हम खुद कभी असंभव मानते थे. मैंने कई जेल यात्राएं कीं हैं. जब मैं रोब्बेन द्वीप की जेल में था , तब वे बहुत कठिन दिन थे. २३ घंटे सीलन भरी छोटी सी कोठरी में पड़ा रहना होता था, जहाँ केवल एक बल्ब की रोशनी थी. वक्त का कोई अंदाज़ नहीं होता था. खाने के नाम पर जो कुछ मिलता था, उसे खाना नहीं कहा जा सकता था. अखबार देखे बरसों बीत जाते, चिट्ठी छह महीने में एक आ सकती थी, उसे ऐसे सेंसर किया जाता था कि पढ़ पाना मुश्किल था. मुलाकातें महीनों में हो पाती. कैदी भी बातचीत नहीं कर सकते थे. ऐसे में अपने आप को बचाए रखन ही बड़ी उपलब्धि लगती थी. उस दौर में भी मैंने और मेरे कुछ साथी कैदियों ने धीरज नहीं खोया था.

हमेशा शिक्षा लेते रहो

''दुनिया को बदलने का सबसे बड़ा हथियार है शिक्षा.'' हमेशा ही शिक्षा के प्रति आग्रही रहो. सारी की सारी शक्ति शिक्षा में छुपी है. शिक्षा ही किसी को हौसला और ताकत दे सकती है. शिक्षा आपको नवाचार की तरफ ले जा सकती है, शिक्षा आपके भीतर छुपा डर दूर कर सकती है, इसलिए खूब किताबे पढ़ो, तरह तरह की किताबें, देखो तो कि दुनिया में कितना कुछ बदलाव हो रहा है. इसी से आप को बातों के समझने की, अच्छे-बुरे की, खतरों और संभावनों की जानकारी मिलेगी.आगे बढ़ने के रास्ते और नए नए तौर तरीकों को जानो. इससे भीतर का डर भी ख़त्म होगा.

पीछे रहकर नेतृत्व करो

''पीछे रहकर भी नेतृत्व करो, लोगों को आगे रहने दो.'' इससे कई लोगों को यह भ्रम होने लगेगा कि नेतृत्व वे ही कर रहे हैं लेकिन यही असली नेतृत्व है कि आप अदृश्य हों और नेतृत्व भी आप ही का हो. किसी भी आन्दोलन में जब तब बहुत बड़ी संख्या में लोग न जुड़े हों, आन्दोलन सफल नहीं हो सकता. याद रखो कि हर व्यक्ति श्रेय लेना चाहता है. अपने श्रेय को दूसरों के साथ बांटो. दूसरों को आगे आगे झंडा लेकर चलने दो, वे भी आपके हमसफ़र हैं. जितना बड़ा लक्ष्य होगा , उसमें शामिल होनेवाले लोगों के संख्या भी उतनी ही होगी. बहुत बड़ा बदलाव लोग ही कर सकते हैं अकेले आप नहीं.

तत्काल करने की आदत

''सही वक्त का इंतजार मत करो, वह कभी भी नहीं आएगा.'' हालात देखकर यह मत सोचो कि जब वे सुधरेंगे, तब आप काम करेंगे. हालात अपने आप कभी भी नहीं सुधरेंगे. इस मुगालते में कभी भी मत रहो कि आप कुछ समय रुकने के बाद कुछ ऐसा काम करेंगे, जो अद्भुत होगा. वह समय कभी भी नहीं आएगा और आप वह काम कभी नहीं कर पायेंगे. आपको जो भी काम करना है, तत्काल शरू कर दो और उसे पूरा करने के बाद ही दम लो. कोई भी रास्ता आसान रास्ता नहीं है. याद रखो, कोई भी काम के वक्त आपकी मौजूदगी महत्वपूर्ण होती है और आप की मुस्कराहट भी. खुद मौजूद रहो और तत्काल कर डालो.

प्रकाश हिन्दुस्तानी

( 2 अक्तूबर 2011 को प्रकाशित )

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