
कुछ दिनों से प्रधानमंत्री फेसबुक पर अपनी सरकार की उपलब्धियों के ही किस्से बखान कर रहे हैं। उनके ट्विटर अकाउंट पर भी उपलब्धियों का प्रचार है। नरेन्द्र मोदी के ऑफिशियल एप में भी मोदी सरकार की उपलब्धियों का जिक्र बार-बार अलग-अलग तरीके से आ रहा है। मोदी के इन पोस्ट और ट्वीट को मंत्रीमंडल के साथी और पार्टी के सहयोगी वायरल बनाते जा रहे हैं। मोदी सरकार के अलावा कहीं कुछ और नहीं नजर आ रहा।ट्विटर पर दो साल की उपलब्धियों का थीम सांग रिलीज करके नरेन्द्र मोदी ने इसकी शुरूआत कर दी थी। काफी समय के बाद ट्विटर पर प्रधानमंत्री ने अपने सहयोगी मंत्रियों के साथ कवर फोटो शेयर किया है।
मास मीडिया हो या सोशल मीडिया, मोदी सरकार के 2 साल हर जगह चर्चा में है। विज्ञापन, टीवी के कार्यक्रम, प्रायोजित फीचर्स, सोशल मीडिया पर स्पांसर्ड खबरें और विचार, रेडियो पर विशेष कार्यक्रम और होर्डिंग्स के साथ-साथ हर जगह केवल मोदी सरकार की ही चर्चा है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस सरकार ने विज्ञापनों के लिए वे जगहें चुनी हैं, जिनके बारे में पहले किसी ने सोचा नहीं था। बैंक के एटीएम में जाइए, तो एटीएम के स्क्रीन पर मोदी सरकार नजर आती है। र्इंधन भराने जाएं, तो पेट्रोल पंप पर होर्डिंग्स में मोदी सरकार की उपलब्धियां नजर आती है। फिल्म देखने जाएं, तो फिल्म के पहले मोदी सरकार के कामों का बखान। केवल दृष्टिहीन और श्रवणबाधित लोग ही मोदी सरकार की उपलब्धियों से अछूते होंगे।
अपनी उपलब्धियों के बखान में मोदी सरकार अव्वल है। उनकी देखादेखी अब अरविन्द केजरीवाल, अखिलेश यादव, ममता बेनर्जी और यहां तक कि वामपंथी भी कर रहे हैं। मोदी सरकार के मंत्री अपने-अपने विभागों का ब्यौरा देते हुए सिलसिलेवार टीवी पर इंटरव्यू दे रहे है। जिन मंत्रियों के पास टीवी चैनल वालों से बात करने की फुर्सत नहीं थी, वे टीवी स्टुडियो में बैठकर उपलब्धियां गिनवा रहे हैं। फेसबुक और ट्विटर पर उपलब्धियों भरे पोस्ट भेज रहे हैं। तरह-तरह के ग्राफिक्स और थ्री डी इमेज वाले विज्ञापनों की भरमार है। इसके साथ ही जिन राज्यों में बीजेपी की सरकार है और जहां स्थानीय निकायों पर बीजेपी का कब्जा है, वहां भी दो साल की उपलब्धियों के बखान की होड़ लगी है।

यह सब अनायास नहीं है। इतने सुविचारित तंत्र से यह काम चल रहा है कि कोई भी उससे अछूता नहीं रह सकता। मोदी सरकार की विभागवार उपलब्धियां, मोदी की विदेश यात्राओं की उपलब्धियां, मोदी के 10 महत्वपूर्ण भाषण, आम आदमी को मिलने वाले राहत के किस्से यहीं सब चल रहा है मीडिया में। वर्षगांठ बनाने के मौके तीन साल तक और मिलेंगे और फिर चुनाव होगा। लक्ष्य है कि हर साल उपलब्धियों का बखान करके अभी से चुनाव की रणभेरी बजा दी जाए।
उत्तरप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी इसमें शामिल है। 45 केन्द्रीय मंत्रियों से कहा गया है कि वे उत्तरप्रदेश में मोर्चा संभाल लें। अखबारों में इन सभी मंत्रियों की यात्राओं के विवरण छपेंगे और टीवी चैनलों पर इनके भाषण प्रसारित होंगे। लेकिन रुकिये, यह वह चुनावी रणनीति है, जो मीडिया और आम लोगों को भरमाने के लिए है। मोदी सरकार की असली चुनावी रणनीति तो वह है, जो प्रचार से दूर बंद कमरों में तैयार हो रही है। इस रणनीति में राम मंदिर का निर्माण और हिन्दू वोटों का केन्द्रीकरण प्रमुख है। इसके अलावा गंगा एक प्रमुख मुद्दा रहेगा।
मोदी सरकार यह जानती है कि लोग किन बातों से प्रभावित होते हैं और तारीफ करते हैं। यह जरूरी नहीं कि लोग जिन बातों से प्रभावित होेंं, वे वोट भी दिलवाएं। इसलिए चुनावी रणभूमि के लिए हर तरह के हथियार बनाए और तराशे जा रहे है। बीजेपी के रणनीतिकार जानते हैं कि चुनाव की राजनीति, चुनाव की राजनीति ही होती है। टीवी, अखबार, होर्डिंग्स और सिनेमा के परदे पर जो कुछ दिखाया जाना है, वह विरोधियों को गफलत में डालने के लिए है। सरकारें पार्टी को मिले वोटों के प्रतिशत से नहीं बनती, उम्मीदवारों के जीतने से बनती है।
इसके विपरीत कांग्रेस की निराशा लोगों को दिखाई दे रही है। कांग्रेस के पास आलोचना में ‘दो साल बुरा हाल’ का नारा देने के अलावा कोई खास मुद्दा नहीं है। मोदी के प्रचार तंत्र की तुलना वे नाजियों के प्रचार तंत्र से कर रहे हैं। गरीबों और किसानों की उपेक्षा की बात करने वाली कांग्रेस इस मुद्दे को राजनैतिक रूप से भुनाने की तैयारी में भी नहीं दिखती।
बीजेपी ने उसका भी तोड़ निकाल लिया है और सोशल मीडिया पर अपनी आक्रामकता दिखाना शुरू कर दिया है। ‘मेरा देश बदल रहा है’, ‘विकास की क्रांति आ रही है’, ‘विश्व में भारत की पताका फहर रही हैं’, ‘केन्द्र ने किया नए भारत और श्रेष्ठ भारत का निर्माण’ जैसे नारों की भरमार है। सोशल मीडिया भी यहां मोदीमय नजर आ रहा है।
28 may 2016