
फिल्म प्रमाणन बोर्ड का काम सर्टिफिकेट देना हैं सेंसर करना नहीं; यूनिवर्सिटीज़ का काम डिग्री देना है, शिक्षा देना नहीं; और न्यायपालिका का काम फ़ैसला देना है, न्याय नहीं. ...जो बात बड़े बड़े संपादक नहीं लिख पाते; जो बातें महानतम चिंतक जानबूझकर लिखना नहीं चाहते, वे बातें सोशल मीडिया पर आम नागरिक लिख जाते हैं. उड़ता पंजाब में बात बात पर मादर(बीप)-बहन(बीप) डॉयलॉग हैं और सिखाया गया है कि कौन सा नशा कैसे, किसके साथ लेना है तो यह अभिव्यक्ति की आज़ादी है और किसी महिला को 'बंजर ज़मीन' कहना, सिख व्यक्ति को निजी अंगों को खुजाते हुए दिखाना भी. फिल्म उड़ता पंजाब को लेकर पहलाज निहलानी को इतना बतंगड़ बनाने की क्या ज़रूरत थी?.....सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर ज़्यादा सार्थक चर्चा हो रही है.
उड़ता पंजाब फिल्म आगामी शुक्रवार (17 जून) को रिलीज होने वाली है। क्या उड़ता पंजाब पर खड़ा किया गया विवाद अवार्ड वापसी अभियान का पार्ट 2 है? सोशल मीडिया इस तरह की बातें लगातार आ रही हैं। इस फिल्म के बहाने सत्ता के समर्थक और विरोधी अलग-अलग मंच बना चुुके हैं। फिल्म से आगे बढ़कर अब निजी आरोप-प्रत्यारोप तक बात पहुंच गई है। सभ्य शब्दों में एक-दूसरे के खिलाफ गालियां देने का क्रम जारी है। रिलीज के पहले ही यह फिल्म सोशल मीडिया पर अच्छी खासी चर्चित हो गई। रिलीज के दस दिन पहले ट्विटर के टॉप ट्रेंड में उड़ता पंजाब शामिल है। कारण यह है कि फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने इस फिल्म के करीब 40 दृश्यों पर आपत्ति की है। खबरें इस तरह की भी है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस फिल्म से पंजाब नाम को हटाने की सलाह दी गई थी। यह फिल्म पंजाब के युवाओं में बढ़ते नशे की आदतों पर बनाई गई है। फिल्म में शाहिद कपूर, करीना कपूर, आलिया भट्ट आदि प्रमुख है।
फिल्म प्रमाणन बोर्ड की आपत्ति पर फिल्म के निर्देशक महेश भट्ट ने ट्वीट किया कि सेंसरशिप डर की औलाद और अज्ञानता का बाप है। क्या पहलाज निहलानी इस बात को सुन रहे हैं? अनेक फिल्म निर्माताओं ने महेश भट्ट के समर्थन में ट्वीट किए हैं। रामगोपाल वर्मा ने लिखा कि उड़ता पंजाब शीर्षक अगर छोटा लगे, तो ‘उड़ता इंडिया और उड़ता वल्र्ड’ लिखा जा सकता है।
इस फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह के कार्टून और चुटकुले चल पड़े हैं। किसी ने लिखा है कि उड़ता पंजाब एकदम गलत शीर्षक है, सही शीर्षक होना चाहिए उड़ता मोदी। मोदी के अलावा और कौन इतना उड़ सकता है? देश बदल रहा है नारे से भी इस फिल्म को जोड़कर लतीफे बनाए जा रहे है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विदेश यात्राओं पर बने कार्टून में दावा किया गया कि हां, देश बदल रहा है। परसों अफगानिस्तान था, कल कतर था और आज स्विटजरलैंड है। हो गया उड़ता पंजाब। मथुरा के आश्रम में मिले विदेशी रॉकेट और हथियारों पर सरकार चुप है, लेकिन हो-हल्ला मच रहा है उड़ता पंजाब पर।

उड़ता पंजाब के बहाने अरविन्द केजरीवाल पर भी ताने कसने वालों की कतार लम्बी है। लिखा गया कि उड़ता पंजाब की तरह ही केजरी संग मरती दिल्ली जैसी फिल्में भी बनना चाहिए। अरविन्द केजरीवाल की टिप्पणियों पर भी लोगों ने ताने कसे है और लिखा है कि वह केजरीवाल जी ने तो रिलीज के पहले ही बता दिया कि यह फिल्म कैसी है। एक पत्रकार ने लिखा फिल्मों के नाम ऐसे होना चाहिए- उड़ता पंजाब, बैठता केरल, लुढ़कता बिहार, गिरता यूपी, लुटता एमपी, भागता भ्रष्टाचार, बिखरती कांग्रेस, निखरते मोदी, उभरता भारत खुशहाल आदि। कई लोगों को लगता है कि उड़ता पंजाब फिल्म पर राजनीति हावी है। यह फिल्म पंजाब के चुनावों को प्रभावित कर सकती है। अगर इस फिल्म का उद्देश्य किसी पार्टी का विरोध करना नहीं है और यह फिल्म सामाजिक उद्देश्यों को लेकर बनी है, तो इसका नाम उड़ता यूथ किया जा सकता है।
कई लोगों का मानना है कि पंजाब वास्तव में नशे का आदि हो चुका है। अगर आप पंजाब के किसी भी शहर या गांव में जाए, तो रात को आठ बजे के बाद वह सचमुच उड़ता हुआ ही नजर आएगा। यह भी कहा जा रहा है कि अगर इस फिल्म पर रोक लगा दी गई, तो पंजाब की एक गंभीर समस्या को दिखाने से रोकना होगा। अगर लोग इस समस्या को समझेंगे, तो ही इस पर नियंत्रण पाना आसान होगा। इसलिए सेंसर बोर्ड को उड़ते पंजाब के पंख नहीं काटने चाहिए। एक टिप्पणी यह भी की गई कि उड़ता पंजाब तर्कपूर्ण नहीं लगता, अगर फिल्म का नाम उड़ता बादल होता, तो आसानी से समझा जा सकता। ऐसे लोग भी है, जो मानते हैं कि फिल्म में कुछ भी दिखाया जाए, उसे प्रदर्शन से नहीं रोका जाना चाहिए। आखिर यह मामला हमारी अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़ा है।
शाहिद कपूर, आलिया भट्ट और करीना कपूर खान के प्रशंसकों ने भी सोशल मीडिया पर खुलकर अपनी बातें कही हैं। कलाकारों के प्रशंसकों का मानना है कि इस फिल्म में सभी मंजे हुए कलाकार है और महेश भट्ट जैसे अनुभवी निर्देशक ने यह फिल्म निदेर्शित की है, इसलिए इस फिल्म के सफल और उद्देश्यपूर्ण होने में कोई शक नहीं है। करीना कपूर ने जहां एक डॉक्टर की भूमिका की है, वहीं शाहिद कपूर ने पंजाब के एक नशे के आदी युवक का रोल निभाया है। जो भी हो, फिल्म प्रमाणन बोर्ड की आपत्तियों के बाद इस फिल्म को करोड़ों रुपए की पब्लिसिटी तो मिल ही गई।

11 June 2016