
प्राइवेट सेक्टर के एक प्रमुख बैंक इंडसइंड ने खाताधारकों की पासवर्ड से मुक्ति की शुरुआत जोर-शोर से की है। सोशल मीडिया पर बैंक ने इसे प्रचारित करने के लिए बड़ी राशि खर्च की। #RIPpassword नामक हैशटैग से बैंक ने इसे प्रचारित किया। इसके प्रचार में अपने स्टाफ, ग्राहकों और पीआर एजेंसी के साथ ही अनेक वीडियो भी सोशल मीडिया पर अपलोड किए। इन वीडियो में फरहान अख्तर को दिखाया गया है। बैंक ने अपने प्रचार के लिए एकदम नए तरीके का उपयोग किया है और बड़ी संख्या में बैंक के खाताधारकों ने उन्हें पसंद किया है।
टीवी पर अमिताभ बच्चन का एक विज्ञापन आता है, जिसमें वे कांटेक्ट्स की बात करते हुए कहते हैं कि हर चीज कांटेक्ट्स से ही संभव है। ऐसी ही बात पासवर्ड के बारे में कहीं जा सकती है। मोबाइल, कम्प्यूटर, लैपटॉप, ई-मेल, बैंक अकाउंट, ब्लॉग हर जगह पासवर्ड की जरूरत होती है। कुछ आधुनिकतम कारें भी केवल पासवर्ड पर ही स्टार्ट होती हैं। ऐसे में पासवर्ड याद रखना बेहद मुश्किल काम होता है। एक आम नागरिक पासवर्ड याद रखे भी तो कितने? समान पासवर्ड होने से पासवर्ड हैक होना आसान होता है।
आमतौर पर पासवर्ड सेट करने के लिए भी सुरक्षा संबंधी सवाल बड़े ही रटे-रटाए होते है। जैसे आपके मां/पिता/दादा/दादी/बेटा/बेटी आदि का नाम क्या है? आपका जन्म कहां हुआ? आपके कुत्ते का नाम क्या है? आपके पहले स्कूल का नाम क्या है? आपका प्रिय स्थान कौन सा है? आपका प्रिय कलाकार कौन है? ऐसे ही परंपरागत सवाल सुरक्षा संबंधी पासवर्ड के लिए पूछे जाते हैं। साइबर सुरक्षा सेल के अधिकारियों के अनुसार इन पासवर्ड का जवाब खोजना बहुत कठिन नहीं है। ऐसे में अगर सवाल का जवाब अजीबो-गरीब हो, तो हैकिंग कठिन हो जाएगी। जैसे अगर मां का नाम पूछा जाए और जवाब देना वाला लिख दें ऊसल पोहा, तो हैकर के लिए यह चुनौती हो सकती है, क्योंकि ऊसल पोहा किसी महिला का नाम नहीं हो सकता।
पासवर्ड के बारे में अध्ययन करने पर पता चला कि लगातार कई साल से 123456 सबसे ज्यादा उपयोग में लाया जाने वाला पासवर्ड है। कई लोग एक से पांच तक या एक से आठ तक के अंक भी लिख देते है। कई लोग पासवर्ड का पासवर्ड ‘पासवर्ड’ ही लिख देते हैं। कई लोग जवाब में वेलकम लिख देते है, कई लोग लॉगइन लिख देते हैं और एबीसी123 भी लिखने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है।
जहां अंकों में पासवर्ड लिखना होते है, जैसा कि आमतौर पर बैंकों के एटीएम या नेट बैंकिंग में उसकी जरूरत होती है, तब अधिकांश लोग 1234 या 1111 जैसे अंक इस्तेमाल करते हैं। कई लोग अपना मकान नंबर या गाड़ी का नंबर पासवर्ड के रूप में इस्तेमाल करते हैं, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से यह भी अच्छा नहीं माना जाता। कई लोग टेलीफोन या मोबाइल के शुरू या अंंत के चार अक्षर पासवर्ड के रूप में नियत रख देते हैं। इसका पता लगाना भी बहुत कठिन नहीं है। ऑनलाइन बैंकिंग या एटीएम से ऐसे नंबरों का उपयोग करके पैसा निकालने की बहुत सी वारदातें हुई है।
अपने ग्राहकों को पासवर्ड याद रखने के तनाव से मुक्ति दिलाने के लिए बैंक ने नए सुरक्षित उपाय खोजे हैं। इन उपायों को बैंक के ग्राहकों ने पसंद किया है। ट्विटर पर बैंक के ग्राहकों ने खुश होकर लिखा है कि अब पासवर्ड गया तेल लेने। कई लोगों ने इस पर यह कहकर खुशी जताई कि अब पासवर्ड भूलने की बीमारी नहीं रहेगी, क्योंकि पासवर्ड ही नहीं रहेगा। एक ग्राहक ने लिखा- हैप्पी विथ पासवर्ड पासिंग अवे। दर्जनों लोगों ने पासवर्ड से जुड़े अपने संस्मरण भी शेयर किए है। कुछ ग्राहकों ने लिखा कि बैंक वाले जब भी पासवर्ड पूछते थे, तब एक तरह से बेइज्जती का एहसास होता था कि बैंक में इतने पैसे रखने के बाद भी पासवर्ड याद रखो। और भी बुरा लगता था, जब बताया जाता था कि आपने जो पासवर्ड एंटर किया है, वह सही नहीं है। पासवर्ड याद रखने के लिए भी कितने जतन करने पड़ते थे, क्योंकि कोई अक्षर केपिटल में होता था, कोई अंक शुरू या अंत में लिखना पड़ता था। एक ग्राहक ने ट्वीट किया कि कितना अच्छा हो अगर दूसरी जगहों से भी पासवर्ड से मुक्ति मिल जाए। बायोमेट्रिक्स प्रणाली पासवर्ड से मुक्ति का एक तरीका है, लेकिन हर जगह उसका इस्तेमाल नहीं हो सकता।
