
सड़क परिवहन और हाइवे मंत्रालय ने बहुचर्चित डिजिलॉकर योजना अपना ली है। अब आपको अपना ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन का रजिस्ट्रेशन कार्ड भौतिक रूप से साथ लेकर चलने की जरूरत नहीं। आप उसे डिजिलॉकर में सेव कर सकते है और जहां भी जरूरत हो अपने स्मार्ट फोन से उसे दिखाकर काम चला सकते है। इससे वाहन चालकों की एक परेशानी कम हो जाएगी, क्योंकि भौतिक रूप से ड्राइविंग लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन कार्ड रखने पर उसकी सुरक्षा की चिंता रहती है। बाजार में डिजिलॉकर एप का आधिकारिक वर्जन आ चुका है, लेकिन उसकी नकल के दर्जनों एप भी उपलब्ध हैं। ये डुप्लीकेट एप काम तो लगभग वैसा ही करते है, जैसा कि डिजिलॉकर करता है, लेकिन नकली एप में सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है। ये नकली एप आपकी निजी और गोपनीय जानकारी को भी सार्वजनिक कर सकते हैं।
केन्द्र सरकार की डिजिटल लॉकर योजना फरवरी 2015 में शुरू हुई थी। इस परियोजना के अंतर्गत सरकारी वेबसाइट पर नागरिकों के लिए एक निश्चित स्पेस उपलब्ध कराया गया। नागरिकों से अपेक्षा थी कि वे इस वेबसाइट पर अपने तमाम जरूरी दस्तावेज अपलोड कर सकते है और जहां उसकी जरूरत पड़े, उसका उपयोग कर सकते है। अगर भौतिक रूप से दस्तावेज की जरूरत है, तो उसका प्रिंट निकाला जा सकता है, वरना डिजिटल फार्मेट में ही दस्तावेज को सेव या शेयर किया जा सकता है। यह प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया प्रोग्राम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। डिजिलॉकर के उपयोग से दस्तावेजों में धोखाधड़ी मुश्किल हो जाएगी और एक नागरिक के तमाम जरूरी दस्तावेज एक ही जगह उपलब्ध होंगे।
गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध नकली डिजिलॉकर भारत सरकार के अधिकृत एप नहीं होने से लोगों की निजी सूचनाओं के चोरी होने और दुरुपयोग की आशंका बनी हुई है, लेकिन ऐसा नहीं है कि सरकार इस तरफ आंखें बंद किए हुए है। नकली एप के खिलाफ इनफर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी विभाग कड़ा रुख अपनाए हुए है और साथ ही लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है कि वे अपने दस्तावेज सह एप पर ही अपलोड करें।
भारत सरकार की पहल पर गूगल ने इस तरह के नकली डिजिलॉकर एप को खोजने का काम शुरू कर दिया है और गूगल बाउंसर नामक एक एप की मदद से नकली डिजिलॉकर एप को बेकार करने की कोशिश भी की जा रही है। भारत सरकार का ध्यान अब इस ओर भी गया है कि जितनी स्वच्छंदता से लोग नए-नए एप बना रहे है और उसे जारी कर रहे है, वह भी हमारे डिजिटल इंडिया प्रोग्राम में सुविधा के बजाए, असुविधा का सबब बन सकता है।
वर्तमान में डिजिलॉकर केवल एंड्रायड उपभोक्ताओं के लिए ही उपलब्ध है। लाखों की संख्या में लोग इसे डाउनलोड कर चुके है और 7 सितंबर से लेकर अब तक औसतन दस लाख लोग इसे रोज डाउनलोड कर रहे है।

डिजिलॉकर के लिए अधिकृत सरकारी वेबसाइट पर जाकर अकाउंट बनाने की प्रक्रिया आसान है और दिलचस्प बात यह है कि आप इसे अपने आधार कार्ड से भी जोड़ सकते है। डिजिलॉकर में अलग-अलग फोल्डर है, जिसमें आप अपने तमाम प्रमाणपत्र, अंकसूचियां, डिग्रियां, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज आदि सुरक्षित रूप से रख सकते है।जब भी आपको उसकी जरूरत हो, आप उसे कहीं से भी देख सकते है या प्रिंट निकाल सकते है। कुछ लोग अपने डेबिट और क्रेडिट कार्ड को भी डिजिलॉकर में सेव कर रहे है। उनके लिए यही सलाह है कि वे इस तरह की जानकारी डिजिलॉकर में न रखे।
भविष्य में सरकार की योजना यह है कि डिजिलॉकर में लोगों की तमाम व्यक्तिगत जानकारियां भी उपलब्ध हो जाएंगी। मसलन अगर किसी व्यक्ति ने कोई अपराध किया है, तो उसकी एफआईआर में आधार कार्ड नंबर भी लिखा जाएगा और वह भी डिजिलॉकर पर उपलब्ध होगा। इस तरह पूरे देश को लोगों के बारे में कहीं भी, कोई भी जानकारी प्राप्त करना सरकारी एजेंसियों के लिए आसान हो जाएगा। डिजिलॉकर में जाकर व्यक्ति का आधार कार्ड, पेन कार्ड, बैंक खातों की जानकारी, आयकर खातों की जानकारी, आपराधिक पृष्ठभूमि, शैक्षणिक योग्यता, संपत्ति के बारे में जानकारी आदि सूचनाएं तत्काल प्राप्त की जा सकेंगी।