
सोशल मीडिया पर करीब दो बरसों से एक नया सितारा हिन्दी की बातें कर रहा है। वह न केवल हिन्दी में लिखता है, बल्कि हिन्दी, भोजपुरी, मैथिली, नेपाली और संस्कृत में बात भी करता है। अंग्रेजी में तो वह बात करता ही है, क्योंकि वह ऑस्ट्रेलिया का रहने वाला है और वहीं के एक विश्वविद्यालय में हिन्दी पढ़ाता है। यह शख्स मैला आंचल के लेखक फणीश्वर नाथ रेणु पर पीएच-डी कर चुका है और रेणु पर ही किताब भी लिख रहा है। दिखने में वह अंग्रेजों जैसा है, लेकिन है पूरा भारतीय। गत हिन्दी दिवस पर इस शख्स को दिल्ली में सम्मानित भी किया जाना था, लेकिन वे यह सम्मान लेने उपस्थित नहीं हो सके।

वुलफर्ड उन लोगों के लिए चुनौती है, जो यह कहते है कि भारत में रहना हो तो अंग्रेजी के बिना काम नहीं चलता। ब्रिटेन में जन्मे और ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले वुलफर्ड कहते है कि मुझे तभी ज्यादा अंग्रेजी बोलनी होती है, जब मैं भारत के किसी महानगर में रहता हूं। ऑस्ट्रेलिया के ला ट्रोबे विश्वविद्यालय में हिन्दी पढ़ाने के पहले वे कार्नेल और सिराक्यूस विश्वविद्यालय में भी हिन्दी पढ़ा चुके हैं। पिछले बिहार के चुनाव पर उनकी खासी निगाह थी और वे उस चुनाव को किसी विदेशी नजरिये से नहीं, बल्कि बिहार के लोगों के नजरिये से देख रहे थे। उनके अनेक दोस्त बिहार में है और वे अलग-अलग पार्टियों में भी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हिन्दी में शपथ लेना और आमतौर पर एशियाई देशों के नेताओं से हिन्दी में बात करना पसंद करते है। इससे वुलफर्ड को लगता है कि हिन्दी का भविष्य अच्छा है और हिन्दी एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय भाषा है। भूटान की संसद में प्रधानमंत्री मोदी ने हिन्दी में संबोधित किया था, यह बात भी वुलफर्ड को पसंद आई।
इयॉन वुलफर्ड हिन्दी के अध्यापन और लेखन के अलावा संगीत में भी रूचि रखते है। उन्हें यायावर की जिंदगी पसंद है और पूरी दुनिया में घूमना उन्हें सुहाता है। हिन्दी से उनका अनुराग बचपन से ही रहा है। उनकी मां एक संगीत शोधकर्ता रही हैं, जो भारतीय संगीत का अध्ययन करने के लिए भारत भी आई थीं। अपनी मां के साथ वुलफर्ड त्रिनिदाद भी गए। वहां हिन्दी से उनका परिचय सबसे पहले हुआ था। त्रिनिदाद में बड़ी संख्या में भारतवंशी लोग रहते है। उनका कहना है कि अभी कई देशों में सरकारी स्तर पर भी हिन्दी का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

वुलफर्ड फणीश्वर नाथ रेणु के पूर्णिया जिले के गांव ओराही हिंगाना जाकर भी काफी वक्त बिता चुके है। फणीश्वर नाथ रेणु के परिवार से भी उनका जीवंत संपर्क बना हुआ है। सोशल मीडिया पर वुलफर्ड हिन्दी साहित्य से जुड़ी जानकारियां लगातार साझा करते रहते हैं। यू-ट्यूब पर उनके अनेक वीडियो उपलब्ध है। फेसबुक और ट्विटर पर उनकी समसामयिक पोस्ट लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करती रहती है। क्रिकेट के मैदान में वे हिन्दी में जय हिन्द लिखा हुआ पोस्टर लेकर चले जाते है और भीड़ उन्हें देखने लगती है।

हिन्दी के अलावा अंग्रेजी के अखबारों में भी इयॉन वुलफर्ड के बारे में लेख और समाचार प्रकाशित होते रहते है। अपने ट्विटर अकाउंट पर उन्होंने लिखा है- ‘‘फणीश्वर नाथ रेणु पर किताब लिख रहा हूं।’’ वे पांच सौ से अधिक लोगों को ट्विटर पर फॉलो करते है, लेकिन 17 हजार से भी ज्यादा लोग उन्हें फॉलो कर रहे है। उन्हें फॉलो करने वालों में हिन्दी के कई प्रसिद्ध लेखक और कवि, पत्रकार, नेता और नौकरशाह तक शामिल है। उनके ट्वीट आमतौर पर हिन्दी में होते है और हिन्दी साहित्य को लेकर ही होते है। दुष्यंत कुमार, केदारनाथ सिंह, रामधारी सिंह दिनकर, फणीश्वर नाथ रेणु, कुमार विश्वास आदि कई साहित्यकारों की पंक्तियां वे ट्विटर पर शेयर करते है। इसके अलावा वे अपने विश्वविद्यालय की गतिविधियां भी सोशल मीडिया पर शेयर करते रहते है। इयॉन वुलफर्ड जैसे लोग यह विश्वास दिलाते है कि हिन्दी की शक्ति लगातार बढ़ रही है और बढ़ती रहेगी।
24 Sept 2016