
इंदौर में 22 और 23 अक्टूबर को होने वाले इन्वेस्टर्स समिट के लिए मास मीडिया में जिस तरह का एकतरफा कवरेज है, वैसा सोशल मीडिया पर नहीं है। कुछ प्रमुख वेबसाइट्स पर जरूर इन्वेस्टर्स समिट के बारे में सकारात्मक बातें है, लेकिन सोशल मीडिया पर लोग यह बात अलग-अलग तरीके से लिख रहे है कि आखिर इन्वेस्ट एमपी नामक इस समिट के लिए जिस तरह से चीनी उत्पादों का उपयोग किया गया है, वह मेक इन इंडिया के नारे के बावजूद कितना उचित है। समिट के स्थान के साथ ही पूरे इंदौर को चीन की बनी लाइट्स से सजाया गया है। समिट स्थल पर लगने वाले एलईडी स्क्रीन भी चीन के बने हैं। लोग इस बात पर भी तंज कर रहे है कि चीनी सामान की मुखालिफत करने वाले लोग चीन के निवेशकों के स्वागत के लिए पलक-पावड़े बिछा रहे हैं।
इंदौर में हो रहे इस आयोजन में 40 देशों के 300 विदेशी प्रतिनिधि सहित करीब 5000 प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। इनमें से तीन देशों के प्रतिनिधि वहां के मंत्री स्तर के, 18 देशों के प्रतिनिधि कूटनीतिज्ञ और 10 देशों के प्रतिनिधि के रूप में वहां के राजदूत इस समिट में आ रहे हैं। इसके पहले भी इंदौर में इस तरह के आयोजन हुए है और इंदौर के बाहर भी। इन आयोजनों की सफलता पर सवाल उठाने वाले भी बहुत है। मध्यप्रदेश में निवेश का माहौल अच्छा बन रहा है, इसमें भी दो मत नहीं। मध्यप्रदेश के पास इन्वेस्टर्स के सामने शो केस करने के लिए बहुत कुछ है। पर्यटन केन्द्र तो हैं ही, कृषि शोध संस्थान, औद्योगिक क्षेत्र, एशिया का सबसे बड़ा सोलर पावर प्लांट जैसी बहुत सी चीजें है। दावा किया जा रहा है कि आप बिजनेस का आइडिया लेकर आएं और मध्यप्रदेश में उद्योग शुरू करें। जमीन के बारे में प्रचारित किया जा रहा है कि आप कम्प्यूटर पर बैठे-बैठे अपनी जमीन पसंद कर सकते है और एक क्लिक पर जमीन का आवंटन पा सकते है।
सोशल मीडिया पर चल रहे इन्वेस्ट एमपी विरोधी अभियानों के खिलाफ मध्यप्रदेश सरकार की तरफ से अनेक संस्थाएं और लोग सक्रिय है। इनका लक्ष्य है कि मध्यप्रदेश की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले ऐसे संदेशों का जवाब दिया जाए। मुख्यमंत्री खुद अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रदेश के विकास की बातें कर रहे है। अखबारों और टीवी चैनलों के अलावा वे सोशल मीडिया पर भी बार-बार दोहरा रहे हैं कि मध्यप्रदेश में भूमि और पानी प्रचुरता में उपलब्ध है। यहां कुशल और अकुशल श्रमिकों की उपलब्धता भी है और श्रमिक क्षेत्र में असंतोष जैसी कोई चीज नहीं है। मध्यप्रदेश सरकार ने उद्योगों के लिए करीब 25 हजार हेक्टेयर जमीन का लैंड बैंक बना रखा है। जहां ऑनलाइन बुकिंग की जा सकती है। मध्यप्रदेश में राजनैतिक स्थिरता है और देश के विकास में मध्यप्रदेश अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

मध्यप्रदेश के विकास का जो खाका पेश किया जा रहा है, उसके अनुसार मध्यप्रदेश के पांच एयरपोर्ट दुनिया के अधिकांश देशों से संपर्क के अच्छे साधन हैं। यहां पांच इनलैंड कंटेनर टर्मिनल हैं। 1 लाख 60 हजार किलोमीटर की अच्छी सड़कें और 425 रेल गाड़ियां आवागमन के लिए उपलब्ध हैं। मध्यप्रदेश को देश का सबसे तेजी से विकास करने वाला राज्य भी बताया गया है। मध्यप्रदेश में अनेक मल्टीनेशनल कंपनियां कार्यरत हैं और देश की ऐसी कंपनियां भी कार्यरत हैं, जो पूरी दुनिया में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। यहां छह सरकारी और दो निजी क्षेत्र के फूड पार्क है। फूड प्रोसेसिंग इकाइयों के लिए मध्यप्रदेश एक आदर्श जगह है, क्योंकि कृषि के क्षेत्र में मध्यप्रदेश उल्लेखनीय स्थान रखता है। दुग्ध उत्पादन में मध्यप्रदेश देश का तीसरा सबसे प्रमुख राज्य है और सोयाबीन, दलहन, अनाज आदि के क्षेत्र में अव्वल है। मध्यप्रदेश की कार्य संस्कृति आदर्श कही जा सकती है।
सोशल मीडिया पर चल रहे समिट विरोधी लोगों के पास कहने को बहुत ज्यादा बातें नहीं है, वे तिल का ताड़ बनाना चाहते हैं। अगर किसी समिट में लाखों करोड़ रुपए इन्वेस्ट करने की बात हो रही हो और वहां मेहमानों को चांदी के बर्तनों में भोजन परोसा जाए, तो यह छोटी सी बात है, लेकिन क्षिद्रांन्वेशियों को ये छोटी-छोटी सी बातें भी हजम नहीं हो रही। वे सस्ते श्रम की उपलब्धता की बात का भी विरोध करते हैं और कहते हैं कि सस्ता श्रम होना किसी प्रदेश की उपलब्धि वैâसे हो सकती है? विदेशी निवेशकों के आगे सुविधाओं का भंडार खोलने के बजाय भारतीय निवेशकों को सुविधाएं क्यों नहीं दी जा रही? नए निवेशकों को लुभाने के बजाय पुराने निवेशकों को वहीं सुविधा उपलब्ध कराने में हिचक क्यों?
22 oct. 2016