
डोनाल्ड ट्रम्प की जीत के साथ ही संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में एक बार फिर गैर राजनैतिक व्यक्ति राष्ट्रपति चुना गया। अमेरिकी व्हॉइट हाउस में ट्रम्प अब तक का सबसे धनी व्यक्ति होंगे। तमाम चुनावी सर्वेक्षणों और भविष्यवाणियों को झूठा साबित करने वाले इस फैसले के पीछे सोशल मीडिया की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। अब जो बातें सामने आ रही हैं, उनके अनुसार डोनाल्ड ट्रम्प के मीडिया मैनेजरों ने सोशल मीडिया का उपयोग करते समय ट्विटर बॉट्स का उपयोग भी किया। यह उपयोग इतनी चतुराई से किया गया कि उनके विरोधियों को भी इसकी भनक नहीं लग पाई कि ट्विटर पर आने वाले लाखों-करोड़ों संदेशों में से बड़ी संख्या में ऐसे संदेश हैं, जो न तो ट्रम्प ने जारी किए हैं और न ही उनकी पार्टी के लोगों ने।
‘बॉट’ एक ऐसा कम्प्यूटरजनित प्रोग्राम होता है, जो ट्विटर के हैशटैग को पकड़कर रि-ट्वीट करता रहता है। जब भी कोई व्यक्ति उस खास हैशटैग का उपयोग करता है, तब बॉट उसे पकड़कर बार-बार चलन में ले आता है। कई लोग बॉट्स का उपयोग गोपनीय तरीके से अपनी कंपनी के प्रचार के लिए भी करते है। बॉट्स का उपयोग करने के लिए कम्प्यूटर को कुछ विशेष निर्देश देने होते है और वह अपना काम करता रहता है।

ऐसा नहीं है कि बॉट्स का उपयोग कोई पहली बार हो रहा हो। बॉट्स का उपयोग पोर्न वेबसाइट्स वाले भी करते रहते है। पोर्न वेबसाइट्स का प्रचार कई देशों में पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसे में बॉट्स कुछ खास हैशटैग पकड़कर रि-ट्वीट करते जाते है। इस्लामिक स्टेट (आईएस) भी सोशल मीडिया पर सक्रिय है। उसके कई ग्रुप सोशल मीडिया में प्रचार के काम करते रहते हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों से इस्लामिक स्टेट के इन लोगों को सोशल मीडिया पर लाखों नए-नए फॉलोअर्स मिल रहे थे। इन लोगों को इस्लामिक स्टेट वालों से कोई सहानुभूति नहीं थी, बल्कि ये फॉलोअर्स पोर्न वेबसाइट के दीवाने थे। इस तरह के बॉट्स का उपयोग होने के बाद इस्लामिक स्टेट के समूहों के सामने समस्या खड़ी हो गई कि वे सोशल मीडिया पर अब अपने भड़काऊ संदेश कैसे प्रचारित करें? यह भी समस्या हो गई कि उनके खुद के सैकड़ों कार्यकर्ता पोर्न वेबसाइट्स देखने में समय गंवाने लगे। इस सब काम में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय, पेंटागन और उसके दर्जनों हैकर्स लगे हुए थे। इन हैकर्स ने बॉट्स के माध्यम से इस्लामिक स्टेट के समूहों के सामने संकट पैदा कर दिया।
यूएसए में मतदान के कुछ दिनों पहले से लोग एक-एक विषय पर चर्चा कर रहे है। ये चर्चाएं पूरी तरह खुलकर और ईमानदारी से हो रही थी। सोशल मीडिया पर लोग अपने विचार खुलकर प्रकट कर रहे थे, ऐसे में ट्विटर पर कुछ ऐसे बॉट्स सक्रिय हुए, जो ट्रम्प के पक्ष वाली बात बार-बार रि-ट्वीट करते रहे। सामाजिक, राजनैतिक, वैचारिक और नीति संबंधी मामलों में जो ट्वीट किए गए थे, वे बढ़-चढ़कर ट्रम्प की तरफ से लोगों के पास पहुंचने लगे। लाखों मतदाताओं को तो यह बात पता ही नहीं चली कि ट्रम्प के समर्थन में जो ट्वीट उन्हें मिल रहे थे, वे किसी व्यक्ति ने नहीं, कम्प्यूटर ने भेजे है। एक अनुमान के अनुसार हर पांच में से एक संदेश बॉट्स का होता था। ये बॉट्स इतनी कुशलता से डिजाइन किए गए थे कि ये खुद ही अपने आप कंटेंट जनरेट कर लेते थे। सरल शब्दों में कहे तो यह कुछ शब्दों और हैशटैग को पकड़कर अपना वाक्य बना देते और लाखों लोगों तक भेज देते। इस तरह के बॉट्स का उपयोग राजनैतिक पार्टियां कई देशों में करती है। दूसरे देशों में प्रचार के लिए भी सरकारें इसका इस्तेमाल करती रही है। ये बॉट्स तब उपयोगी होते है, जब खुलकर कोई बात कहना आसान नहीं हो। एक अनुमान के अनुसार इन बॉट्स ने 40 लाख ट्वीट जनरेट किए और उसे करोड़ों अमेरिकी मतदाताओं तक पहुंचाया। चुनाव के पहले अमेरिका में किए जा रहे ट्वीट्स का लगभग 15 प्रतिशत केवल चुनाव से संबंधित ही था। अनुमान है कि इनमें से आधे ट्वीट बॉट्स के थे।
ये बॉट्स अपनी पार्टी के नेता का प्रचार करने के साथ ही विपक्षी नेता पर हमले के लिए भी उपयोग में आ रहे थे। इनकी संख्या इतनी ज्यादा थी कि इन संदेशों को नजरअंदाज करना आम मतदाताओं के लिए मुश्किल सा हो गया था। अनेक मतदाताओं को यह बात समझ में भी आ रही थी कि उन्हें जो संदेश मिल रहा है, वह किसी व्यक्ति ने नहीं भेजा है, लेकिन फिर भी ऐसे संदेशों को नजरअंदाज करना आसान नहीं था। अमेरिका में फर्जी मतदान के किस्से भले ही सामने नहीं आ रहे हो, पर सोशल मीडिया पर माहौल बनाने के लिए इस तरह के फर्जी तरीकों का इस्तेमाल तो हुआ ही।
12 Nov 2016