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Mark-Zukerberg

चीन में फेसबुक के प्रवेश की फिर से तैयारियां चल रही है। एक ऐसे देश में, जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बेहद सीमित है और सेंसरशिप पूरी तरह लागू है, वहां फेसबुक का जाना विस्मय पैदा करता है। चीन ने फेसबुक को ऐसे ही प्रवेश की आजादी नहीं दी, उसने शर्त रखी कि चीन की सरकार के आदेश के अनुसार फेसबुक में वे तमाम फीचर रखे जाएंगे, जिनसे किसी भी पोस्ट को सेंसर किया जा सके। हाल के अमेरिकी चुनाव में फेसबुक और दूसरे सोशल मीडिया पर आई बोगस न्यूज फीड को लेकर उठा विवाद अभी शांत भी नहीं हुआ है और अब फेसबुक ने खुद इस तरह की सेंसरशिप को मंजूर कर लिया है। यह सब फेसबुक के कम्युनिटी मानकों के विरुद्ध है, लेकिन फेसबुक ने इसके लिए हामी भर दी है।

इसके अर्थ स्पष्ट हैं। फेसबुक कोई लोकतंत्र को आगे बढ़ाने वाला औजार या उपकरण नहीं है, वह एक व्यावसायिक इकाई है। उसके लिए मुनाफा सबसे आम है। लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी उसके लिए इतना अर्थ नहीं रखते। फेसबुक की नीति है कि अगर कोई व्यक्ति अपनी पोस्ट में हिंसा को बढ़ावा दे, नंगी तस्वीरें पोस्ट करे, नफरत फैलाने वाले वक्तव्य जारी करे और शिष्टाचार की हदें पार करे, तो फेसबुक ऐसी पोस्ट को तो रोक ही देता है। उसे लिखने वाले को भी बैन कर देता है। चीन जैसे देश में जहां लोकतंत्र नहीं है और अभिव्यक्ति की आजादी भी बहुत सीमित है, वहां लोग फेसबुक पर आजादी से अपनी बात रख सकते थे। चीन की सरकार यह आजादी नहीं देना चाहती, इसीलिए उसने फेसबुक को अपने देश में फलने-फूलने का मौका नहीं दिया। चीन दुनिया का बहुत बड़ा बाजार है, इस बात को मार्क जकरबर्ग कैसे भूल सकते है। चीन के बाजार पर कब्जा करने के लिए उन्होंने चीन की सेंसरशिप की नीतियों को मंजूर कर लिया है।

2009 में चीन ने फेसबुक को प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस प्रतिबंध का कारण था, चीन की सेंसरशिप की नीतियां। फेसबुक इतने बड़े बाजार को छोड़ना नहीं चाहता, इसलिए लगातार वह चीन की सरकार के सामने अलग-अलग प्रस्ताव रखता रहा। अब फेसबुक ने चीन में घूसने के लिए अपने आप में ही एक सेंसरशिप टूल जोड़ने का फैसला कर लिया है। इस टूल के माध्यम से चीन में पोस्ट की गई प्रत्येक सामग्री को सेंसर किया जा सकेगा। इसके तहत कुछ खास तरह के लेखों, समाचारों और टिप्पणियों को फेसबुक पर आने से रोका जा सकेगा। चीन के हुक्मरानों के पास इस सेंसरशिप टूल की चाभी होगी। इसके साथ ही लोकतंत्र को आगे ले जाने और अभिव्यक्ति की बातें करने वाले मार्क जकरबर्ग की पोल खुल गई है और यह बात साफ हो गई है कि उनके लिए कारोबार ही सबसे ऊपर है। चीन का मार्केट है ही इतना बड़ा कि किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर ले।

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चर्चा यह भी है कि फेसबुक इस तरह के सेंसरशिप टूल के लिए दूसरी कंपनियों के साथ समझौता करने की तैयारी में है। इनमें गूगल, इंस्टाग्राम, यू-ट्यूब जैसी दूसरी वेबसाइट्स भी है। जहां लोग खुलकर अपनी बातें अभिव्यक्त करते आ रहे है। अब इस तरह के सेंसरशिप टूल का उपयोग ये कंपनियां भी करने लगेंगी। मार्क जकरबर्ग के लिए भी मुनाफा ही सर्वोच्च है और लोकतंत्र तथा अभिव्यक्ति की आजादी की बातें केवल दिखावा है।

न्यू यॉर्क टाइम्स की खबरों के अनुसार फेसबुक के कई विभाग इस तरह के सेंसरशिप टूल को डेवलप करने में जुटे है। इस काम में जुटे लोगों से जकरबर्ग ने कहा है कि यह टूल डेवलप करने का अर्थ यह नहीं कि इसका उपयोग होगा ही। पर चीन में सभी तरह के मीडिया पर सरकार का नियंत्रण है और चीन की सरकार फेसबुक जैसे टूल को स्वतंत्र छोड़ देगी, यह सोचना ही हास्यास्पद है।

3 Dec. 2016

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