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अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए डोनाल्ड ट्रम्प के बारे में अमेरिकी मीडिया में एक रिपोर्ट छपी है, जिसमें उन्हें ‘टि्वटर-इन-चीफ’ का खिताब दिया गया है। ट्रम्प ने अभी राष्ट्रपति पद की शपथ भी नहीं ली है, लेकिन उनके ट्वीट वैश्विक हेडलाइंस बना रहे हैं। विदेश नीति का मामला हो या कैबिनेट में नियुक्ति का, बोइंग कंपनी की खरबों की एयरफोर्स-1 डील को महंगा बताने की बात हो, या डोनाल्ड ट्रम्प टॉवर के रेस्टोरेंट का मसला- मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि जिस तरह टि्वटर पर हेडलाइंस बनाई जा रही है, उससे लगता है कि ट्रम्प ‘टि्वटर-इन-चीफ’ हो गए है। व्हॉइट हाउस पहुंचने के पहले ही ट्रम्प ने जो सनसनी अपने ट्वीट से फैलाई है, वह सामान्य बात नहीं है। जिन बातों के लिए राष्ट्रपति निर्वाचित कोई नेता प्रेस कांफ्रेंस करके नाराजगी प्रकट करता, उन बातों के लिए ट्रम्प ने एक छोटे से ट्वीट का सहारा ही लिया और इससे उनका मकसद कहीं ज्यादा अर्थपूर्ण तरीके से लोगों तक पहुंचा भी है।

ट्रम्प के ट्वीट्स के कारण पूरा वैश्विक मीडिया चौकन्ना हो गया है और ट्रम्प के एक-एक ट्वीट को बारिकी से स्केन करने लगा है। अमेरिकी मीडिया ट्रम्प के इस कार्य का बिलकुल विरोध नहीं कर रहा है। ऐसा लगता है कि मीडिया को मैनेज करने का यह ट्रम्प का अपना तरीका है।

ट्रम्प यह सब इस अंदाज में कर रहे हैं मानो वे मीडिया की बेचैनी से अनजान है। एक मीडिया विशेषज्ञ के अनुसार ट्रम्प का मीडिया पर यह आरोप है कि अमेरिकी मीडिया उन्हें कभी भी ईमानदारी से प्रस्तुत नहीं करता। न ही उन्हें पूरा सम्मान देता है। इस कारण उन्हें ट्विटर का सहारा लेना पड़ रहा है। 20 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति का दायित्व संभालने के बाद भी ट्रम्प का यह रवैया जारी रहेगा या नहीं, इस बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। अभी तो ट्विटर पर ओबामा के फॉलोअर्स सबसे अधिक है। राष्ट्रपति भवन का सोशल मीडिया विभाग ट्रम्प के सत्ता संभालने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में ओबामा के तमाम ट्वीट हटाने का काम करेगा और उसकी जगह ट्रम्प का ट्विटर हैंडल करने लगेगा। अभी ट्रम्प के निजी ट्विटर अकाउंट पर करीब पौने दो करोड़ फॉलोअर्स है। नरेन्द्र मोदी के फॉलोअर्स की संख्या इससे करीब डेढ़ गुनी ज्यादा है।

राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतने के बाद ही एक टीवी कार्यक्रम में ट्रम्प ने इस तरफ इशारा किया था कि राष्ट्रपति बनने के बाद वे ट्विटर का इस्तेमाल सीमित तरीके से ही करना पसंद करेंगे। टीवी कार्यक्रम में ट्रम्प ने यह भी कहा था कि वे ट्विटर का उपयोग प्रेस रिलीज की तुलना में तेज होने के कारण करते हैं। दूसरा कारण उन्होंने बताया था कि अमेरिकी मीडिया का एक बड़ा वर्ग ईमानदारी से कार्य नहीं कर रहा है। इसलिए उन्हें ट्विटर का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

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राष्ट्रपति रहते हुए बराक ओबामा ने व्हॉइट हाउस में राष्ट्रपति भवन का वीडियो चैनल लांच किया था। जिसके माध्यम से यू-ट्यूब पर राष्ट्रपति ओबामा के तमाम वीडियो जारी किए जाते रहे है। अमेरिकी राष्ट्रपति जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहने वाले आदमी के लिए ट्विटर जैसा संवाद वाहक पर्याप्त नहीं है। यह भी विशेषज्ञों की ही राय है। अमेरिकी मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति पद संभालने के बाद ही ट्रम्प अपने मीडिया मैनेजमेंट की शैली बदल डालेंगे। अब उनका मीडिया मैनेजमेंट वैसा नहीं होगा, जैसा राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के दौरान हुआ करता था। यह स्वाभाविक भी है, क्योंकि चुनाव लड़ने के दौरान और चुनाव जीतने के बाद हालात काफी अलग-अलग होते है।

डोनाल्ड ट्रम्प ने छह महीने से कोई प्रेस कांफ्रेंस नहीं बुलाई है। राष्ट्रपति चुने जाने के बाद भी उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस बुलाना उचित नहीं समझा। वे टीवी चैनल या ट्विटर अकाउंट को अपने लिए ज्यादा उपयोगी पाते है। 21 प्रतिशत अमेरिकन यह मानते है कि ट्रम्प ट्विटर का उपयोग ज्यादा प्रोफेशनल तरीके से करते है। दो तिहाई अमेरिका यह मानता है कि ट्रम्प के ट्वीट सकारात्मक नहीं होते। अमेरिकी राष्ट्रपति मीडिया को किस तरह मैनेज करता है, यह बात केवल अमेरिकियों के लिए ही नहीं; पूरी दुनिया के लोगों के लिए महत्व रखती है, क्योंकि अनेक देशों के राष्ट्र प्रमुख अमेरिकी राष्ट्रपति की शैली की नकल करते रहते हैं।

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