
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा के बाद कई बार बहस होने लगती है कि पद्म पुरस्कार सही लोगों को मिल रहे है या नहीं। इस बार पद्म पुरस्कारों की घोषणा में एक नाम सबसे ज्यादा विवादों में रहा और वह है शरद पवार का। शरद पवार को महाराष्ट्र के लोग साहेब कहकर बुलाते है। पुणे और बारामती क्षेत्र में तो शरद पवार को पद्म पुरस्कार मिलने का जोरदार स्वागत हुआ है, लेकिन आमतौर पर कई लोगों को यह बात पची नहीं। लोग इसे महाराष्ट्र के तत्कालीन राजनैतिक समीकरण से जोड़कर देख रहे है। महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी और शिव सेना की युति यानी गठजोड़ टूट चुका है और मुंबई महानगर पालिका चुनाव शिव सेना और भाजपा अलग-अलग लड़ रही हैं। यह भी चर्चा है कि शिव सेना कभी भी सरकार से पीछे हट सकती है। ऐसे में शरद पवार की एनसीपी बीजेपी के पक्ष में आकर सत्ता बचा सकती है।
शरद पवार को देश का दूसरा सबसे बड़ा राष्ट्रीय सम्मान पद्म विभूषण देने की घोषणा पर सबसे तीखा ट्वीट दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने किया। उन्होंने लिखा कि शरद पवार को पद्म विभूषण की घोषणा करने के साहसिक फैसले के लिए नरेन्द्र मोदी को तो भारत रत्न मिलना चाहिए। गौरतलब है कि पद्म विभूषण से भी बड़ा है भारत रत्न। शिव सेना भी शरद पवार को पद्म विभूषण देने की घोषणा पर भड़क उठी। उसे लगता है कि यह फैसला सोच विचारकर शिव सेना को अलग-थलग करने के लिए लिया गया है। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के पहले भाजपा और नरेन्द्र मोदी के निशाने पर शरद पवार खास तौर पर थे।
इंडिया टीवी के मैनेजिंग एडिटर अजीत अंजुम ने तो शरद पवार को पद्म विभूषण की घोषणा पर ट्विटर पर अभियान सा ही चला दिया है। अजीत अंजुम के ट्विटर पर 80 हजार से अधिक फॉलोअर्स है। अजीत अंजुम ने दो दिनों में दर्जनों ट्वीट किए, जिसमें शरद पवार को पद्म सम्मान मिलने के बारे में तीखी टिप्पणियां की गई है। पवार समर्थकों ने इस पर नाराज होकर अजीत अंजुम के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया। अजीत अंजुम ने उनमें से कुछ लोगों के ट्वीट का जवाब भी दिया। अजीत अंजुम ने यहां तक लिखा कि पद्म विभूषण की तरफ पद्म विभीषण नाम का भी एक अवॉर्ड शुरू होना चाहिए। हर चुनाव के पहले ऐसे किरदारों को चुनकर सम्मानित किया जाना चाहिए। महाराष्ट्र की राजनीति में कांग्रेस का एक धड़ा शरद पवार को विभीषण ही मानता है, क्योंकि 1978 में शरद पवार केवल 38 साल की उम्र में कांग्रेस से टूटकर जनता पार्टी के सहयोग से मुख्यमंत्री बन गए थे। बाद में जब श्रीमती इंदिरा गांधी फिर से प्रधानमंत्री बनी, तब उन्होंने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। बाद में शरद पवार दो मर्तबा फिर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने थे।

अजीत अंजुम ने लिखा कि पद्म विभूषण जैसा सम्मान हमेशा बेदाग छवि वाले नेताओं को दिया जाता है। ऐसे में शरद पवार साहेब को पाकर यह सम्मान सम्मानित हुआ होगा। मैं यह लगातार गूगल पर सर्च कर रहा हूं, पवार साहब सचमुच बहुत बड़े कर्मयोगी है। वे उसी एनसीपी के प्रमुख है, जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नेचुरली करप्ट पार्टी तक कहा था। अब शरद पवार साहेब को चाहिए कि वे उन लोगों के खिलाफ मुकदमा करे, जिन्होंने उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई है। शरद पवार वास्तव में भारत रत्न के हकदार है, पद्म विभूषण उनके कद के लायक नहीं है। अबकी बार, शरद पवार।
शरद पवार खुद भी ट्विटर पर बहुत सक्रिय है और वहां उनके 1 लाख 38 हजार से भी ज्यादा फॉलोअर्स है। शरद पवार ने पद्म विभूषण सम्मान की घोषणा के बाद आभार व्यक्त किया और फिर इस सम्मान को अपने क्षेत्र के किसानों को समर्पित करने का ऐलान कर दिया, जिनकी मेहनत के कारण ही पुणे और बारामती क्षेत्र का नक्शा पलटा है। शरद पवार ने लातूर, उस्मानाबाद और मुंबई के अपने उन समर्थकों के प्रति आभार माना है, जिन्होंने मुश्किल दिनों में हौसला बनाए रखा।
शरद पवार की बेटी सांसद सुप्रिया सुले ने अपने पिता को पद्म विभूषण सम्मान की घोषणा पर उन्हें बधाई तो दी ही, सचिन पायलट के एक ट्वीट को भी आरटी किया। जिसमें उन्होंने शरद पवार को बधाई दी थी। सुप्रिया सुले यह कहना चाहती है कि शरद पवार न केवल एनसीपी में लोकप्रिय है, बल्कि कांग्रेस में भी लोकप्रिय नेता की छवि रखते हैं।
28 jan 2017