
क्या स्थानीय नागरिक और राजनैतिक कार्यकर्ता अपने क्षेत्र के नेता की गतिविधि को लेकर फेसबुक पर टिप्पणी नहीं लिख सकते हैं? आमतौर पर तो इसमें किसी को कोई पेंच नजर नहीं आता, क्योेंकि डोनाल्ड ट्रम्प से लेकर नरेन्द्र मोदी तक के बारे में सोशल मीडिया पर लोग अपनी-अपनी राय लिखते रहते है। राय के साथ ही आलोचना कई बार व्यक्तिगत भी हो जाती है, लेकिन फिर भी बड़े-बड़े नेता ऐसी आलोचना को नजरअंदाज कर देते है। यह बड़प्पन हरेक में नहीं होता। कई बार बड़े नेता ऐसी बातोें को नजरअंदाज करते है, लेकिन छोटे नेता या बड़े नेता के समर्थक ऐसी आलोचना सह नहीं पाते।
नरेन्द्र मोदी के मंत्रिमंडल में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गेहलोत के निजी जीवन पर टिप्पणी लिखने के कारण रतलाम के एक समाचार पत्र को उसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी। अब देवास में मंत्री समर्थकों को अपने माननीय नेता की आलोचना बर्दाश्त नहीं हुई और वे थाने तक पहुंच गए। श्री थावरचंद गेहलोत देवास, शाजापुर क्षेत्र से लोकसभा चुनाव जीत चुके है। वर्तमान में यहां से मनोहर ऊंटवाल सांसद हैं। अकसर लोग दोनों नेताओं की तुलना करते रहते है। कुछ की राय में थावरचंद गेहलोत बहुत ही योग्य, अनुभवी और कर्मठ नेता हैं। कई को लगता है कि ऐसा नहीं है।
27 जनवरी को जब थावरचंद गेहलोत देवास के दौरे पर आए, तब कई लोगों ने उनकी यात्रा को लेकर फोटो शेयर किए। उनके साथ सेल्फी भी खिंचवाई और अपने नेता की प्रशंसा में अच्छी-अच्छी बातें लिखी। कुछ लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने थावरचंद गेहलोत के कामों की सराहना नहीं की और यह लिखा कि वे बहुत से काम अपने क्षेत्र में नहीं करवा सके। मंत्री रहते हुए भी वे अपने समर्थकों के लिए कुछ विशेष नहीं करते। इस पर किसी ने टिप्पणी लिखी कि वे अपने पुत्र को लेकर ऐसे निष्क्रिय नहीं रहते। उन्होंने अपने पुत्र को विधानसभा का टिकट दिलवाया और जितवाया भी। कुछ कार्यकर्ताओं ने टिप्पणी की कि श्री थावरचंद गेहलोत अपने कार्यकर्ताओं की तरफ ध्यान नहीं देते, वे कार्यकर्ताओं से केवल हार पहनते है।
मंत्री समर्थकों को यह बात बहुत ही नागवार गुजरी और वे एक पुलिस थाने पहुंच गए, उन्होंने शिकायत की कि मंत्री की आलोचना करने वाले लोग उनकी छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे है। मंत्री पर झूठे आरोप लगाए जा रहे है। इन लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। मामला एक केन्द्रीय मंत्री का है, इसलिए पुलिस भी सक्रिय हुई और मंत्री की देवास यात्रा को लेकर टिप्पणी करने वालों को पुलिस थाने तलब कर दिया गया। फेसबुक पर टिप्पणी करने वाले कुछ लोग भारतीय जनता पार्टी से ही संबद्ध थे और कुछ विपक्ष से। मामले को तुल नहीं देते हुए दोनों पक्षों ने आपस में राजीनामा कर लिया और मंत्री पर टिप्पणी करने वालों ने क्षमा याचना का पत्र भी लिख दिया।
मास मीडिया में अकसर राजनीतिज्ञों को लेकर टिप्पणियां होती रहती है, लेकिन फेसबुक पर की गई टिप्पणियों को जिस गंभीरता से लिया गया, उससे यह बात जाहिर है कि नेताओं के सामने सोशल मीडिया का महत्व बहुत ज्यादा है और वे अपनी छवि बनाए रखने के लिए कुछ भी करने से नहीं हिचकते। वैसे तो फेसबुक पर थावरचंद गेहलोत के तीन-तीन पेज है, जहां उनके विचारों और गतिविधियों को जगह मिलती है, लेकिन उनके विरोधी भी फेसबुक पर जगह बना ही लेते है।
देवास शाजापुर लोकसभा क्षेत्र में जनसमस्याओं को लेकर वैसे तो आए दिन टिप्पणियां होती रहती है। बात चाहे राजमार्ग की हो या स्थानीय शासन द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं की। जहां भी लोगों को असुविधा लगती है, लोग सोशल मीडिया पर टिप्पणी लिखने से नहीं हिचकते। खुले में शौच के विरुद्ध चलाए गए अभियान को लेकर ही देवास जिले में अनेक लोगों ने शिकायतें की है कि इलाके में शौचालयों का अभाव है, लेकिन खुले में शौच के लिए निकले लोगों को सजा के तौर पर बैठकें लगानी पड़ती है। सुलभ शौचालय वालों के खिलाफ भी ज्यादा पैसे लेकर सुविधा देने की शिकायतें आती रहती है। शुक्र है कि ये लोग शिकायतों को लेकर पुलिस थाने नहीं जा रहे।
04 feb2017