
विज्ञापन की दुनिया के लोग सेवा और उत्पाद के प्रचार के लिए नए-नए माध्यमों की तलाश में रहते हैं। अब सोशल मीडिया का प्रभाव है, इसलिए सोशल मीडिया प्रचार का प्रमुख कारण बन गया है। विज्ञापन एजेंसियों के लिए आज की पीढ़ी फेसबुक जनरेशन है। खास बात यह है कि आज हर जनरेशन फेसबुक जनरेशन कही जा सकती है, क्योंकि दूसरे प्रचार माध्यमों की अपनी-अपनी सीमाएं हैं, लेकिन सोशल मीडिया एक ऐसा माध्यम है, जो सभी लोग उपयोग में ला रहे है। हर आय और आयु वर्ग के लोग सोशल मीडिया से जुड़े हैं। खासकर फेसबुक से।
यह डिजिटल मार्केटिंग का दौर है और इसमें उत्पाद और ग्राहकों के बीच संवाद कायम रखना और उसे बनाए रखना जरूरी है। फेसबुक के माध्यम से कंपनियां अपने उत्पाद के बारे में फीडबैक भी दे रही है। ब्रांड लायल्टी के बारे में फेसबुक पर सर्वे हो रहे है। सोशल मीडिया की एक प्रमुख पत्रिका के अनुसार फेसबुुक अभी भी हर वर्ग के लोगों के लिए प्रचार का प्रमुख साधन बना हुआ है। किशोर उम्र के बच्चों से लेकर 60 साल के वयस्कों तक सभी फेसबुक का उपयोग कर रहे हैं, इसलिए फेसबुक पर लगभग हर ब्रांड के विज्ञापन धड़ल्ले से हो रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार 50 प्रतिशत से भी अधिक उपभोक्ता अपने ब्रांड के प्रति लॉयल होते हैं और वे अपने उसी ब्रांड का सामान या सेवा लेना चाहते हैं।
फेसबुक के विज्ञापनों को कंपनियां किस रूप में देखती है कि एक ऐसा वर्ग है, जो फेसबुक पर मनोरंजन और सूचनाओं के लिए आता है। इससे अलग एक ऐसा वर्ग भी है, जो फेसबुक पर नए-नए उत्पादों की जानकारी चाहता है और नई डील्स क्या चल रही है, इसके बारे में भी जानकारी चाहता है। अनेक लोग उत्पाद और सेवाओं के बारे में अपनी राय सोशल मीडिया पर शेयर करते है। कोई उत्पाद बहुत अच्छा है, तो उसकी सराहना होती है और उत्पाद में खोट है, तो लोग उसकी तरफ भी ध्यान दिलाते है। रिपोर्ट के अनुसार फेसबुक पर अच्छी रिपोर्ट आने के कारण 71 प्रतिशत लोग उस प्रोडक्ट को अपनाने के बारे में विचार करते है। जिनमें से काफी उसे खरीदते भी है।
फेसबुक की कमाई का प्रमुख जरिया भी विज्ञापन ही है। फेसबुक विभिन्न कंपनियों और कार्पोरेट को विज्ञापन के लिए तो प्रेरित करता ही है, खुद फेसबुक यूजर्स को भी विज्ञापन के लिए प्रेरित करता है। बोलचाल की भाषा में वह इसे बूस्ट पोस्ट कहता है। इसका अर्थ यह है कि आप अपनी पोस्ट को बूस्ट करके ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा सकते हैं। फेसबुक यह भी जानकारी देता है कि आपकी पोस्ट को कितने लोगों ने पढ़ा। फेसबुक का फार्मुला साफ है, आप अपनी पोस्ट को प्रचारित कीजिए, जिससे की ज्यादा से ज्यादा लोग उसे पढ़े, इस तरह बूस्ट पोस्ट करके उन लोगों तक भी पहुंच सकते हैं, जिन तक सामान्य तौर पर नहीं पहुंच पाते। फेसबुक यूजर अपनी पोस्ट को पब्लिक शेयर कर सकता है, लेकिन फिर भी वह पोस्ट एक सीमित दायरे में ही देखी जा सकती है। इसके अलावा फेसबुक पर शेयर करने के और विकल्प भी है, जिनमें फ्रेंड्स और फ्रेंड्स ऑफ फ्रेंड्स जैसे विकल्प शामिल है। इसका मतलब है कि आपकी पोस्ट को आपके दोस्त देख सकते हैं या आपके दोस्तों के दोस्त देख सकते हैं।
फेसबुक बूस्ट पोस्ट करने वालों को यह विकल्प देता है कि उनका पोस्ट किस-किस तक पहुंचाया जा सकता है। फेसबुक पूछता है कि आपकी पसंद के शहर, आपकी पसंद के आय और आयु वर्ग के लोग, शिक्षा के स्तर की विभिन्नता और पुरूष अथवा महिला तक आप यह पोस्ट भेज सकते है। फेसबुक आपसे जो भी जानकारी आपके बारे में लेता है, उसका वर्गीकरण कर देता है और फिर तय करता है कि कोई भी बूस्ट पोस्ट करने वाला चाहे, तो अपनी पोस्ट केवल महिलाओं या पुरूषों के लिए भी बूस्ट कर सकता है। इसका उद्देश्य साफ है कि अगर कोई उत्पाद महिलाओं से जुड़ा है, तो जाहिर है महिलाओं तक पहुंचने में ज्यादा फायदा है। क्योंकि वे ही उस उत्पाद की ग्राहक हो सकती है। फेसबुक और सोशल मीडिया के इन विज्ञापनों ने अनेक परंपरागत विज्ञापन स्त्रोतों के सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है।