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ब्रेक्सिट मामले के अलावा भी फेसबुक पर आरोप लगे हैं। आमतौर पर यह माना जाता था कि सोशल मीडिया में वही बात सामने आती है, जो लोग पोस्ट करते रहते हैं, लेकिन अब यह भी गलत साबित हो रहा है। आरोप लगे है कि फेसबुक पर राजनैतिक खबरों की ट्रेंडिंग लिस्ट से छेड़छाड़ की जाती है। यह आरोप भी लगा है कि फेसबुक के कर्मचारी अपने तरीके से ट्रेंडिंग लिस्ट में स्टोरी जोड़ते रहते है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि जो पोस्ट ट्रेंडिंग में आ रही है, वे निष्पक्ष नहीं है। फेसबुक ने इन आरोपों को गलत बताया है और कहा है कि हम अपने कर्मचारियों को ट्रेनिंग देते है कि वे अपनी राजनैतिक विचारधारा को अपने काम में शामिल न होने दें। फेसबुक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पत्रकारों के सामने खुलकर यह बात रखी कि फेसबुक किस तरह ट्रेंडिंग टॉपिक्स का चयन करता है। फेसबुक का कहना है कि हमारे पास निष्पक्ष व्यवहार करने के लिए एक पूरी व्यवस्था है, जो पब्लिक पोस्ट में संतुलन की भूमिका निभाती है। न्यूज फीड में जो भी स्टोरी पहुंचती है, उसे तय करने के लिए एक अल्गोरिदम होता है, जो तय करता है कि कौन-कौन सी स्टोरी को ट्रेंडिंग टॉपिक बनाया जाए। फिर एक टीम उपलब्ध स्टोरीज में से ट्रेंडिंग टॉपिक का चयन करती है।

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दुनिया की जानी-मानी तकनीकी समाचारों की वेबसाइट गिजमोडो फेसबुक की सफाई से संतुष्ट नहीं है। गिजमोडो ने फेसबुक के भूतपूर्व कर्मचारियों के हवाले से कहा है कि वे पाठकों के हितों की खबरें निर्मित रूप से दबाते रहते है। ट्रेंडिंग टॉपिक्स में एक खास तरह की राजनीतिक विचारधारा के लोगों को ही महत्व मिलता है। इतना ही नहीं, डोनाल्ड ट्रम्प के बारे में एक मजाकिया वीडियो को भी फेसबुक ने जबरदस्ती ट्रेंडिंग टॉपिक से हटा लिया और डिलीट कर दिया।

फेसबुक की तरफ से सफाई दी गई है कि हम पूरी निष्पक्षता बरतते हैं। कभी भी किसी तरह का पक्षपात करने के लिए न तो हमसे उम्मीद की जाती है और न ही हम ऐसा करते हैं। हमने फेसबुक के भीतर सभी विभागों में पड़ताल की और पाया कि ऐसी कोई बात नहीं है। अब हम अपने दिशा-निर्देशों को और अपडेट कर रहे है, ताकि वे और ज्यादा स्पष्ट समझ में आ सकेंगे। हम अपने कर्मचारियों को प्रशिक्षण देते समय भी यहीं सिखाते है कि वे पक्षपात से हमेशा दूर रहें। हम हर विचारधारा का सम्मान करते हैं और हर समुदाय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने भी इस मामले में सफाई दी और कहा कि हमने फेसबुक बनाया ही इसलिए है कि वह सभी तरह के विचारों का मंच बन सके। हमारे मिशन और कारोबार दोनों के लिए यह उचित नहीं है कि हम किसी एक राजनीतिक विचारधारा की सामग्री को दबाएं। ये आरोप सही नहीं है कि फेसबुक जान-बूझकर कंजर्वेटिव नजरिये वाले लेखों को साइडबार से हटाता है। जहां चर्चित मुद्दों की सूची नजर आती है।

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फेसबुक ने अपनी सफाई में कहा है कि हम ट्रेंडिंग स्टोरीज बनाते वक्त अपने संपादकों द्वारा लिखी गई संक्षिप्त टिप्पणी पर गौर करते हैं। ये संपादक ही तय करते हैं कि किन-किन विषयों को ब्लैकलिस्ट किया जाए। आमतौर पर हम ट्विटर को नजरअंदाज करते हैं। हम इस बात की कल्पना भी करते है कि अगले दिन अखबारों में पहले पेज पर कौन-कौन सी खबरें छाने वाली है। हम अपने प्रतिस्पर्धियों की तरफ भी ध्यान नहीं देते है। फेसबुक के ट्रेंडिंग टॉपिक का सेक्शन उन युवा पत्रकारों से भरा है, जिन्होंने न्यूयॉर्क के डेली न्यूज, ब्लूमबर्ग, एमएसएनबीसी और गार्जियन जैसे अखबारों में काम किया है।

फेसबुक का कहना है कि हमारे ट्रेंडिंग टॉपिक चयन करने वाले कम्प्यूटर नहीं, मानव है। हमें लगता है कि कुछ काम कम्प्यूटर से ज्यादा अच्छी तरह मानव कर सकते हैं। पेरिस में हुए आतंकी हमले को ही लें, हमारे लोगों ने आतंकी हमले की खबरों को प्राथमिकता से लिया। फेसबुक अपने हर यूजर की ट्रेंडिंग स्टोरीज को ध्यान से पढ़ता है। साथ ही ध्यान रखता है कि उस स्टोरी में किसकी दिलचस्पी है, वह किस उम्र का और किस वर्ग का व्यक्ति है। आमतौर पर हमारी ट्रेंडिंग स्टोरीज न्यूज वेबसाइट और समाचार पत्रों की हेडलाइन्स में से ही होती है।

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इस सबसे हटकर तकनीकी समाचारों वाली वेबसाइट के विशेषज्ञों का कहना है कि फेसबुक की न्यूज फीड उत्तेजनाओं से भरपूर होती है और वे शालीन पाठकों की उपेक्षा करती है। इसी तरह गूगल भी उस तरह के कंटेंट की उपेक्षा करता है, जो इंटरनेट पर देरी से लोड होते है। गूगल इस बात की अपेक्षा करता है कि जो पेज जल्दी से मोबाइल पर नजर आने लगे, वे ही अच्छा कंटेंट प्रोवाइड करते है। उसकी क्वालिटी से गूूगल को ज्यादा मतलब नहीं। फोटो गैलरी के चयन में भी गूगल यही करता है।

फेसबुक पर लगे इन आरोपों को अमेरिकी मीडिया ने गंभीरता से लिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स और वाल स्ट्रीट जर्नल जैसे अखबारों ने अपने संपादकीय पृष्ठ पर टिप्पणियां लिखकर फेसबुक से जवाब चाहा है। अमेरिकी सीनेट कमेटी के चेयरमैन जॉन थ्यून ने फेसबुक को एक पत्र लिखकर सफाई चाही है और यह भी पूछा है कि उनकी राजनीतिक विचारधारा क्या है? जवाब में फेसबुक के वकील ने कहा है कि ऐसी कोई व्यवस्था हमारे यहां नहीं है और वैसे भी फेसबुक की संपादकीय स्वतंत्रता के बारे में सवाल उठाने का सांसद को कोई अधिकार नहीं है।

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अपने ऊपर लगे आरोपों से फेसबुक तिलमिलाया हुआ भी है। फेसबुक के सीओओ शेरिल सेंडबर्ग वाशिंगटन में कंजरवेटिव पार्टी के सांसदों से मिलकर अपनी सफाई भी दे रही है। इतना ही नहीं, शेरिल ने डेमोक्रेट नेता हिलेरी क्लिंटन की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी को भी महत्वपूर्ण बताया है। फेसबुक पर आरोप है कि डोनाल्ड ट्रम्प की छवि बिगाड़ने वाले वायरल वीडियो को डिलीट कर दिया गया था। फेसबुक का कहना है कि वे वीडियो फर्जी थे और जानबूझकर डोनाल्ड ट्रम्प की इमेज बिगाड़ने के लिए फेसबुक पर डाले गए थे। फेसबुक ऐसे किसी दुुष्प्रचार अभियान का हिस्सा नहीं बनना चाहता। फेसबुक ने यह भी मांग है कि अमेरिकी संसद को इस तरह के कानून बनाने चाहिए कि सही राजनैतिक माहौल बन सके।

फेसबुक चाहे जो दावा करे, यह बात सच है कि अनेक लोगों ने फेसबुक के पक्षपात को कहीं न कहीं, किसी न किसी मात्रा में महसूस जरूर किया है। फेसबुक यूजर पाते है कि कई बार उनकी महत्वपूर्ण पोस्ट उनके मित्र नहीं देख पाते और कई बार अनावश्यक पोस्ट बार-बार यूजर के सामने आ जाती हैं। अगर फेसबुक वास्तव में निष्पक्ष है, तो उसे ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए कि यूजर को भेदभाव महसूस न हो। एक और शिकायत फेसबुक यूजर्स को है कि जब भी वे दुर्भावनापूर्वक प्रचार वाले पोस्ट के बारे में शिकायत करते है, तब कार्रवाई करने में या तो बहुत देर की जाती है या कार्रवाई की ही नहीं जाती।

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