
राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने बॉलीवुड के पाकिस्तानी कलाकारों पर टिप्पणी की, तो सोशल मीडिया पर हड़कंप मच गया। एक तरफ पाकिस्तानी कलाकारों के खिलाफ लोगों ने अपनी राय व्यक्त की, तो दूसरी तरफ कलाकारों के पक्ष में भी बहुत से लोग आए। कलाकारों के पक्ष में बोलने वाले राज ठाकरे पर अंगुली उठाने से भी नहीं चूके। राज ठाकरे और उनकी पार्टी के नेताओं को गिरफ्तार करने की मांग भी की जाने लगी। लोगों ने यह भी लिखा कि कलाकार नेताओं के साफ्ट टारगेट होते है, इसलिए केवल उन्हें ही निशाना बनाया जा रहा है, उन्हें नहीं जो पाकिस्तान में बिजली घर बना रहे है, पाक में बांध बना रहे है और शक्कर तथा प्याज का आयात-निर्यात कर रहे है। कलाकारों के पक्ष में लिखने वाले यह भी लिख रहे है कि वे जो भी कार्य कर रहे है, वह कानून के दायरे में है और अगर उन्हें रोकना है, तो कानूनी तरीके से ही रोका जाना चाहिए।

इससे अलग और ऊपर हटकर लोगों ने यह भी लिखा कि कराची में भारतीय फिल्मी गानों को सीखने के लिए प्रशिक्षण केन्द्र चल रहे है। बड़े-बड़े उद्योग घरानों के लोग वहां गाना सीखने जाते है। ऐसे कई कार्यक्रमों में वहां के प्रमुख राजनेता भी शामिल होते रहते है। पाकिस्तान में होने वाली शादियों में बहारों फूल बरसाओ मेरा मेहबूब आया है, जैसे गाने बजते रहते है। भारतीय गानों और फिल्मों की सीडी वहां दुबई के रास्ते आती है। भारतीय फिल्मों को भी पाकिस्तान में और पाकिस्तान के बाहर वहां के लोगों द्वारा देखा और पसंद किया जाता है। यूरोप के अनेक देशों में भारत और पाकिस्तान के लोगों के बीच भाईचारे का रिश्ता रहता है। अगर पाकिस्तान के कलाकार भारत में लोकप्रिय हैं, तो भारत के कलाकार और फिल्में भी वहां काफी लोकप्रिय हैं।
सोशल मीडिया पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से अनेक लोगों ने आग्रह किया है कि वे उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करें, जो उन कलाकारों को गालियां दे रहे हैं और पाकिस्तान का एजेंट कह रहे हैं। भारतीय फिल्मकारों को पाकिस्तानी कलाकारों को आश्रय देने का आरोप भी लोगों के गले नहीं उतर रहा। भारतीय फिल्मकार जो कुछ कर रहे हैं, वह कानून के दायरे में ही कर रहे हैं और पाकिस्तान से जो भी कलाकार यहां आ रहे हैं, वे भारत सरकार की अनुमति से ही आ रहे हैं। इसलिए अगर उन्हें आने से रोकना है, तो सरकार उन्हें वीजा ही क्यों देती है? इन लोगों का कहना है कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना गैरकानूनी कार्य कर रही है और कानून को अपने हाथ में लेने की चेष्टा भी। टेलीविजन की खबरों में ऐसे लोगों को दिखाया जा रहा है, जो भारतीय कानून की इज्जत नहीं करते। ये लोग कानून को मानने वाले लोगों के लिए खतरा है।

पाकिस्तानी कलाकारों पर आपत्ति करने वालों के पास दो मुख्य तर्क हैं। पहला तो यह कि ये पाकिस्तानी कलाकार भारत से कमाई गई दौलत पर पाकिस्तान में टैक्स अदा करते है, जिसका उपयोग वहां की सरकार हथियार खरीदने और भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देने में करती है। दूसरी आपत्ति यह है कि भारतीय कलाकारों को पाकिस्तान इस तरह अपने देश में आकर काम करने की छूट नहीं देता। पाकिस्तान ने भारतीय कलाकारों को वह सम्मान भी हासिल नहीं है, जो भारत में उदार नागरिक उन्हें सम्मान देते आए हैं। उरी में हुए आतंकी हमले के बाद कुमार शानू ने अपना पाकिस्तान का स्टेज शो रद्द कर दिया, लेकिन भारत में पाकिस्तान के कलाकारों की कई फिल्में निर्माणाधीन हैं और उन्हें बनाने वाले बड़े-बड़े ग्रुप हैं। पाकिस्तानी कलाकारों पर आपत्ति करने वाले लोगों का कहना है कि भारत आकर दौलत और शोहरत कमाने वाले यह कलाकार कभी भी आतंकवाद के खिलाफ नहीं बोलते। पाकिस्तान के आतंकी मुंबई आकर हमला करते हैं, तब भी यह लोग चुप बैठे रहते हैं। अनुपम खेर, अभिजीत और अशोक पंडित जैसे कलाकार आतंकी गतिविधियों के विरोध में निरंतर बोलते और लिखते रहे हैं।
सोशल मीडिया पर ही किसी ने जी टीवी के सुभाष चंद्रा पर आपत्ति करते हुए लिखा कि वे एक तरफ तो जी न्यूज पर आतंकवाद विरोधी समाचार और टॉक शो दिखाते हैं और दूसरी तरफ पाकिस्तानी चैनलों के कार्यक्रम उठाकर जिंदगी चैनल चलाते हैं। यह उनका दो मुंहापन नहीं, तो क्या है? सोशल मीडिया की यह बात बहुत ज्यादा प्रचारित हुई और सुभाष चंद्रा तक भी पहुंची। भारतीय जनता पार्टी की ओर से राज्य सभा में जाने वाले सुभाष चंद्रा ने इसके जवाब में अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा कि मियां शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र में जो कुछ कहा, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। जी समूह जिंदगी चैनल पर पाकिस्तानी कार्यक्रम को बंद करने के बारे में विचार कर रहा है। पाकिस्तानी कलाकारों को भी भारत छोड़ देना चाहिए।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के ही अनेक कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान को भारतीय नदियों से मिलने वाले पानी को रोकने की मांग भी की है। उनका कहना है कि अगर ये नदियां पाकिस्तान से होकर भारत की तरफ बहती, तो उनमें पानी नहीं जहर बहकर आता। पाकिस्तानियों के पास खाने को दाने नहीं है और पीने को पानी भी नहीं रहेगा। यह उनको एक अच्छी शिक्षा होगी। शाहरुख खान, करण जौहर, महेश भट्ट आदि तो मनसे के निशाने पर है ही। अर्नब गोस्वामी भी उनके निशाने पर आ गए हैं, क्योंकि अर्नब गोस्वामी ने अपने चैनल पर पाकिस्तानी कलाकारों को वापस भेजने के विरोध में बातें कही थी। कुछ देशभक्तों ने सोशल मीडिया पर यह भी ऐलान किया है कि वे उन फिल्मों का बहिष्कार करेंगे, जिनमें पाकिस्तानी कलाकार काम कर रहे है। भारत में भी ऐसे कलाकारों की कमी नहीं है, जो पाकिस्तान के लिए साफ्ट कार्नर रखते है, लेकिन भारतीय सैनिकों के लिए इनके दिल में जरा भी सम्मान नहीं है। सोशल मीडिया पर ऐसे लोगों को निशाना बनाया जा रहा है, जो पाकिस्तानी कलाकारों को समर्थन या प्रोत्साहन दे रहे हैं।

26 Sept 2016