
प्लेब्वॉय पत्रिका के आने वाले अंकों में महिलाओं के न्यूड फोटो नहीं छपेंगे। इस बारे में फैसला ले लिया गया है। इसका कारण यह है कि कभी 70,00,000 बिकने वाली प्लेब्वॉय पत्रिका का प्रसार घटते-घटते 8,00,000 भी नहीं बचा है। जब हर किसी के पास इंटरनेट कनेक्शन हो और कम्प्यूटर, टैबलेट और मोबाइल फोन पर पोर्नोग्राफी देखने की सुविधा हो, तब प्लेब्वॉय पत्रिका को कौन पूछेगा? मालिकों की समझ में यह बात आ गई हैं।
पूरी दुनिया में प्लेब्वॉय के अनेक एडिशन छपते रहे है। सैकड़ों पत्रिकाओं ने प्लेब्वॉय की नकल भी की है। ये पत्रिकाएं दर्जनों भाषाओं में छपती रही है। इसके बावजूद प्लेब्वॉय लोकप्रिय रही है, तो इसका कारण यह है कि उसने न्यूड चित्रों के अलावा राजनैतिक और सामाजिक विषयों पर गंभीर समझ वाले लेख छपते रहे हैं। इंटरनेट के आगमन के बाद प्लेब्वॉय की बिक्री धीरे-धीरे घटने लगी। प्लेब्वॉय पत्रिका ने अपने इंटरनेट एडिशन में इन चित्रों को छापना शुरू किया, लेकिन वहां वह प्रतिस्पर्धा में नहीं टिक पाए। पत्रिका के मालिकों का दावा है कि प्लेब्वॉय के इंटरनेट एडिशन के यूजर्स की संख्या एक करोड़ 60 लाख से अधिक है। जहां पत्रिका के पाठक की औसत आयु 47 साल थी, वह भी अब घटकर केवल 30 साल रह गई है।
अब यह पत्रिका अपनी साफ-सुथरी छवि लेकर आएगी। इसमें न्यूड फोटो नहीं होंगे, लेकिन सेमी न्यूड अवश्य होंगे। दुनियाभर की पत्रिकाओं में सेमी न्यूड छप रहे हैं। वैसे ही अब प्लेब्वॉय में भी छपेंगे। अमेरिका में सेक्स क्रांति लाने वाली इस पत्रिका को यह दिन भी देखने पड़ेंगे, इसकी कल्पना उन्होंने पहले शायद ही कभी की हो।
प्लेब्वॉय पत्रिका में हमेशा बौद्धिक कंटेंट परोसा गया है। दुनिया की जानी-मानी हस्तियों के इंटरव्यू इसमें छपे, जिनमें मार्टिन लूथर किंग से लेकर जिमी कार्टर तक शामिल हैं। मर्लिन मुनरो, मेडोना, नओमी केम्पबेल, शेरोन स्टोन जैसी मशहूर हस्तियों ने प्लेब्वॉय के लिए न्यूड फोटो सेशन करवाए। जानी-मानी फेमिनिस्ट लेखिकाओं ने प्लेब्वॉय में कालम लिखे और रिपोर्टिंग भी की। प्लेब्वॉय के पहले अंक में ही मर्लिन मुनरो की रंग-बिरंगी तस्वीर कवर पेज पर छपी थी। जीवन के सभी महत्वपूर्ण, कलात्मक और व्यावसायिक मुद्दों पर इस पत्रिका में गहरी चर्चाएं होती रही। इनमें पिकासो से लेकर नित्जे तक और सेक्स से लेकर जा़ज तक शामिल हैं। पत्रिका मानती है कि उसने बड़े ही क्रांतिकारी तरीके से प्रकाशन कार्य किया है। सेक्स को लेकर भी पत्रिका में तरह-तरह के कॉलम छपते रहे हैं। शराब, होटलिंग, ज्वेलरी, फैशन, टाइलेटरिज और विलासिता की हर चीज पर पत्रिका के रंगीन पन्ने भरे रहते है।
प्रसार घटने के साथ ही प्लेब्वॉय का मुनाफा भी घटता चला गया। हालत यह हो गई कि मुनाफा घटते-घटते नुकसान में बदल गया और तीस लाख डॉलर साल के नुकसान तक पहुंच गया। ऐसे में कंपनी को यह कड़ा फैसला करना पड़ा कि वह न्यूड फोटो छापना बंद करें और उसे लाइफस्टाइल मैग्जीन बनाने के लिए प्रयास शुरू करें।
दिसंबर 1953 में जब प्लेब्वॉय पत्रिका का प्रकाशन शुरू हुआ था, तब लोगों ने उसे हाथोंहाथ लिया था। पत्रिका के प्रकाशन की शुरूआत एक हजार डॉलर का कर्ज लेकर हुई थी। बाद में इस पत्रिका ने अपने अन्य प्रॉडक्ट भी शुरू किए और कंपनी का नाम बदलकर प्लेब्वॉय इंटरप्राइजेस रख दिया गया। धीरे-धीरे यह ब्रांड नेम बहुत लोकप्रिय भी हो गया। शुरू में पत्रिका ने कुछ साल तक विश्व प्रसिद्ध लेखकों के मशहूर उपन्यासों और कहानियों को भी प्रकाशित किया था। उसमें कार्टून भी होते थे और कलाकारों, अर्थशास्त्रियों, नेताओं, लेखकों, धर्मगुरूओं, फिल्म डायरेक्टर और एक्टर के इंटरव्यू भी छापे जाते थे। कुल मिलाकर एक ऐसी पारिवारिक पत्रिका थी, जिसमें नंगेपन के साथ ही स्तरीय पठनीय सामग्री भी मौजूद थी। पहले अंक में मशहूर अभिनेत्री मार्लिन मुनरो का जो न्यूड छापा गया था, वह एक कैलेंडर के लिए शूट हुआ था। पहले अंक की कीमत ही 50 डॉलर थी। पहला अंक हाथों-हाथ बिक गया था और उसने अच्छी कमाई करवाई थी।
1970 के दशक तक आते-आते प्लेब्वॉय पत्रिका अच्छी खासी लोकप्रिय हो चुकी थी। प्लेब्वॉय के प्रतिस्पर्धी भी बाजार में आ गए थे, जिनमें पेंट हाउस और उई नामक पत्रिकाएं प्रमुख थी। बाद में गैलेरी, मौqक्सम, एफएचएम और स्टफ जैसी पत्रिकाएं भी बाजार में आ गर्इं। इससे बाजार प्रभावित हुआ।
पत्रिका ने अपनी पचासवीं सालगिरह पर लॉस वेगास, लॉस एंजेल्स, न्यू यॉर्क और मास्को में भारी भरकम इवेंट आयोजित किए। विद्यार्थियों के लिए नए-नए कॉलम शुरू किए गए। इसके बावजूद इंटरनेट के कारण प्लेब्वॉय का कारोबार बढ़ नहीं पाया। हालत यह हो गई कि संयुक्त अंक निकालकर साल में बारह के बजाय 10 अंक छापने का ही फैसला किया गया। कई साल से पत्रिका के प्रकाशकों को सलाह दी जा रही थी कि वे इसमें न्यूड छापना बंद कर दे, ताकि लोग इसे अपने घर पर मंगा सके और सबके सामने इसे पढ़ा जा सके। यह भी सलाह दी गई कि अगर पूरे अंक से न्यूडिटी कम नहीं की जा सके, तो कम से कम कवर पेज पर तो नंगे फोटो नहीं छापे जाए।
इंटरनेट के आगमन के बाद प्रिंट मीडिया में आए बदलावों पर अनेक प्रकाशकों ने ध्यान दिया है और कई प्रकाशकों ने तो अपने प्रकाशन भी बंद कर दिए। प्लेब्वॉय को प्रकाशन बंद करने की स्थिति का सामना अभी नहीं करना पड़ रहा है, क्योंकि उसने अपनी आय के अन्य स्त्रोत तैयार कर लिए है। अब भी कई लोगों का यह मानना है कि प्लेब्वॉय का प्रसार भले ही बहुत कम रह गया हो। उसकी खूबी उसकी न्यूड तस्वीरें ही बनी रही है। अगर वह न्यूड छापना बंद कर देगा, तो जितना प्रसार अभी बचा है, वह भी नहीं रह पाएगा।