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19 मई को पांच राज्यों के चुनावी नतीजे आने के बाद मीडिया में जिस तरह की रिपोर्टिंग हो रही है, उससे लगता है कि मीडिया ने निष्पक्षता से सोचना ही बंद कर दिया है। अब तो मीडिया भी जुमलेबाजी करने लगा है। तथ्यों को मनचाहे तरीके से विश्लेषित करके ऐसे परोसा जा रहा है, मानो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का नामो-निशान मिट गया है।

आधे भारत और 52 करोड़ आबादी पर बीजेपी का शासन हो गया। कांग्रेस के पास केवल चार राज्य बचे। असम में बीजेपी ने इतिहास रच दिया। कांग्रेस की विफलताओं की कहानियां नए-नए शब्दों और मुहावरों के साथ परोसी जा रही है। इस सब में ममता बनर्जी और जयललिता की शानदार उपलब्धियों को फीका बताया जा रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने शीर्षक दिया कि जून में राज्यसभा में भी बीजेपी का बहुमत हो जाएगा। पूरी खबर पढ़ी, तब पता चला कि अखबार जून 2019 की बात कर रहा है। नतीजों के पहले चुनावी सर्वेक्षण के बहाने कई चैनल इसी तरह की बातें फैला भी रहे है।

पांच राज्यों में से तमिलनाडु की 234 और पुडुचेरी की 30 सीटों में से बीजेपी को मिला है निल बटे सन्नाटा, यानि शून्य। केरल की 140 सीटों में से बीजेपी को मिली है 1 सीट और पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में से बीजेपी को मिली है 3 सीटें। यानि चार राज्यों की 698 में से बीजेपी को मिली है 4 सीटें। कांग्रेस को केरल में 46, पश्चिम बंगाल में 42, असम में 26, तमिलनाडु में 9 और पुडुचेरी में 17 यानि यानि कुल मिलाकर 140 सीटें। असम में बीजेपी को 126 में से 86 सीटें मिली है और कांग्रेस को मिली है 26। इस तरह पांच राज्यों में बीजेपी को मिली 90 सीटें और कांग्रेस को मिली 140।

असम में कांग्रेस पन्द्रह सालों से राज कर रही थी। चुनाव हारने के बाद भी उसकी सीटें 26 बची है। 52 सीटों का घाटा कांग्रेस को जरूर उठाना पड़ा, लेकिन प्रमुख विरोधी पार्टी होने के बावजूद यह कहना कि कांग्रेस खत्म हो गई, उचित नहीं है।

विधानसभा चुनावों के इस नतीजे का राज्यसभा में तत्काल कोई असर नहीं पड़ने वाला। असम में बीजेपी की इस शानदार जीत का असर इसलिए नहीं होगा कि वहां से जून 2019 से पहले कोई सदस्य राज्यसभा में जाने वाला नहीं है। एआईएडीएमके की एक सीट जरूर बढ़ेगी। पश्चिम बंगाल, केरल और पुडुचेरी से चुनकर जाने वाले राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल भी अभी चल रहा है। इस साल यहां से कोई नया सदस्य चुनकर जाने वाला नहीं है। अगस्त 2017 में पश्चिम बंगाल से चुनकर जाने वाली 6 सीटें खाली होगी और केरल की 3 सीटें जुलाई 2018 में खाली होंगी। पुडुचेरी की सीट अक्टूबर 2021 में खाली होगी। जून 2016 में राज्यसभा के लिए 57 सदस्य चुने जाने है, जो तमिलनाडु, महाराष्ट्र, हरियाणा, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और उत्तरप्रदेश से चुने जाएंगे। बीजेपी को इन 57 सीटों में से 18 सीटें मिल सकती है, जो अभी की सीटों से चार अधिक है। अभी राज्यसभा में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है, जिसके 60 सदस्य है। अगले महीने होने वाले चुनाव में यूपीए के सदस्यों की संख्या 70 रह सकती है और एनडीए 76 पर आ सकता है। ऐसे में बीजेपी के लिए जरूरी होगा कि क्षेत्रिय पार्टियों से मिल-जुलकर रहे। इन क्षेत्रिय पार्टियों में समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, बीजेडी, बहुजन समाज पार्टी और एआईएडीएमके प्रमुख है। राज्यसभा में मनोनीत सदस्य पार्टी का व्हिप मानने के लिए बाध्य नहीं होते।

किसी भी लोकतंत्र में विपक्ष का अपना महत्व होता हैं। जितना महत्व सत्तारूढ़ दल का है, उतना ही विपक्ष का है, इसलिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का नामो-निशान मिटा देना जैसे मुहावरे इस्तेमाल करने से मीडिया को बचना चाहिए।

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