Bookmark and Share

इंदौर वह शहर है जहां से हिन्दी पत्रकारिता पुष्पित-पल्लवित हुई है। इंदौर से आज हिन्दी के नईदुनिया, दैनिक भास्कर, चौथा संसार, नवभारत टाइम्स, इंदौर समाचार, स्वदेश, विश्वभ्रमण, अवंतिका, दस्तक, प्रभातकिरण (सांध्य दैनिक), अग्निबाण (सांध्य दैनिक) और अंग्रेजी दैनिक प्रâी प्रेस और गढ़ा क्रानिकल के अलावा करीब दो सौ से भी अधिक साप्ताहिक अखबार निकलते हैं। दैनिक भास्कर का पूरे देश में विस्तार इंदौर आगमन के बाद ही हुआ। नईदुनिया ऑफसेट प्रिंटिंग के जरिए छापा जाने वाला तो पहला हिन्दी दैनिक है ही, नईदुनिया ने ही सबसे पहले कम्पोजिंग की कम्प्य्टूर आधारित पद्धति अपनाई थी। नईदुनिया ही इंदौर का पहला दैनिक है, जो इंटरनेट पर पाठकों को उपलब्ध हुआ।

नईदुनिया पहला अखबार है, जिसकी सामग्री इंटरनेट पर देखी जा सकती है। नईदुनिया के सहयोग से ही विश्व का पहला हिन्दी पोर्टल शुरू हुआ था, जिसके सर्वप्रथम संपादक होने का सुयोग मुझे मिला। वेबदुनिया ने ही श्री अशोक चतुर्वेदी के नेतृत्व में हिन्दी का पहला सर्च इंजिन विधिवत रूप से शुरू किया था, जिसे शुरू के एक-डेढ़ वर्षों में बेहतर प्रतिसाद मिला। उन्होंने इसका तमिल, तेलुगू और मलयालम संस्करण भी बनाया और अक्सर वे ऐसे सर्च इंजन की चर्चा करते थे जिसे किसी भी भारतीय भाषा में इस्तेमाल किया जा सके।

अब तो दैनिक भास्कर और नवभारत के पोर्टल भी इंटरनेट पर उपलब्ध हैं, जिनमें शहरवार जानकारी, खबरें और सूचनाएं नि:शुल्क प्राप्त की जा सकती हैं। ये दोनों पोर्टल आज भले ही वेबदुनिया से आगे निकल गए हों, लेकिन इसकी शुरुआत वेबदुनिया ने ही की थी। वेबदुनिया का सर्च इंजिन कभी बहुत ही बेहतर माना जाता था और वेबदुनिया की खबरों को बहुत महत्व मिलता रहा था। आज भले ही बहुसंस्करण अखबारों के पोर्टलों की तूती बोलती हो, क्योंकि वे इंटरनेट पर नि:शुल्क उपलब्ध हैं, पर इसकी प्रेरणा तो इंदौर और नईदुनिया की ही स्वस्थ परंपरा है।

नईदुनिया के शुरुआती दिनों में इससे जुड़े अनेक पत्रकार आज देश के प्रमुख स्थानों पर हैं। कालांतर में यह स्थिति दैनिक भास्कर ने अपना ली और दैनिक भास्कर पत्रकारिता के विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित हो गया। आज दैनिक भास्कर के लगभग बीस शहरों में संस्करण प्रकाशित हो रहे हैं, जिनमें से अधिकांश में इंदौर के दैनिक भास्कर में वरिष्ठ पत्रकार श्री श्रवण गर्ग के द्वारा प्रशिक्षित-संस्कारित पत्रकार मोर्चा संभाले हुए हैं। चंडीगढ़, शिमला, जयपुर, जोधपुर, श्री गंगा नगर, कोटा, रायपर, जबलपुर, ग्वालियर, नागपुर, भोपाल, मुंबई, नई दिल्ली, रोहतक, हिसार... किसी भी शहर में जाइए, वहां दैनिक भास्कर के ऐसे पत्रकार मिल जाएंगे, जो इंदौर के होंगे। दैनिक भास्कर के विस्तार के साथ-साथ पत्रकारिता से जुड़े साथियों का भी फलक व्यापक होता गया है। हिन्दी के लगभग सभी अखबारों और पत्रिकाओं में दैनिक भास्कर से सम्बद्ध रहे पत्रकार उपलब्ध हैं।

अगर दैनिक भास्कर ने हिन्दी पत्रकारिता में नए मापदंड कायम किए हैं, तो उसका श्रेय काफी हद तक इंदौर और इंदौर की पत्रकारिता को ही है। जो बातें किताबों में सिद्धांत के रूप में लिखी जाती थीं, उन बातों को दैनिक भास्कर ने सच कर दिखाया है। दैनिक भास्कर ने बिना किसी भेदभाव के सभी वर्गों और धर्मों के लोगों के समाचारों को स्थान देने के साथ ही जनजीवन में बिखरी विविध घटनाओं को भी फीचर के रूप में छापना शुरू किया, जिससे उसकी पठनीयता बढ़ गई। दैनिक भास्कर ने अपने समाचार और फीचर पृष्ठों के साथ ही विज्ञापनों के क्षेत्र में भी नित नए प्रयोग किए और ले-आउट के बारे में भी। नतीजा यह हुआ कि इस प्रयोगधर्मी अखबार ने सभी परंपरागत बाधाओं को पार कर लिया और अपने प्रसारण के नेटवर्वâ का वृहत जाल पैâला लिया। दैनिक भास्कर ने अपने मोडम संस्करणों के माध्यम से तो जैसे क्रांति ही कर दी। आज लगभग हर जिले के चार-चार पृष्ठों के नियमित संस्करण छापे जा रहे हैं। इस तरह दैनिक भास्कर ने पाठक का वह राष्ट्रीय, प्रादेशिक और जिला स्तर की संपूर्ण सूचनाएं और जानकारियां उपलब्ध करा रहा है।

इंदौर ने पत्रकारिता के अनेक शीर्षस्थ व्यक्तित्व दिए हिैं। श्री श्रवण गर्ग, श्री आलोक मेहता, श्री प्रभाष जोशी, श्री रमेश निर्मल, श्री यशवंत व्यास, श्री संजीव आचार्य, श्री आकाश त्रिपाठी, श्री सिद्धार्थ शर्मा, स्व. श्री शाहिद मिर्जा जैसे लोग तो इसमें हैं ही, श्री राजेन्द्र माथुर, श्री राहुल बारपुते, श्री शरद जोशी जैसे पत्रकार और रचनाकार भी हैं। इंदौर के अनेक पत्रकारों के बारे में तो यह बात गर्व से कही जा सकती है कि ये पत्रकार केवल एक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि अपने आप में पूरी संस्थाएं हैं। ऐसे एक-दो नहीं, अनेक पत्रकार मिल जाएंगे, जिन पर शहर फख कर सकता है। ऐसे लोगों की लंबी पेâहरिस्त बनाई जा सकती है, जिन्होंने भाषा और पत्रकारिता को मुहावरा और शैली प्रदान की है।

इंदौर से ही १६ दिसंबर १९८२ से चौथा संसार दैनिक का प्रकाशन वरिष्ठ रचनाकार और पत्रकार श्री प्रभाकर माचवे के संपादकीय नेतृत्व में प्रारंभ हुआ। चौथा संसार ने इंदौर में चल रही पत्रकारिता में भारी उथल-ुथल मचा दी और इसके विशिष्ट संपादकीय तथा बेबाक समाचारों की प्रस्तुति ने आम जनजीवन को झकझोर कर रख दिया। श्री प्रभाकर माचवे के बाद श्री नरेश मेहता ने इस अखबार का सांदकीय दायित्व संभाला और श्री रमण रावल के संपादन में यह अखबार मध्यप्रदेश के गांवों और कस्बों का सर्वाधिक पढ़ा जाने वाला अखबार है।

मध्यप्रदेश और विदर्भ का प्रमुख दैनिक नवभारत इंदौर से सन् १९६० से छपना शुरू हुआ था। प्रादेशिक छवि वाले इस अखबार ने मध्यप्रदेश में अनेक स्थानों पर गहरी पैठ तो बनाई ही है, खेल के समाचारों में भी अपनी विशिष्ट शैली विकसित की है और आज इस अखबार की अनेक खूबियों में शहरों के विस्तृत और निष्पक्ष समाचारों के साथ ही खेल के समाचारों का प्रकाशन भी शामिल है। इंदौर स्थित नवभारत के संपादक डॉ. अशोक कुमट खुद भी अनेक खेल संगठनों से जुड़ें हैं और क्रिकेट की शीर्ष संस्थाओं में पदाधिकारी भी हैं।

इंदौर से प्रâी प्रेस ग्रुप ने प्रâी प्रेस का प्रकाशन भी इंदौर से प्रारंभ किया। इसकी प्रतिस्पर्धा में अन्य समाचार पत्र भी प्रारंभ हुए। प्रâी प्रेस ने इंदौर में अपनी बेखौफ पत्रकारिता के लिए विशेष ख्याति अर्जित की। प्रâी प्रेस अलग-अलग मुद्दे वक्त-वक्त पर उठाता रहा है और प्रशासन को झकझोरता रहता है। प्रâी प्रेस की खबरों को प्रशासन में आज भी खासी गंभीरता से लिया जाता है।

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी इंदौर के अपने प्रतिमान हैं। यहां डॉ. कन्हैयालाल नंदन के निर्देशन में इन केबल नेट ने इन टाइम समाचार स्थानीय चैनल पर शुरू किए। ये समाचार इतने लोकप्रिय हुए थे कि इंदौर के कई कार्यक्रम तब तक शुरू नहीं होते, जब तक कि इसके संवाददाता और वैâमरौमैन नहीं पहुंच जाते। केबल न्यूज नेटवर्वâ का यह स्थानीय संस्करण ईश्वर झामनानी के नेतृत्व में फला-पूâला। इन केबल के समाचार अब इंदौर टुडे के नाम से प्रसारित हो रहे हैं। केबल न्यूज के माध्यम से ही ओटीजी समूह ने जनक गांधी और रेखा गांधी के नेतृत्व में न केवल समाचार बल्कि इंटरटेनमेंट और इन्फार्मेशन के चैनल शुरू किए, जहां से समसामयिक कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण शुरू किया जाने लगा। ओटीजी ने छह साल के छोटे से समय में ही इंदौर के जनजीवन में अपनी विशेष छवि बना ली।

दूरदर्शन का इंदौर केन्द्र श्री गिरिश वर्मा और श्री प्रभ जोशी के नेतृत्व में आज वैसे ही कार्यक्रम पेश कर रहा है जैसे किसी जमाने में आकाशवाणी से आया करते थे। हालांकि इंदौर के हिस्से बहुत छोटे टाइम स्लाट आ रहे हैं, लेकिन केन्द्रीय मंत्री सुमित्रा महाजन के प्रयासों से कम से कम इंदौर के पास आज अपना स्टूडियो तो है।

जब नए मीडिया के रूप में इंटरनेट का उदय हुआ तब इंदौर से ही वेबदुनिया की शुरुआत हुई थी। दुर्भाग्य से डॉट कॉम उद्योग की आज वैसी स्थिति नहीं है, जैसी होनी चाहिए थी, लेकिन फिर भी वेबदुनिया आज नईदुनिया के सहयोग से रोज नई-नई जानकारियां दे रहा है। वेबदुनिया और उसका सर्च इंजिन तो लोकप्रिय हुआ ही था, आज उसकी तर्ज पर कई नए पोर्टल भी आ गए हैं। वेबदुनिया की खूबी यह कही जा सकती है कि उसने हिन्दी में नई प्रौद्योगिकी को बढ़ावा दिया है।

आकाशवाणी और दूरदर्शन के बिना इंदौर के मीडिया जगत के कल्पना भी नहीं की जा सकती। इंदौर में अपनी स्थापना के वर्ष से ही आकाशवाणी ने देश के आकाशवाणी केन्द्रों में प्रमुख स्थान बना लिया था। इंदौर केन्द्र के कार्यक्रमों ने न सिर्पâ इंदौर के जनजीवन को खासा प्रभावित किया, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में यह विशेष रूप से पसंद किए जाते थे। खेती-गृहस्थी के नंदाजी भैराजी, घर परिवार के नट-नटी, युव वाणी के ने प्रस्तुतकर्ता, मनभावन के चयनकर्ता, प्रादेशिक समाचारों के वाचक, शामे गजल के पेश करने वाले ये सभी उस वक्त खासे लोकप्रिय थे जब दूरदर्शन नहीं आया था। पुराने केन्द्र निदेशक सर्वश्री के.के. नैय्यर, केशव पाण्डे, अमीक हनफी, करतारसिंह दुग्गल, इलाशंकर गुहा के अलावा संगीत/नाटक के क्षेत्र में श्री रसिकलाल भोजक, श्री कुमार गंधर्व, श्री मोइनुद्दीन खान, श्री सुलेमान खान, श्री रवि गरुड़, उस्ताद श्री अमीर खां, उस्ताद श्री रजब अली खां, श्री नरेन्द्र पंडित, श्री राहुल बारपुते, श्री रंजीत सतीश, श्री देवेन्द्र कौर मधु, श्री इन्दु आनंद जैसे अनेक नाम उल्लेखनीय हैं।

इसके अलावा भाईलाल बारोटजी, श्री प्रभु जोशी, श्री लक्ष्मेंद्र चोपड़ा, श्री पी.सी. हेम्ब्रम, श्री तेजिंदरसिंह गगन, श्री संदीप श्रोत्रिय, श्री स्वतंत्रकुमार ओझा, श्री चंद्रशेखर दुबे, श्री हरेन्द्र कोटिया, श्री अशोक चतुर्वेदी, श्री राजेन्द्र शुक्ला, श्री वीरेन मुंशी, श्री संतोष जोशी जैसे आकाशवाणी से जुड़े नामों का एक लंबा सिलसिला है, जो अपने-अने क्षेत्रों में विशिष्ट हस्ताक्षर रहे हैं। इंदौर में आने वाली शायद ही कोई महत्वपूर्ण शख्सियत हो जिसे आकाशवाणी ने अपने स्नेह जाल में न बांधा हो।

प्रिंट मीडिया की ओर वापस लौटते हुए यदि इतिहास नजरसानी करें तो पाएंगे कि मालवा अखबार यहां का पहला अखबार था, जिसका प्रकाशन ६ मार्च १८४९ से शुरू हुआ था। इसके सम्पादक थे पंडित धर्मनारायण और हिन्दी उर्दू में एक साथ अपने वाला यह अखबार अंग्रेजों के पॉलिटिकल एजेंट हेमिल्टन के दिमाग की उपज था। अपने आजाद ख्याल विचारों के लिए इस अखबार के संपादक को जेल भी जाना पड़ा था। इंदौर से प्रकाशित वीणा साहित्यिक पत्रकारिता के ७५ वर्ष पूरे कर चुकी है और स्वदेशी का भावना का पोषण करने वाला स्वदेश अपने जीवन के ३६ साल पूरे कर चुका है। समय-समय पर फिल्म पत्रकारिता में श्री राम ताम्रकर, श्री जयप्रकाश चौकसे और श्री ब्रजभूषण चतुर्वेदी अपने विशिष्ट प्रकाशन लाते रहते हैं और दैनिक दोपहर, लोकस्वामी जैसे प्रखर पत्र, शांत जनजीवन में लहरें पैदा करने में सफल रहे हैं।

इसके साथ इंदौर के पत्रकारों ने न केवल विभिन्न पत्रकार संगठनों में, बल्कि इंडियन न्यूज पेपर सोसायटी के भी नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

-मालवा का सिरमौर इंदौर से

Search

मेरा ब्लॉग

blogerright

मेरी किताबें

  Cover

 buy-now-button-2

buy-now-button-1

 

मेरी पुरानी वेबसाईट

मेरा पता

Prakash Hindustani

FH-159, Scheme No. 54

Vijay Nagar, Indore 452 010 (M.P.) India

Mobile : + 91 9893051400

E:mail : prakashhindustani@gmail.com