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दैनिक हिन्दुस्तान (जीने की राह)
दैनिक हिन्दुस्तान (जीने की राह)
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'मैं तो केवल पांचवीं तक पढ़ा हूँ, मुझे भारतीय कानूनों का क्या पता?'' यह बात कही थी पाकिस्तानी गायक राहत फ़तेह अली खान ने दिल्ली एयरपोर्ट पर पकड़े जाने के बाद. जयपुर में एडमैन अजय चोपड़ा के बेटे विरल कि शादी में गाना बजाना करके वे दुबई होकर कराची जानेवाले विमान में जाने को थे कि वे गैरकानूनी रूप से 124000 डॉलर नकद और 18600 डॉलर के डीडी के साथ पकड़े गए थे. ज्यादा पूछताछ की गयी तो रोने लगे. उन्हें कोर्ट में पेश किया जाता इसके पहले ही पकिस्तान का विदेश मंत्रालय सक्रिय हो गया और उन्हें छोड़ दिया गया. इसी चक्कर में उनकी वीसा की मियाद बढ़ा दी गयी.

भले ही उन्होंने अपने नाम के मध्य से 'सिंह' हटा लिया हो, लेकिन वे हैं सिंह ही, तभी तो गत 13 नवम्बर को यूएस में ह्यूस्टन एअरपोर्ट पर जब उन्हें तलाशी के लिए रोका गया तो उन्होंने सिंह की तरह हुंकार कर कहा -- कोई भी मेरी पगड़ी को छूने की जुर्रत मत करना. उनकी गर्जना का असर हुआ और अमेरिकी आव्रजन अधिकारी ठिठके. तभी उन्होंने आव्रजन के नए नियम उन अफसरान को बताये जो उन्हें नहीं मालूम थे. वरिष्ठ अफसरों से इसकी पुष्टि कराने तक उन्हें बीस- पच्चीस मिनिट वहां रुकना पड़ा, लेकिन बात का हल्ला इतना मचा कि अमेरिकी विदेश विभाग को उनसे माफी माँगनी पड़ी. जब ये घटना घटी तब वे संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि थे.

वे शाहरुख़ की तरह मेहनताना लेते हैं, अमिताभ की तरह वक़्त के पाबन्द हैं, गोविंदा की तरह कॉमेडी करते हैं, रजनीकांत की तरह डांस और फाइट के सीन फिल्माते हैं, सलमान की तरह कसरत करते है, मल्लिका सहरावत की तरह फ़िल्मी नाम बदल चुके हैं, अदनान सामी की तरह वजन घटा चुके हैं, राखी सावंत की तरह लिपोसक्शन करा कर अपनी ठोडी सुन्दर बना चुके हैं, उनके बेटे, भाई, जीजा, भतीजे आदि सभी फिल्मों से जुड़े रहे हैं और अब ये सभी राजनीति के खिलाड़ी हैं. मुन्नाभाई एमबीबीएस के तेलुगु रीमेक शंकर दादा एमबीबीएस में वे ही हीरो थे.

माता-पिता ने उन्हें करोड़ों में एक मानकर नाम दिया था - किरोड़ी सिंह. वे बैसला हैं यानी गुर्जर. बहादुरी उन के खून में है. स्कूल में टीचर थे, लेकिन फौजी पिता के नक्श-ए-कदम पर चलते हुए सेना में सिपाही बने. 1962 के भारत - चीन और 1965 के भारत - पाकिस्तान युद्ध में बहादुरी से लड़े. वे राजपुताना राइफल्स में थे और पाकिस्तान के युद्धबंदी भी रहे. सीनियर आर्मी अफसर उन्हें 'जिब्राल्टर की चट्टान' कहते थे. उनके साथी कमांडो फौजी उन्हें 'इन्डियन रेम्बो' कहा करते थे. बहादुरी, शक्ति और मेहनत के कारण वे तरक्की पाते-पाते लेफ्टिनेंट कर्नल के ओहदे तक पहुंचे. रिटायर होने के बाद देश के लिए लड़नेवाला फौजी अपनी जाति के आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलनों का नेतृत्व करने लगा.

तानाशाह बुरा, केवल बुरा ही होता है. छवि चमकाने के लिए वह अकसर अच्छे काम का दिलासा देता है. वह कुछ भी कर ले, सबसे बुरा तो वह खुद ही होता है. मिस्र में हुस्नी मुबारक ने तीन दशकों तक जनता की छाती पर मूंग दले हैं, जिसे जनता माफ़ नहीं कर सकती. उन्होंने भले ही महंगाई पर काबू किया हो; बेरोजगारी पर लगाम लगाई हो; लोगों को सस्ते घर, दवा, कपड़े, फर्नीचर दिलाया हो; भ्रष्टाचार से थोड़ी राहत दिलाई हो; अर्थ व्यवस्था को थोड़ा सुधार हो; पुराने तानाशाह के मुकाबले वे भले ही थोड़े नरम हों; पर वे हैं तो तानाशाह ही और तानाशाह कभी भी भला तो हो ही नहीं सकता. मुबारक ने करोड़ों पुण्य किये हों, पर उनका तानाशाही का पाप क्षमायोग्य नहीं. इतिहास में वे कूड़े की वस्तु हैं.

आस्ट्रेलिया की सरकार ने भारतीय डॉक्टर मोहम्मद हनीफ़ को आतंकवाद समर्थक आरोपों से बरी करके साबित कर दिया कि कोई भी कानून से ऊपर कोई नहीं है और न ही कानून से नीचे. आस्ट्रेलिया ने डॉ. हनीफ़ को मुआवज़े के रूप में भी करीब दस लाख डॉलर दिए हैं और माफ़ी भी मांगी है. यह मामला उतना सीधा है नहीं, जितना नज़र आता है. डॉ. हनीफ़ को आस्ट्रेलियाई सरकार ने बिना किसी कानूनी दस्तावेजों के 2 जुलाई से 27 जुलाई 2007 तक, यानी 25 दिन बिना किसी सबूत के गिरफ्तार किये रखा, जो आस्ट्रेलिया के इतिहास की सबसे लम्बी बिना कारण, बिना सबूत गिरफ्तारी थी. वे पहले इंसान थे, जिन्हें आस्ट्रेलिया में 2005 के आतंक विरोधी क़ानून के तहत पकड़ा गया था और उनकी गैरकानूनी गिरफ्तारी के 48 घंटों के भीतर ही वहां के पूर्व प्रधानमंत्री जान हार्वर्ड उनके पक्ष में सक्रिय हो उठे थे.

पाकिस्तानी लेखक हुसैन मुर्तजा नक़वी के बारे में हिन्दुस्तान में आज मेरा कालम. कुछ लेखक सोचने को मज़बूर कर देते हैं और कुछ लेखक चकित होने को. ...लेकिन नक़वी दोनों के लिए मज़बूर कर देते हैं. उन्हें हाल ही जयपुर साहित्य महोत्सव में ५० हज़ार डॉलर के अवार्ड के लिए चुना गया. कुछ लेखक सोचने को मज़बूर कर देते हैं और कुछ लेखक चकित होने को. ...लेकिन पाकिस्तानी लेखक हुसैन मुर्तजा नक़वी दोनों के लिए मज़बूर कर देते हैं. उनके पहले ही उपन्यास 'होम बॉय' को जयपुर साहित्य महोत्सव में ५० हज़ार डॉलर के पहले डीएससी साउथ एशियन लिटरेचर अवार्ड के लिए चुना गया.

टाइम पत्रिका ने इस बार 'पर्सन ऑफ दी ईयर' ऐसे व्यक्ति को माना है, जो केवल 26 साल का है. खरबपति है. जिसने डिग्री नहीं ली और बीच में पढ़ाई छोड़ दी. जिसके जीवन से प्रेरित हॉलीवुड फीचर फिल्म बना चुका है. जिसका बचपन कंप्यूटर गेम खेलने में नहीं, बनाने में बीता. जो १६ की उम्र में अंगेजी के साथ फ्रेंच, हीब्रू, लेटिन, ग्रीक भी बोल-पढ़ लेता था. हार्वर्ड में पढ़ाई के दौरान उसने लोगों को जोड़नेवाली सोशल नेटवर्क वेबसाइट बनाई, जिसके 55 करोड़ सदस्य हैं. अगर इन सदस्यों का कोई देश होता तो चीन और भारत के बाद तीसरा सबसे बड़ा देश होता. आज अमेरिका के 70 प्रतिशत लोग उससे जुड़े हैं. कई देशों में इस साइट पर रोक है. जी हाँ, हम फेसबुक के जनक मार्क जुकेरबर्ग की बात कर रहे हैं.

अगर आप हमेशा पीछे ही देखते रहेंगे तो आगे कैसे जायेंगे? इसी विचार से दारुल उलूम के मौलाना गुलाम मोहम्मद वस्तनवी की भूमिका का पता चलता है. वे 145 साल पुराने दारुल उलूम, देवबंद के पहले कुलपति है जो उत्तरप्रदेश के बाहर के हैं. वस्तनवी के पद संभालते ही वे लोग सक्रिय हो गए जो पीछे और केवल पीछे ही देखना पसंद करते हैं. वस्तनवी गुजरात के वस्तन गाँव के रहने वाले हैं जो सूरत के पास है. वे पद संभालते ही विवादों में आ गए, क्योंकि उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री को गालियाँ नहीं दीं, जैसा कि चलन में है और इसीलिये वस्तनवी की निंदा हो रही है.

शीला की जवानी' देख लोग 'मुन्नी की बदनामी' भूल जाएँगे ? कैटरीना ने इस बेली डांस में अश्लीलता का सहारा नहीं लिया है. वैसे कैट अंग प्रदर्शन में कंजूसी नहीं करतीं. चालीस पार के हीरो उन्हें बैसाखी के तौर पर इस्तेमाल करते हैं. वे फिल्मों में कामयाबी के शिखर पर जाने के लिए मौजूद हर सीढ़ी की महत्ता जानती हैं और किसी भी सीढ़ी का इस्तेमाल करने में संकोच नहीं करतीं.
यह कहना गुस्ताख़ी होगी कि कैटरीना कैफ़ 'आयटम' गर्ल हैं. बॉर्बी डॉल जैसी कैट आजकल एक्टिग भी करने लगी हैं. उन्हें फिल्मफेअर को छोड़कर तमाम पुरस्कार मिल चुके हैं--स्टारडस्ट, ज़ी, स्क्रीन, आइफ़ा, गोल्डन कला आदि-आदि. वे 2010 की ख़ास न्यूज़मेकर हैं.

उन्होंने पढाई तो की है अकाउंट्स के लेखन की, पारिवारिक धंधा है कचरे का प्रबंधन, उन्हें सम्मान मिला है 'फ्रेंड्स ऑफ़ टैक्स पेयर्स' का, रिकार्ड बनानेवाली टी पार्टी का आन्दोलन चलने में उनकी भूमिका भी रही है, वे हैं अमेरिका की मशहूर इंडियन, जिन्होंने साउथ कैरोलिना प्रान्त की 116वीं गवर्नर की शपथ ली हैं. उनके पहले भारतीय मूल के पीयूष अमृत जिंदल अमेरिकी गवर्नर बन चुके हैं, जो बॉबी जिंदल के नाम से मशहूर हैं. अब अमृतसर की बेटी ने नम्रता रंधावा गवर्नर बनी हैं, जो वहां शादी के बाद निक्की बेली बन गयी हैं. वे वर्तमान में अमेरिका की सबसे कम उम्र की गवर्नर भी हैं.

अजीम प्रेमजी ने 8846 करोड़ का दान दिया. अजीब शख्स है !!! IPL टीम नहीं खरीदी, हवाई जहाज़ बेड़ा नहीं लिया, कैलेंडर नहीं छापे, फिल्में नहीं बनाईं, किसी आईलैंड की मिल्कियत नहीं चाही, मीडिया टायकून नहीं बना.... ढाई करोड़ दे पामेला एंडरसन से घर की झाड़ू भी नहीं लगवाई....क्या दूसरे धंधेबाज़, साहूकार, शराब व्यवसायी, भू माफ़ि...या शिक्षा लेंगे?
विप्रो के प्रमुख अजीम प्रेमजी माइक्रोसाफ्ट के बिल गेट्स के रास्ते पर हैं. दो दिन बाद, 7 दिसंबर से प्रेमजी की संपत्ति में से 8, 846 करोड़ रुपये के बराबर संपत्ति अजीम प्रेमजी फाउंडेशन नामक दान खाते में ट्रांसफर होना शुरू हो जायेगी.