
फिल्मफेयर अवार्ड का नाम पहले फिल्मफेयर अवार्ड नहीं था। 1954 में जब इसकी शुरुआत हुई थी, तब इसका नाम क्लेअर मेंडोसा अवार्ड फंक्शन था। क्लेअर मेंडोसा टाइम्स ऑफ इंडिया के फिल्म समीक्षक थे और उसी साल 1954 में उनकी मृत्यु हुई थी।

शुरूआत में आधार से जो अपेक्षाएं थी, वे पूरी नहीं हो पा रही हैं। इसका कारण यह है कि हर किसी को आधार पर आपत्ति है। आपत्ति का मुख्य कारण है, आधार से गोपनीयता भंग होने का खतरा। जिन लोगों को आधार से लाभ होना चाहिए, उनका बहाना बनाकर आधार का उपयोग सीमित करने की कवायदें की जा रही है। भारतीय न्याय प्रक्रिया तो है ही, इस तरह की रूकावटों के लिए प्रख्यात। भारत की एक तिहाई आबादी सोशल मीडिया पर हैं। जहां उनकी पूरी जन्मपत्री सार्वजनिक है। फेसबुक से जुड़ते ही 82 ऐप पीछे लग जाते है। लोकेशन से लेकर गर्लफ्रेंड की फोटो तक का हिसाब फेसबुक के सर्वर पर दर्ज रहता है, लेकिन भारत के लोगों को तकलीफ है आधार से। आधार से गोपनीयता भंग हो जाएगी साहब। आधार कार्ड में क्या दर्ज है? और जब आप भारत में पैदा हुए, भारत सरकार की तमाम सुविधाओं का फायदा उठा रहे हो, तो सरकार को आपके बारे में जानने का अधिकार भी होना चाहिए या नहीं? बाद में आप शिकायत करते है कि सरकार को यह काम करना चाहिए, वह काम करना चाहिए आदि-आदि।

संसद में चल रहे वर्तमान बजट सत्र में राज्यसभा की खाली सीटों पर चुनाव भी होना है। भारतीय जनता पार्टी ने जिन लोगों के नाम राज्यसभा में भेजने के लिए उपयुक्त माने है, उनमें पत्रकार स्वप्न दासगुप्ता का नाम शामिल है। कांग्रेस ने महाराष्ट्र से जाने-माने पत्रकार कुमार केतकर को राज्यसभा में भेजने का फैसला किया है।

ब्रजेश कानूनगो ने व्यंग्य के साथ कविताएं और लघु कहानियां भी लिखी हैं। बाल गीतों और बाल कथाओं के लेखन में भी उनका हस्तक्षेप है। वैसे तो यह उनकी नौवीं किताब है, लेकिन व्यंग्य संग्रह तीसरा ही है। पुस्तक की भूमिका में ब्रजेश कानूनगो ने लिखा है कि जिन बातों को व्यंग्यकार मूल्यहीनता और विसंगति मानता है, दरअसल अब नई संस्कृति और नए मूल्य के कारण ये विसंगतियां अजब रूप लेने लगी है। ब्रजेश कानूनगो ने यह बात स्वीकार की है कि उनके व्यंग्य लेखन के मूल में अखबारों में प्रकाशित होने वाले लोकप्रिय स्तंभों की भूमिका रही है। उनके व्यंग्य अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित भी होते रहे है। वे मानते है कि अगर मेरे लिखे से किसी का मन बहल जाए। आंसु की कुछ बूंदे झलक पड़े, दिल में कोई छोटी सी टीस उठ जाए या कोई ठहाका लगा दें, तो उनका लिखना सार्थक है। साहित्य के ५६ पकवानों में इसीलिए उन्होंने मेथी की भाजी भी परोस दी है। इस तरह यह किताब मेथी पर करेला हो गई है।

पूर्वोत्तर में 3 राज्यों के चुनाव नतीजे आने पर अब त्रिपुरा में बीजेपी पूर्ण बहुमत से और नागालैंड में सहयोगी दल (एनडीपीपी) की मदद से सरकार बनाने जा रही है। इस तरह भारत के 29 राज्यों में से 21 राज्यों में भारतीय जनता पार्टी और सहयोगी दलों की सरकार होगी। मेघालय में कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा रहा, लेकिन बीजेपी ने वहां भी अच्छा खाता खोला है।

हिन्दी के जाने-माने व्यंग्यकार जवाहर चौधरी ने दलित जीवन की त्रासदी भरी घटनाओं को लेकर गमन की रचना की है। यह दलित आत्मकथा लेखन की तरह लिखा गया एक लघु उपन्यास है, जो केवल 98 पृष्ठों में भी कई ऐसी घटनाएं छोड़ जाता है, जो समाचार पत्रों और टेलीविजन न्यूज चैनलों की खबरों की तरह एक-एक करके आंखों के सामने से गुजरने लगती है। दलित त्रासदी के अलावा यह किताब धर्म की गलत व्याख्या को भी साहस के साथ उजागर करती है। आजादी के इतने साल बाद भी इस तरह की वारदातें अब भी होती है और साबित करती है कि हम अभी भी पूर्णत: सभ्य समाज नहीं बन पाए है।

आगामी 6 जुलाई को जाह्नवी कपूर की फिल्म धड़क रिलीज होगी। यह फिल्म ही मराठी की सुपरहिट फिल्म सैराट का हिन्दी संस्करण होगी। धड़क फिल्म को करण जौहर प्रोड्यूस कर रहे हैं और निर्देशन कर रहे हैं शशांक खेतान । धर्मा प्रोडक्शंस की इस साल आनेवाली यह महत्वपूर्ण फिल्म होगी।

तुम्हारे जाने के बाद कृष्णकांत निलोसे का पांचवां काव्य संग्रह है। वे हिन्दी के अलावा अंग्रेजी में भी लिखते रहे हैं और उनकी रचनाएं देशभर के पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही है, लेकिन इस संग्रह की कविताएं ऐसी प्रेम कविताएं है, जो उन्होंने अपनी प्रेयसी और पत्नी इंदु के लिए लिखी है।

आगामी 6 जुलाई को जाह्नवी कपूर की फिल्म धड़क रिलीज होगी। यह फिल्म ही मराठी की सुपरहिट फिल्म सैराट का हिन्दी संस्करण होगी। धड़क फिल्म को करण जौहर प्रोड्यूस कर रहे हैं और निर्देशन कर रहे हैं शशांक खेतान । धर्मा प्रोडक्शंस की इस साल आनेवाली यह महत्वपूर्ण फिल्म होगी।

शौकिया डॉक्युमेंट्री फिल्म निर्माता और पेशे से पत्रकार अर्जुन राठौर ने कविताएं भी लिखी है, आलेख भी और व्यंग्य भी। खोजी पत्रकार के रूप में इन्होंने जहां अपनी अलग पहचान बनाई, वहीं धर्मयुग, नवनीत, कादम्बिनी, जनसत्ता, हिन्दी एक्सप्रेस आदि प्रकाशनों में कविताएं भी लिखी। रविवार, दिनमान, श्रीवर्षा, जनसत्ता आदि अखबारों में उनकी रिपोर्टिंग लोकप्रिय रही है और उनके व्यंग्य-लेख पंजाब केसरी, मेरी संगिनी, रांची एक्सप्रेस, ट्रिब्यून, दैनिक नवज्योति, अग्निबाण, प्रभात किरण, राज एक्सप्रेस आदि में भी प्रकाशित होते रहे है। अर्जुन राठौर ने 150 से अधिक डॉक्युमेंट्री फिल्में बनाई है। उनकी एक डॉक्युमेंट्री ‘ये अहिल्या की कहानी है’ भोपाल दूरदर्शन पर दिखाई गई थी। दुनिया के अनेक देशों में वे घूमे हैं और बरसों तक थाईलैंड में रहे हैं।
पाकिस्तान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी (पीटीआई) के प्रमुख इमरान खान ने तीसरी शादी कर ली। रविवार 18 जनवरी की सुबह 9 बजे निकाह की रस्में पूरी हुई। इमरान खान की पार्टी ने अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट पर इसकी जानकारी दी है। इमरान खान ने इस बार बुशरा मानेका से निकाह किया है। इमरान की यह तीसरी शादी है और बुशरा मानेका की दूसरी। 2015 में लोधरन में हुए उपचुनाव के दौरान इन दोनों की मेल-मुलाकातें हुई थी। इसके पहले इमरान की शादी ब्रिटेन की जेमिमा खान से हुई थी, जो 9 साल चली। 8 जनवरी 2015 को इमरान ने टीवी प्रजेंटर रेहन खान से शादी की थी, जो 10 महीने चली।
इमरान की नई बीवी की तस्वीरें पीटीआई ने जारी की है। यह खास तस्वीरें मेरे मित्रों के लिए :