
पुलित्जर पुरस्कार विजेता जेन वेनगार्टन ने सन 2006 में वाशिंगटन पोस्ट में बच्चों के लिए एक बड़ी मजेदार पोस्ट लिखी थी। यह कहानी एक जादूगर के बारे में थी और उसका शीर्षक था- ‘द पीकाबू पेराडाक्स’। वह पूरी पोस्ट करीब नौ हजार शब्दों की थी, जिसमें लेखक ने पूरी स्टोरी के तथ्य एक-एक करके पेश किए थे। पूरा पोस्ट बहुत धीरे-धीरे रोचकता से शुरू हुआ था और उसे पढ़ने वाले जितने भी लोग थे, वे उसका प्रभाव बहुत धीमा सा महसूस कर रहे थे। 2014 में हफिंग्टन पोस्ट ने अपने पैरेंट्स ब्लॉग कैटेगरी में उसी स्टोरी को प्रस्तुत किया।हफिंग्टन पोस्ट की वह स्टोरी केवल 700 शब्दों में थी, लेकिन उसने कमाल कर दिखाया। बड़ी संख्या में लोगों ने उसे पढ़ा और पसंद किया। वास्तव में उस पूरी स्टोरी को फन फेक्टस की तरह प्रस्तुत किया था। वास्तव में हफिंग्टन पोस्ट ने उस स्टोरी को जिस तरह से अपने यहां प्रकाशित किया, वह बेहद रोचक तरीका था और कोई भी पाठक उसे पढ़े बिना नहीं रह पाया। हफिंग्टन पोस्ट वालों को इस बात का एहसास था कि इंटरनेट पर सामाग्री को पढ़ने वाले लोग किस तरह के आलेख पसंद करते हैं।

जाकिर नाइक की संस्था इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन सहित अनेक संस्थाओं पर विदेश से चंदा लेने और उसका राजनैतिक उपयोग करने पर केन्द्र सरकार की सख्ती बढ़ती जा रही है। इससे विदेशों से चंदा लेकर अपना कामकाज चलाने वाले 25 एनजीओ के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है, क्योंकि गृह मंत्रालय ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेग्यूलेशन एक्ट (एफसीआरए) के तहत इन एनजीओ की फंडिंग पर रोक लगा दी है। गृह विभाग के प्रवक्ता का कहना है कि इस तरह की फंडिंग ‘राष्ट्रीय हित में नहीं है’। गृह मंत्रालय ने इन एनजीओ की सूची अभी तक जारी नहीं की है, लेकिन माना जाता है कि इनमें से कई ऐसे संगठन है, जो मानव अधिकारों के लिए कार्य करते हैं।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर रघुराम राजन की विदाई होते ही आरबीआई भारत में इस्लामिक बैंकिंग के दरवाजे खोलने जा रही है। इस्लामिक बैंकिंग की पहली शाखा गुजरात में खुलने की संभावना है। भारत में हिन्दुओं के बाद सबसे बड़ी आबादी मुस्लिमों की है और धार्मिक कारणों से इस्लाम में ब्याज लेना और देना दोनों ही मना है। अभी तक भारत में इस्लामिक बैंकिंग के दरवाजे इसलिए नहीं खुल पाए थे कि भारतीय कानून और नियमों के अनुसार बैंकें बगैर आर्थिक लाभ/हानि के कोई कारोबार नहीं कर सकती। भारतीय बैंकिंग व्यवस्था के एक व्यावसायिक गतिविधि माना गया है। इसलिए भी इस्लामिक बैंकिंग के द्वार अब तक बंद थे।

पत्रकार रमण रावल ने अंगदान अभियान को लेकर हिन्दी में पहली किताब लिखी है। यह किताब इंदौर में अंगदान को लेकर चल रहे अभियान को केन्द्र में रखकर लिखी गई है। किताब का पूरा नाम अंगदान : विचार-विजेता-विधि है। भारत में अंगदान करने वालों की संख्या कुछ उन्नत देशों की दुनिया में काफी कम है। अगर भारत में अंगदान करने वालों की संख्या बढ़ जाए, तो हजारों मरीजों की मदद की जा सकती है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की डंगाडोली की इस तस्वीर को लेकर लोग सोशल मीडिया पर लोग शिवराज सिंह के ख़िलाफ टूट पड़े हैं. इस वाइरल तस्वीर से मुख्यमंत्री की छवि को कितना धक्का लगा है, इसका अंदाज़ मुख्यमंत्री और उनके सिपहसालारों को नहीं होगा. मज़ेदार बात कि यह तस्वीर जनसंपर्क विभाग ने जारी की है, यह बताने के लिए कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कितने संवेदनशील हैं। मैं अपनी तरफ से कुछ लिखे बिना ट्विटर और फेसबुक के अपने कुछ मित्रों के कमेंट शेयर कर रहा हूँ।
--प्रकाश हिन्दुस्तानी

इंदौर में 22 और 23 अक्टूबर को संपन्न ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट कई कारणों से फ्लॉप रही। पेड मीडिया में भले ही स्पांसर्ड फीचर के जरिये यह माहौल बनाने की कोशिश की जा रही हो कि इन्वेस्टर्स समिट सफल रही, लेकिन ऐसा है नहीं। अब तक इंदौर में हुई इन्वेस्टर्स समिट में 2016 की समिट सबसे ज्यादा असफल रही। न तो इसमें देश के शीर्ष नेता आए और न ही उद्योग जगत में गर्मजोशी देखी गई। इसके मुख्य 10 कारण ये हैं :

यह अच्छा हुआ कि विकास संवाद ने अपने दसवें मीडिया कानक्लेव का विषय थोड़ा सा बदलकर ‘आजाद भारत में विकास’ कर दिया, वरना संदेश यह रहता कि कॉनक्लेव के पहले ही मीडिया संवाद की सोच नकारात्मक है। अब यह बात और है कि तीन दिन के इस कॉनक्लेव में 14 विचार सत्रों के बाद यहीं निष्कर्ष निकलता है कि विकास जिस दिशा में, जिस तरीके से, जिन लोगों के लिए होना चाहिए था, उस तरह नहीं हो रहा। विकास का लाभ जिन लोगों को मिलना चाहिए वह भी संतोषजनक नहीं है। विकास के जो पैमाने हमने मान रखे हैं, वे भी शायद उचित पैमाने नहीं कहे जा सकते। तीन दिन के सम्मेलन में किसानों की आत्महत्या, दलितों का उत्पीड़न, जेंडर बायस, पर्यावरण की दुर्गति, जन स्वास्थ्य की अनदेखी आदि स्थितियों का समाधान खोजने के बारे में चर्चाएं हुई। विकास से जुड़े अनेक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चाएं करने और सुनने का औपचारिक और अनौपचारिक मौका मिला। विकास के मॉडल, विकास के लक्ष्यों के मायने, आजादी के बाद विकास के हमारे मॉडल, विकास की नीतियों से हमने क्या हासिल किया है, मीडिया विकास के स्वरूप और उसकी मॉडल की कैसी समीक्षा करता है, क्या यह विकास स्वस्थ समाज की तरफ ले जा रहा है और स्वास्थ्य सेवाएं क्या केवल एक बाजार है, खाद्य सम्प्रभुता की स्थिति क्या है, क्या विकास का मतलब अभाव में रहते हुए संतोषी जीवन जीने की तकनीक का विकास है और क्या विकास की प्रक्रिया में मानवीय मूल्यों का ह्रास हो रहा है जैसे विषयों पर चर्चाएं हुर्इं।

वेबदुनिया के शुरू होने से पहले ही मैं सुवि इन्फो से जुड़ चुका था, तब हिन्दी में एक पोर्टल शुरू होने की योजना बन रही थी। वेबदुनिया नाम भी तब फाइनल नहीं हुआ था और पहला प्रस्तावित नाम था हिन्दीदुनिया। बाद में इस पर काफी मंथन हुआ और यह बात सामने आई कि हिन्दीदुनिया नाम से कुछ ऐसा महसूस होता है, मानो यह कोई भारत सरकार की योजना या उपक्रम है। दूसरी बात, हिन्दीदुनिया नाम होने से यह भारत वर्ष की समग्र भाषाओं का पोर्टल शायद नहीं बन सकता और उस जमाने में इंटरनेट नया-नया आया था। इसलिए वेब शब्द जुड़ने से थोड़ा कौतूहल जागता था। अब वेबदुनिया 17 वर्ष पूरे कर चुका है और गूगल 18। एक प्रमुख अंतर यह था कि गूगल सिलिकॉन वैली में था और वेबदुनिया भारत में मध्यप्रदेश के एक शहर इंदौर में। उन दिनों नेट कनेक्टीविटी एक बहुत बड़ी समस्या थी। दूसरी समस्या थी बिजली की कटौती की। सौभाग्य से अब ये दोनों समस्याएं नहीं है, लेकिन इन समस्याओं के बावजूद वेबदुनिया में अपने लिए जमीन तैयार की और फला-फूला।
''कवि हूँ, आदिवासी हूँ, संघर्षों भरी अपनी कथा है." प्राइवेट स्कूल में टीचर. अलीराजपुर में स्कूल और बस्तर विश्विद्यालय में पढ़ना बताया है उन्होंने.''
बस यही परिचय दिया है दोपदी ने अपना. मैंने उनकी कभी कोई किताब पढ़ी तो क्या देखी भी नहीं. मैं उनसे कभी मिला नहीं. संयोग से फेसबुक पर उनकी पोस्ट की हुई कविताएँ पढ़ीं और फिर पढ़ता चला गया. मुझे लगता है कि ये सभी कविताएँ नायाब हैं और स्त्री, आदिवासी समाज और आदिवासी समाज की स्त्री के बारे में बहुत कुछ कह रही हैं.
--प्रकाश हिन्दुस्तानी

‘सेलेब्रेटिंग कैंसर’ सीरिज के तहत विभा रानी का कविता संग्रह समरथ प्रकाशित किया गया है। प्रकाशक भी अवितोको रूम थिएटर की अवधारणा प्रस्तुत करने वाला अवितोको है। अवितोको का मतलब है अजय (ब्रह्मात्मज), विभा (रानी), विधा (सोम्या) और कोशी। हाल ही में विभा रानी कैंसर पर विजय पाकर सामान्य जीवन में लौटी है। उनका यह काव्य संग्रह द्वैभाषिक है। हिन्दी की कविताओं के साथ-साथ सभी कविताओं का अंग्रेजी अनुवाद भी मौजूद है। अनुवादक हैं निगहत गांधी, स्वप्निल दीक्षित और पत्रकार वत्सला श्रीवास्तव। विभा रानी का कहना है कि यह किताब और इसकी कविताएं ज्यादा बड़े पाठक वर्ग तक पहुंचे, इसीलिए इसे हिन्दी के साथ-साथ अंग्रेजी में भी प्रकाशित किया गया है।

विलफुल डिफाल्टर्स के बारे में भले ही आरबीआई कुछ न कहे, भले ही वित्त मंत्री कुछ न कहे, लेकिन एआईबीईए (ऑल इंडिया बैंक इम्पलाइज एसोसिएशन) ने ऐसे विलफुल डिफाल्टर की सूची जारी कर दी है। सूची भी ऐसी-वैसी नहीं, सभी प्रमुख बैंकों के डिफाल्टर्स की सूची। इसमें सरकारी क्षेत्र के बैंक तो है ही, निजी क्षेत्र के भी प्रमुख बैंक जैसे आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, एक्सिस, कोटक महिन्द्रा आदि शामिल है। सबसे ज्यादा और बड़े-बड़े डिफाल्टर सरकारी क्षेत्र की सबसे बड़ी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के है।