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जेल तो जेल ही होती है। चाहे कहीं की भी हो। वहां के नियम-कायदे भी लगभग समान ही होते हैं। क्या भारत की और क्या विदेश की? आमतौर पर जेलों में जैमर लगे होते है, जिस कारण कैदी तो क्या जेल का स्टॉफ भी मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं कर सकता, लेकिन कैदी कोई न कोई रास्ता खोज ही लेते हैं। रायपुर की सेन्ट्रल जेल में दो साल पहले कैदियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी मांगे रखी थी। कैदियों ने अपना फेसबुक पेज भी बनाकर अपलोड कर दिया था और ट्विटर पर भी सक्रिय थे। इसके लिए अपहरण और फिरौती के मामले में जेल में बंद नितिन चोपड़ा को जिम्मेदार ठहराया गया था। बाद में जेल अधिकारियों ने सेन्ट्रल जेल में जांच की और सोशल मीडिया से कैदियों को दूर कर दिया। जेल में कैदी को कनेक्टिविटी की सुविधा नहीं होती। इसलिए रायपुर जेल का मामला बहुत ज्यादा चर्चा में आया था। छत्तीसगढ़ जेल प्रबंधन ने आगे क्या किया, यह बात कभी खुलकर सामने नहीं आई, लेकिन अब एडिनबर्ग की जेल में मोबाइल कनेक्टिविटी का ऐसा ही मामला सामने आया है। जेल अधिकारियों ने पूरी जेल छान मारी, एक-एक कैदी की जांच की और हर कैदी के सामान की स्केनिंग की, लेकिन फिर भी पुलिस को मोबाइल नहीं मिल पाया।

भारत में न केवल फिल्म अभिनेत्रियों, बल्कि टीवी की महिला न्यूज एंकर्स के लुक्स और फिगर की तरफ बड़ा ध्यान दिया जाता है। यह माना जाता है कि हृष्ट-पुष्ट महिला एंकर लोगों को पसंद नहीं आती हैं। राज्यसभा टीवी को छोड़कर किसी भी चैनल पर स्वस्थ न्यूज़ एंकर दिखाई नहीं देती। पता नहीं क्यों, सभी न्यूज़ चैनल्स को एकदम दुबली-पतली, छरहरी काया की न्यूज़ चैनलों की जरूरत होती है।

गत वर्ष 23 जून 2016 को ब्रिटेन में ब्रेक्सिट के लिए मतदान हुआ था। इसमें 51 प्रतिशत से अधिक लोगों ने यूरोपीय यूनियन से बाहर हो जाने के पक्ष में वोट दिए थे। अब करीब डेढ़ साल बाद यह राज खुला है कि रूस ने ब्रेक्सिट के लिए जनमत बनाने में बड़ी भूमिका निभाई और सोशल मीडिया साइट ट्विटर का जमकर उपयोग किया। ब्रेक्सिट के पक्ष में ट्विटर पर लाखों संदेश जारी किए गए थे, जिनमें यूरोपीय यूनियन में ब्रिटेन के शामिल रहने के नुकसान के बारे में बताया गया था। रूस चाहता था कि ब्रिटेन यूरोपीय यूनियन से बाहर निकले, ताकि ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन दोनों कमजोर पड़े और उसका प्रभाव बढ़ जाए।

मनोवैज्ञानिकों और मनोचिकित्सकों ने एक महत्वपूर्ण अध्ययन करने के बाद निष्कर्ष निकाला है कि सेल्फी के शौक को अगर दीवानगी की हद तक न अपनाया जाए, तो यह उतना बुरा नहीं है। सेल्फी को लेकर आए दिन खबरें और लेख छपते रहते हैं, जिसमें खतरनाक तरीके से सेल्फी लेने के नुकसान बताए जाते हैं। कई कार्यालयों और शिक्षा संस्थाओं में तो मोबाइल पर ही प्रतिबंध है। यह भी कहा जाता है कि सेल्फी के शौक लोगों को आत्मकेन्द्रित और आत्ममुग्ध बना देते हैं।

सोशल मीडिया की खबरों को बिना पुष्टि के जारी कर देना बीबीसी को भारी पड़ गया, जब एक पैरोडी अकाउंट पर आधारित सूचना को बीबीसी ने समाचार के रूप में प्रसारित कर दिया। बुधवार की सुबह बीबीसी ने एक पैरोडी अकाउंट की सूचना पर खबर बना दी, जो उसकी प्रतिष्ठा के लिए भारी पड़ी। ट्विटर पर कई लोग अपना या दूसरे का पैरोडी अकाउंट बनाते है। जिसका उद्देश्य होता है, मनोरंजन करना। कई बार ऐसे पैरोडी अकाउंट्स का उपयोग शरारत करने के लिए भी होता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की एक छोटी सी चूक भारी पड़ गई। उसके लिए ट्रम्प न केवल हंसी के पात्र बने, बल्कि उन्हें अपना ट्वीट भी डिलीट करना पड़ा। ब्रिटिश सांसदों ने उनका मजाक अलग से उड़ाया। ट्वीट डिलीट किए जाने के बाद भी ट्विटर पर ट्रम्प का मजाक उड़ता रहा।